21/04/2021
राजनीति और राजा यह शब्द सुनते ही हमें सबसे पहले क्रूरता, हिंसा,अत्याचार ,कपट और कुटिलता की प्रतिध्वनि सुनाई देने लगती है। लेकिन जब हम भारत के महान सम्राट अशोक की ध्वनि सुनते हैं तो वहां से सिर्फ और सिर्फ प्रेम और करुणा की प्रति ध्वनियां ही सुनाई देती है। सम्राट अशोक एक ऐसे समय में सत्तासीन हुए जब उनके दादा चंद्रगुप्त ने आचार्य चाणक्य की सहायता से एक विशाल साम्राज्य का निर्माण कर लिया था। जब उनके पिता बिंदुसार ने चंद्रगुप्त के साम्राज्य को स्थिर और संगठित कर लिया था। लेकिन अभी भी मौर्य साम्राज्य में बहुत कुछ करना बाकी था। इतिहास तलवार के बल पर दुनिया जीत लेने वाले विजेताओं से भरा पड़ा है। लेकिन सम्राट अशोक ऐसे पहले शासक थे जिन्होंने लोगों के दिलों को जीत लेने की शुरुआत की।
सम्राट अशोक ने राजनीति के प्रतिमान ही बदल दिए और धर्म को राजनीति का आधार बना लिया । वे राजा के भेष में एक साधु प्रतीत होते हैं। अपने दूसरे स्तंभ लेख में वे स्वयं पूछते हैं कि "कियम चू धम्में?" अर्थात धर्म क्या है? और दूसरे एवं सातवें स्तंभ लेख में धर्म को परिभाषित करते हुए वे कहते हैं" अपासिनवे बहूकयाने दया दाने सचे सोचये माददे साधवे च।"
अर्थात धर्म है पाप कम करना, लोगों का कल्याण करना, दया रखना, दान देना, सत्यवादीता, पवित्रता ,नम्रता और मृदुता, तथा साधुता।
लेकिन अशोक के प्रारंभिक जीवन को देखें, तो लोगों के शोक को दूर करने वाला अशोक अपनी क्रूरता के कारण चंड अशोक कहलाता था । अगर सिंगली अनुश्रुतियों पर विश्वास करें तो अपने 99 भाइयों की हत्या कर अशोक ने राज सिंहासन प्राप्त किया था। अगर हम इन अनुश्रुतियों पर विश्वास ना भी करें तो भी अशोक द्वारा
कलिंग का युद्ध तो इतिहास में प्रामाणिक रूप से स्वीकार्य है। अपने 13वें शिलालेख में सम्राट अशोक ने खुद ही लिखा है कि कलिंग युद्ध में डेढ लाख व्यक्ति बंदी बनाए गए, 1 लाख लोगों की हत्या की गई तथा इससे भी कई गुना अधिक लोग मारे गए। यह अशोक के पूर्ववर्ती और परवर्ती व्यक्तित्व का विरोधाभास है कि चंड अशोक कालांतर में "देवानाम प्रिय प्रियदर्शी" राजा बन गया।
आज के वीडियो में हम इसी रोमांचक इतिहास की चर्चा करेंगे जो भारतीय इतिहास के गौरवशाली क्षणों की साक्षी है।
इतिहास तलवार के बल पर दुनिया जीत लेने वाले विजेताओं से भरा पड़ा है। लेकिन सम्राट अशोक ऐसे पहले शासक थे जिन्होंने ल.....