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how to manage stress? easy tips !
16/05/2021
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15/05/2021
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Rani Laxmibai/झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने तलवार किसके विरुद्ध उठाई थी? Bharat Gatha 25 ारत गाथा मे, मैं आज लेकर आई हूं वीरता की प्रतिमूर्ति, देशभक्ति की साकार स्वरूप, भारत के प्रथम स्वाध.....
10/05/2021
Mahakavi Kalidas/कालिदास और विद्योत्तमा की प्रेरक कहानी/Bharat Gatha 1 ाष्ट्र केवल भूगोल नहीं होता वह भूगोल की गोद में पलने वाले लोगों उनकी संस्कृतियों और उनकी परंपराओं से बन...
09/05/2021
Stress Management Tips/ तनाव प्रबंधन के आसान टिप्स ेंशन ,तनाव , स्ट्रैस ह्यूमन लाइफ का पार्ट है। जिसका सामना हम सभी को कभी न कभी करना पड़ता है। इसके मल्ट...
27/04/2021
#1857
भारत गाथा में , मैं आज लेकर आई हूं, महान वीरांगना ,अमर शहीद, मां झलकारी बाई की गाथा।
एक ऐसी वीरांगना जिसके बारे में खुद अंग्रेज जनरल रोज ने लिखा था कि यदि भारत की 1% महिलाएं भी उनके जैसी हो जाएं तो हमें जल्दी ही भारत छोड़ना होगा। जब सन 1857 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध भारत में युद्ध की रणभेरी बजी, तो झांसी भी उससे अछूता नहीं रहा। रानी लक्ष्मी बाई के नेतृत्व में झांसी ने ईस्ट इंडिया कंपनी को चुनौती दी ।और स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मी बाई के साथ खड़ी थी वीरांगना झलकारी बाई ।
वीरांगना झलकारी बाई ने रानी लक्ष्मीबाई के प्राणों को बचाने के लिए खुद को रानी बताते हुए युद्ध करने का फैसला किया। एक ऐसे समय पर जब झांसी संकट में था, इस युद्ध में झलकारी बाई के पति शहीद हो चुके थे, भारत माता की इस पुत्री ने अपने व्यक्तिगत शोक और दुख को त्याग कर पति का शोक मनाने की बजाय मातृभूमि के लिए युद्ध करने को प्राथमिकता दी। पूरी वीरता के साथ लड़ते हुए वीरांगना झलकारी बाई शहीद हो गई ।उस मिट्टी की रक्षा के लिए जिसमें वह पैदा हुई थी। उस राज्य की रक्षा के लिए जिसे वह अपनी मातृभूमि समझती थी। झलकारी बाई की शहादत एक संदेश दे गई की महिलाएं वीरता में किसी से कम नहीं । दलित परिवार में जन्मी झलकारी बाई का अपनी मातृभूमि के लिए यह सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में से एक है। और भारत की युवा पीढ़ी में मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव जगा रही है। वीरांगना मां झलकारी बाई को मेरा शत शत नमन।
Jhalkari Bai/ वीरांगना झलकारी बाई कोली की गाथा /Bharat Gatha 24 #1857भारत गाथा में , मैं आज लेकर आई हूं, महान वीरांगना ,अमर शहीद, मां झलकारी बाई की गाथा।एक ऐसी वीरांगना जिसके बारे ....
21/04/2021
राजनीति और राजा यह शब्द सुनते ही हमें सबसे पहले क्रूरता, हिंसा,अत्याचार ,कपट और कुटिलता की प्रतिध्वनि सुनाई देने लगती है। लेकिन जब हम भारत के महान सम्राट अशोक की ध्वनि सुनते हैं तो वहां से सिर्फ और सिर्फ प्रेम और करुणा की प्रति ध्वनियां ही सुनाई देती है। सम्राट अशोक एक ऐसे समय में सत्तासीन हुए जब उनके दादा चंद्रगुप्त ने आचार्य चाणक्य की सहायता से एक विशाल साम्राज्य का निर्माण कर लिया था। जब उनके पिता बिंदुसार ने चंद्रगुप्त के साम्राज्य को स्थिर और संगठित कर लिया था। लेकिन अभी भी मौर्य साम्राज्य में बहुत कुछ करना बाकी था। इतिहास तलवार के बल पर दुनिया जीत लेने वाले विजेताओं से भरा पड़ा है। लेकिन सम्राट अशोक ऐसे पहले शासक थे जिन्होंने लोगों के दिलों को जीत लेने की शुरुआत की।
सम्राट अशोक ने राजनीति के प्रतिमान ही बदल दिए और धर्म को राजनीति का आधार बना लिया । वे राजा के भेष में एक साधु प्रतीत होते हैं। अपने दूसरे स्तंभ लेख में वे स्वयं पूछते हैं कि "कियम चू धम्में?" अर्थात धर्म क्या है? और दूसरे एवं सातवें स्तंभ लेख में धर्म को परिभाषित करते हुए वे कहते हैं" अपासिनवे बहूकयाने दया दाने सचे सोचये माददे साधवे च।"
अर्थात धर्म है पाप कम करना, लोगों का कल्याण करना, दया रखना, दान देना, सत्यवादीता, पवित्रता ,नम्रता और मृदुता, तथा साधुता।
लेकिन अशोक के प्रारंभिक जीवन को देखें, तो लोगों के शोक को दूर करने वाला अशोक अपनी क्रूरता के कारण चंड अशोक कहलाता था । अगर सिंगली अनुश्रुतियों पर विश्वास करें तो अपने 99 भाइयों की हत्या कर अशोक ने राज सिंहासन प्राप्त किया था। अगर हम इन अनुश्रुतियों पर विश्वास ना भी करें तो भी अशोक द्वारा
कलिंग का युद्ध तो इतिहास में प्रामाणिक रूप से स्वीकार्य है। अपने 13वें शिलालेख में सम्राट अशोक ने खुद ही लिखा है कि कलिंग युद्ध में डेढ लाख व्यक्ति बंदी बनाए गए, 1 लाख लोगों की हत्या की गई तथा इससे भी कई गुना अधिक लोग मारे गए। यह अशोक के पूर्ववर्ती और परवर्ती व्यक्तित्व का विरोधाभास है कि चंड अशोक कालांतर में "देवानाम प्रिय प्रियदर्शी" राजा बन गया।
आज के वीडियो में हम इसी रोमांचक इतिहास की चर्चा करेंगे जो भारतीय इतिहास के गौरवशाली क्षणों की साक्षी है।
Devanampiy piydassi Ashoka/देवानामपिय पियदस्सी सम्राट अशोक की गाथा / Bharat Gatha 23 इतिहास तलवार के बल पर दुनिया जीत लेने वाले विजेताओं से भरा पड़ा है। लेकिन सम्राट अशोक ऐसे पहले शासक थे जिन्होंने ल.....
24/03/2021
Bhagat Singh/ शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की गाथा( जरा याद करो कुर्बानी ) / Bharat Gatha 22 सिंह मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च बलिदान के प्रतीक हैं । भगत सिंह अन्याय और शोषण पर आधारित व्यवस्था के ...
15/03/2021
Chandra Shekhar Azad / चंद्रशेखर आजाद की गाथा (जरा याद करो कुर्बानी) Bharat Gatha 21 ारत मां के महान सपूत, चंद्रशेखर आजाद एक अद्वितीय नेता, महान देशभक्त, और निर्भीक क्रांतिकारी स्वतंत्रता से....
08/03/2021
03/03/2021
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