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17/07/2026

गोह थाना (औरंगाबाद) का लिखित कबूलनामा— न्याय की लड़ाई में एक और बड़ी जीत! 🔥

​लगातार कानूनी संघर्ष, आरटीआई (RTI) और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग (केस नंबर: 2323/4/40/2026) के दबाव के बाद आखिरकार गोह थाना पुलिस को लिखित प्रतिवेदन जारी करना पड़ा है।

​थाना ने लिखित रूप में स्वीकार किया है कि मेरे द्वारा मांगी गई 11/02/2025 की सीसीटीवी फुटेज के संबंध में उन्होंने उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया है और वरीय पदाधिकारी का आदेश आते ही फुटेज उपलब्ध करा दी जाएगी।

​जो पुलिस पहले आनाकानी कर रही थी, आज वह बैकफुट पर है। अब देखना यह है कि औरंगाबाद एसपी कार्यालय से यह अंतिम आदेश कब तक जारी होता है। एक आम नागरिक के अधिकारों की यह लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी! ✊

​कृपया इस वीडियो को अधिक से अधिक शेयर कर प्रशासनिक पारदर्शिता में अपना सहयोग दें।

​ GohThana SocialMediaActivism Arwal BiharGrievance

23/04/2026

प्रणाम साथियों! आज मैं आपसे एक ऐसी बात साझा करने जा रहा हूँ जिसे शायद समाज 'विवादित' कहे, पर मेरा शोध इसे 'वैज्ञानिक' कहता है।
लोग कहते हैं—स्त्री और पुरुष कंधे से कंधा मिलाकर चलें। लेकिन मेरा शोध (अपना ज्ञान) कहता है कि प्रकृति ने स्त्री और पुरुष को 'समान' (Equal) बनाया है, पर 'एक जैसा' (Identical) नहीं। जब हम प्रकृति के बनाए गए इस सूक्ष्म अंतर को मिटाकर उन्हें बिल्कुल एक ही सांचे में ढालने की कोशिश करते हैं, तो समाज और शरीर, दोनों में 'रोग' बढ़ते हैं।
प्रकृति में हर जीव की अपनी एक धुरी होती है। जब हम दिखावे की होड़ में उस धुरी को छोड़ते हैं, तो मानसिक और शारीरिक तनाव पैदा होता है।
पुरुष और स्त्री की ऊर्जा अलग-अलग है। जब इन दोनों ऊर्जाओं को बिना सोचे-समझे एक ही काम और एक ही गति पर लगाया जाता है, तो संतुलन बिगड़ता है और यही बीमारियों की जड़ है।
समानता का अर्थ हक देना है, लेकिन भूमिकाओं को आपस में गड्ड-मड्ड कर देना शरीर की संरचना के खिलाफ है।
मैं किसी को पीछे रखने की बात नहीं कर रहा, मैं 'प्रकृति के साथ चलने' की बात कर रहा हूँ। क्योंकि प्रकृति से छेड़छाड़ ही रोगों को जन्म देती है।"

23/04/2026

इतिहास का चक्र और जनक का सत्य"

भारत की कहानी केवल तारीखों की नहीं, बल्कि मानसिकता की है। जब हम अपनी जड़ों (प्रकृति और अपना ज्ञान) से जुड़ते हैं, तो हम 100 बरस आज़ाद रहते हैं। और जैसे ही हम पश्चिम की नकल और साक्ष्यों के पीछे भागते हैं, हम मानसिक रूप से 100 बरस के लिए गुलाम हो जाते हैं।

आज हम फिर उसी मोड़ पर हैं। अगर हमने 'जनक तकनीक' जैसी स्वदेशी सोच नहीं अपनाई, तो हम तकनीक के गुलाम बन जाएंगे। आज़ादी का मतलब केवल झंडा फहराना नहीं, अपनी बुद्धि पर अपना नियंत्रण होना है।"​

22/04/2026

100 बरस आज़ादी, तो 100 बरस गुलामी... यही है भारत की असली कहानी!
​आज लोग मुझसे वैज्ञानिक प्रमाण मांगते हैं। मैं उनसे कहता हूँ—प्रमाण पन्नों पर होते हैं, सत्य अनुभव में होता है। मेरा शोध स्पष्ट है: अगर इंसान को बचाना है, तो पहले उन बेजुबानों को बचाओ जिनका घर हमने उजाड़ दिया है।
​विज्ञान दवा देता है, जनक तकनीक 'दृष्टि' देती है। तय आपको करना है कि आप आज़ाद सोच के साथ जीना चाहते हैं या नकल की गुलामी में।
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अरवल सदर अस्पताल में 6 महीने से खराब पंखे का मामला: 'मगध की आवाज़' का बड़ा असर! 📢सदर अस्पताल अरवल के डिजिटल पंजीकरण केंद्र...
12/02/2026

अरवल सदर अस्पताल में 6 महीने से खराब पंखे का मामला: 'मगध की आवाज़' का बड़ा असर! 📢

सदर अस्पताल अरवल के डिजिटल पंजीकरण केंद्र में आने वाले मरीजों को अब गर्मी में राहत मिलेगी। 6 महीने से खराब पड़े पंखे की शिकायत जब लोक शिकायत निवारण तक पहुँची, तो प्रशासन को जवाब देते नहीं बना।

मामले की मुख्य बातें:

शिकायत: ग्राम असलानपुर कुटिया के जनक कुमार ने अस्पताल की इस अव्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोला था।

अस्पताल का कबूलनामा: अस्पताल प्रशासन ने माना कि साल 2025 में यह पंखा 4 बार खराब हुआ था।

अभी की स्थिति: शिकायत के बाद फिलहाल एक स्टैंड पंखा दिया गया है।

बड़ा फैसला: लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेश पर अब अगली गर्मी से पहले यहाँ नया पंखा लगाया जाएगा।

सरकारी तंत्र को जगाने के लिए जागरूक नागरिक बनना जरूरी है।👏

आपका क्या सोचना है? क्या आपके इलाके के अस्पतालों में भी ऐसी समस्याएं हैं? कमेंट में हमें बताएं।

12/02/2026

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Aslanpur Kutiya
Arwal
804401

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