All India Bhojpuri Student Union

All India Bhojpuri Student Union अखिल भारतीय भोजपुरी छात्र संघ
Estd. २०१४. R O- ARA BHOJPUR BIHAR INDIA. (A SARJANA TRUST INTIATIVE)

Hi All India Bhojpuri student Union,Status update: Your Independence Day post 1705254 has been sent.
14/08/2026

Hi All India Bhojpuri student Union,

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12/08/2026

करोड़ों लोगों द्वारा बोले जाने के बावजूद भोजपुरी को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल न किए जाने के मुख्य कारण राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, इसे हिंदी की एक उप-बोली (Dialect) के रूप में देखा जाना और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी प्रशासनिक व कानूनी पेचीदगियां हैं

।मुख्य कारणहिंदी की उप-भाषा मानना:
प्रशासनिक और जनगणना के स्तर पर कई बार भोजपुरी को स्वतंत्र भाषा के बजाय हिंदी की एक बोली माना जाता है।

राजनीतिक उदासीनता:
मजबूत राजनीतिक दबाव और निरंतर पैरवी की कमी के कारण संसद में यह मामला लंबित रह जाता है।

मानकों और लिपि का विवाद:
किसी भाषा को संवैधानिक दर्जा देने के लिए उसके मानक व्याकरण, समृद्ध साहित्यिक इतिहास और एक सर्वसम्मत लिपि (देवनागरी होने के बावजूद प्रशासनिक स्पष्टता) पर विस्तृत डेटा की मांग की जाती है

।अन्य भाषाओं की लंबी कतार:
देश की कई अन्य क्षेत्रीय भाषाएं भी आठवीं अनुसूची में शामिल होने की कतार में हैं, जिससे प्रक्रिया जटिल हो जाती है।

यदि आप चाहें, तो मै भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए अब तक उठाए गए संसदीय कदमों और चल रहे आंदोलनों के बारे में और जानकारी दे सकता हूँ।

06/08/2026

Noonmati, Guwahati Assam

21/07/2026
20/07/2026

भोजपुरी में गीत मुख्य रूप से लोक-संस्कार, ऋतुओं, और जीवन शैली पर आधारित होते हैं। इन्हें मुख्य श्रेणियों जैसे—संस्कार गीत (सोहर, विवाह), ऋतु गीत (कजरी, चैती), और श्रम व कथा गीतों (बिरहा, निर्गुण, विदेशिया) में बांटा जा सकता है।

भोजपुरी गीतों के मुख्य प्रकार भोजपुरी संस्कृति में गाए जाने वाले प्रमुख गीतों का वर्गीकरण इस प्रकार है

:संस्कार गीत: ये गीत जीवन के विभिन्न संस्कारों और महत्वपूर्ण अवसरों पर गाए जाते हैं।

सोहर और झूमर: बच्चे के जन्म के समय

।विवाह गीत: मटकोर, नेग, और विदाई के समय गाए जाने वाले गीत।

जनेऊ गीत: यज्ञोपवित (जनेऊ) संस्कार के अवसर पर

।ऋतु गीत: मौसम और त्योहारों के अनुसार गाए जाने वाले गीत।

कजरी और झूला: सावन के महीने में।

चैती और होली: चैत्र महीने और फागुन में गाए जाने वाले गीत।

बारहमासा: साल के बारह महीनों के प्राकृतिक बदलाव और विरह पर आधारित गीत।

श्रम व कृषि गीत: खेतों में काम करते समय या थकान मिटाने के लिए गाए जाने वाले गीत।

रोपनी गीत: धान की रोपाई के समय।

सोहनी गीत: निराई के समय।

धार्मिक और कथा गीत: देवी-देवताओं की स्तुति और पौराणिक कथाओं पर आधारित।

भजन और पचरा: माता देवी के गीत।

निर्गुण: ईश्वर की भक्ति और सांसारिक मोह-माया से विरक्ति के गीत।

अन्य लोकगीत:

बिरहा और विदेशिया: मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा गाए जाने वाले, जो विरह और सामाजिक विषयों पर आधारित होते हैं

।इन गीतों को मूल रूप से पारंपरिक वाद्ययंत्रों (जैसे ढोलक और मंजीरा) के साथ कहरवा या दादरा ताल में गाया जाता है

।भोजपुरी के पारंपरिक गीतों के विभिन्न प्रकारों के बारे में अगर कोई जानकारी हो तो कृपा कर बताने का कष्ट करे

आगे बढ़ी कुछ लिखी
19/07/2026

आगे बढ़ी कुछ लिखी

मिथिला छात्र संघ के अन श न
18/07/2026

मिथिला छात्र संघ के अन श न

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