23/09/2026
बचपन में सोचा था कि बड़े होकर टीचर बनेंगे तो आराम रहेगा...
तब टीचर्स अपनी मर्जी से पढ़ाते थे और स्ट्रेस सिर्फ स्टूडेंट्स को होता था। (गलती किसी की भी हो, कूटे हम ही जाते थे।)
आज जब टीचर बने तो समझ आया कि समय बदल चुका है। अब बच्चे मस्त और स्ट्रेस-फ्री हैं, और सारी चिंताएं टीचर्स के हिस्से आ गई हैं। (गलती किसी की भी हो, कूटे....... ☹️)
हमारी जनरेशन को बचपन में स्टूडेंट बनकर भी प्रेशर मिला और आज टीचर बनकर भी।
आखिर हमारी जनरेशन ने ऐसा क्या किया था जो हर दौर में स्ट्रेस हमारे ही हिस्से आया।😃