18/12/2023
https://youtu.be/QBMtZirQjsM
*अळजाल (भालु) एक ऐसा जानवर है जो घायल होने पर आदमी की तरह रोता है*
गोंडी (कोया) संस्कृति में हमारे 88 लिंगो और प्राचीन पुरखाओं ने पेड़, पौधे, पशु, पक्षी एवं मानवों को प्रथम स्थान दीया है इनके बिना हमारा जीवन अधूरा है, प्रकृति ने इस गन्डोदाई (पृथ्वी) पर इंसान के जैसा कोई दूसरा प्राणी नहीं बनाया लेकिन हम प्रकृति में के जीवों को ध्यान से देखते हैं तो पता चलता है कि कई सारे प्राणियों में इंसानों के गुण पाए जाते हैं या फिर इंसान में कई सारे प्राणियों के गुण पाए जाते हैं। अळजाल (रीछ, भालू) एक ऐसा जानवर है जो घायल होने पर इंसानों की तरह रोता है। दर्द में इंसानों की तरह कराहता है।
अभी हम अळजाल (भालु) शब्द की व्युत्पत्ति को एक्सप्लेन करते हैं
गोंडी संस्कृति में पाहन्दी पारी कुपार लिंगो ने पेड, पशु एवं पक्षी को प्रथम स्थान दीया है. इसमें से लिंगो ने एक गोंडी पाडी ''आडे'' गोत्र की रचना की है, जो की ''आडे'' गोत्र का टोटेम अळजाल (भालु) याम (प्राणी) है.
1. प्रथम क्रियापद के अनुसार गोंडी भाषा में एक ''अळाना'' क्रिया है जिसका मतलब रोना होता है. जब भी अळजाल (भालु) को कोई चोट या जखम होती है तो वह इंसानों जैसे रोने लगता है. या फिर चिल्लाने लगता है और लेंग (आवाज) अळा, अळा निकालता है.
क्रियापद का साधारण रूप :- अळाना/अडाना = रोना (Cry)
मुर निवजेक (मुख्य क्रियापद) :- अळा/अडा = रो (Cry)
सिळ निवजेक (मूल क्रियापद) :- अळ/अड = रो (Cry)
सिळ निवजेक (मूल क्रियापद) :- अळ/अड = रो,
संज्ञा :- येर, आर, एर, डेर = पानी
''अळ'' शब्द को सन्धि विक्षेप करके > अ + ळ/ड = अव्वाल (माँ) + डेर (पानी)
उपर्युक्त शब्दोँ से अर्थ जानिए, जब भी बच्चे का जन्म होता है तो सबसे पहले बच्चा अव्वाल (माँ) को पुकारके रोने लगता है.
2. द्वितीय क्रियापद के अनुसार, जियाना = मारना, जिया = मार, जिम = मार
सिळ निवजेक (मूल क्रियापद) :- जिम = मार
जिम शब्द का सन्धि विक्षेप :- ज + इ + म > ज = मार
जब भी भालु को किसी कारणवश चोट लगती है या कोई उसे मारता है तो भी वह इंसानों जैसे रोता है.
3. तृतीय संज्ञा के अनुसार, आल शब्द का मतलब मानव, कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति, माता आदि होता है.
सभी तीनो शब्दो को जोड़ने के बाद अळजाल (भालु) शब्द बनता है जैसे,
Male :- अळ + ज + आल = अळजाल (रीछ, भालु, Bear, अस्वल)
Female :- अळ + ज + ए = अळजे (रीछ, भालु, Bear, अस्वल)
जन्म के बाद रोने वाला जानवर केवल इंसान ही है। इंसान एकमात्र ऐसा स्तनधारी है जो जन्म के बाद रोता है। अन्य स्तनधारी जन्म के बाद रोते नहीं हैं, बल्कि वे अन्य तरीकों से अपनी मां को बताते हैं कि वे जीवित हैं और मदद की जरूरत है। उदाहरण के लिए, घोड़े, गाय और बकरी जन्म के बाद तेज आवाज में चीखते हैं। कुत्ते और बिल्लियाँ जन्म के बाद अपने पैरों को हिलाती हैं या अपने सिर को हिलाती हैं।
इंसान जन्म के बाद रोते हैं क्योंकि उनके पास एक विशेष तंत्र होता है जो उन्हें रोने की अनुमति देता है। यह तंत्र एक विशेष तरह की तंत्रिका कोशिकाओं से बना होता है जो आंसू पैदा करती हैं। जब कोई बच्चा पैदा होता है, तो ये कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं और आंसू पैदा करती हैं। ये आंसू बच्चे की नाक और मुंह को साफ करने में मदद करते हैं, और वे बच्चे को ठंडा रखने में भी मदद करते हैं।
*किसाना उईकाल* ✍🏼
*अमरावती, महाराष्ट्र* 🤳
भालू के बारे में गोंड़ी भाषा में संक्षिप्त माहिती जानिए। इस वीडियो में आप जान जाओगे की अळजाल (भालु) शब्द की व्युत्पत....