23/06/2026
साहब का 'शोक-उत्सव'
बाढ़ आए, पुल ढहे या भड़के भीषण अग्निकांड,
साहब की तिजोरी में तो रोज़ मचता है ब्रह्मांड!
जनता की चीखों में उन्हें शहनाई सुनाई देती है,
हर लाश में साहब को अपनी नई कमाई दिखाई देती है।
फैक्ट्री में आग लगे या ढह जाए कोई अस्पताल,
कमीशन एडवांस हो, तो साहब का हर साल है बेमिसाल!"
यमराज भी दफ्तर के बाहर टोकन लेकर रोते हैं,
बिना रिश्वत के साहब मौत के कागज़ भी नहीं छूते हैं।
ज़मीर बेचकर जो खुद को देश का 'हाकिम' कहते हैं,
वो मासूमों के ख़ून पर ऐश के महल में रहते हैं।