05/09/2026
विद्या भारती हरियाणा के तत्वावधान में संचालित नंदलाल गीता विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, तेपला में आज शिक्षक दिवस एवं गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन कार्यक्रम बड़े श्रद्धा, सम्मान एवं उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री प्रदीप खेड़ा जी, प्रबंध समिति सदस्य श्री मनीष जी, भारत विकास परिषद विवेकानंद शाखा अंबाला से श्री अशोक कक्कड़ जी, श्री सुरेश शर्मा जी, श्री विजय थापर जी, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री घनश्याम जी, आचार्य भैया-दीदी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञानदायिनी माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात मंच संचालन करते हुए विद्यालय की आचार्या बहन ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार भी होता है। शिक्षक अपने संस्कारों, मार्गदर्शन और प्रेरणा से विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा प्रदान करता है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री घनश्याम जी ने उपस्थित अतिथियों का परिचय करवाते हुए गुरु की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को परमपिता परमात्मा के समान स्थान दिया गया है। गुरु वह प्रकाश स्तंभ है जो हमें अज्ञानरूपी अंधकार से ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण और योगदान की सराहना की।
भारत विकास परिषद विवेकानंद शाखा से पधारे श्री अशोक कक्कड़ जी ने परिषद के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह एक गैर-राजनीतिक सामाजिक संस्था है, जो समय-समय पर राष्ट्रहित, समाजसेवा एवं संस्कार निर्माण के अनेक कार्य करती रही है। इसके उपरांत श्री विजय थापर जी ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हुए देश सेवा की शपथ दिलाई।
विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री प्रदीप खेड़ा जी ने भारत विकास परिषद विवेकानंद शाखा का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक वास्तव में राष्ट्र निर्माता होता है, जो अपने ज्ञान, संस्कार और आदर्शों से समाज की दिशा निर्धारित करता है। उन्होंने आगे कहा कि गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन कार्यक्रम केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के महत्व को भी रेखांकित करता है। एक गुरु के लिए उसका शिष्य अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि शिष्य की सफलता ही गुरु के परिश्रम और समर्पण की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। पूरे वातावरण में गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा, सम्मान और भारतीय संस्कृति के उच्च आदर्शों की झलक दिखाई दी।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। सभी उपस्थित जनों ने गुरु-शिष्य संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वोत्तम योगदान देने का संकल्प लिया।