23/03/2026
पहला प्रश्न:
भगवान, जीवन में बहुत दुख हैं और बहुत सी समस्याएं हैं। क्या प्रेम और भक्ति में डूबने के पूर्व उन्हें सुलझाना आवश्यक नहीं है?
ओशो – भाई मेरे, उन्हें सुलझाओगे कैसे? उलझाव ही यही है कि प्रेम का अभाव है। जीवन की समस्याएं ही इसलिए हैं कि प्रेम के रसस्रोत से हमारे संबंध छूट गए हैं। भक्ति का प्रवाह नहीं है इसलिए जीवन में समस्याओं के डबरे भर गए हैं।
तुम तो यह कह रहे हो, अभी लोग बहुत बीमार हैं, अभी औषधि की बात करने से क्या फायदा? पहले लोग तो ठीक हो लें, पहले लोग स्वस्थ हो लें फिर औषधि की चिंता करेंगे। तुम्हारा प्रश्न ऐसा है।
भक्ति औषधि है। भक्ति का अर्थ क्या है? भगवान से जुड़ने का उपाय। उससे नहीं जुड़े हैं, यही तो दुख है। उससे टूट गए हैं, यही तो पीड़ा है। उसे भूल गए हैं, विस्मरण कर बैठे हैं, यही तो अंधकार है। उसकी तरफ पीठ कर ली है और कचरे की तरफ उन्मुख हो गए हैं। धन से जुड़ गए हैं, ध्यान से टूट गए हैं। पद से जुड़ गए हैं, परमात्मा से टूट गए हैं। देह से जुड़ गए हैं, आत्मा से टूट गए हैं। इससे ही जीवन में इतना दुख है।
–ओशो(नाम सुमिर मन बावरे)