25/04/2026
कुछ कर्म भी जग में करना है;
कुछ ध्यान करो कुछ ज्ञान कहो,
सद्गुरु के संग भी रहना है।
जीवन में बहु आयामी हो,
मध्यम पथ का अनुगामी हो।
सम्यक्ता शरणं गच्छामि,
भज गोरख शरणं गच्छामि।।
🏵 -Samarthguru Ji 🏵
15/04/2026
🌿 ध्यान एवं आरोग्य शिविर: एक दिवसीय रूपांतरण यात्रा 🌿
अपने स्वास्थ्य और मन को नया जीवन देने के लिए इस विशेष शिविर का हिस्सा बनें।
📅 कब: 26 अप्रैल | 10 AM - 5 PM
📍 कहाँ: समर्थगुरु धाम, मुरथल
https://share.google/G6WmibCBnNXnXBuMb
🍽️ सुविधाएं: नाश्ता, लंच और चाय की व्यवस्था।
💰 सहयोग राशि: मात्र ₹99/-
👉 पंजीकरण लिंक: https://rzp.io/rzp/DhyanShivir
सीटें सीमित हैं, आज ही अपनी जगह सुरक्षित करें!
rzp.io
29/03/2026
🌼 *Samarthguru Dhara* has been teaching Sahaj Yoga since 1997.
It has combination of following ancient traditions:
A. *Gyan Yoga* (The Path of Enlightened Living) 14 programs.
B. *Bhakti Yoga* (The path of Devotional Living) 14 programs.
C. *Hath Yoga* (The Path of Healthy Living) 14 programs.
D. *Karma Yoga* (The Path of Proactive Living) 23 programs.
All these programs have been *scientifically designed by Samarthguru Siddharth Aulia* and
presented *both offline and online* by *100+ expert Acharyas* trained by him.
🌐*Website:*
samarthgurudhara.org
🔰*For booking:*
📞+91 9671400193/96
Samarthguru Dhara: The Science of Spiritual Awakening
Experience spiritual growth, meditation retreats, and inner awakening with Samarthguru, a living Enlightened Master – at Samarthguru Dhara.
23/03/2026
पहला प्रश्न:
भगवान, जीवन में बहुत दुख हैं और बहुत सी समस्याएं हैं। क्या प्रेम और भक्ति में डूबने के पूर्व उन्हें सुलझाना आवश्यक नहीं है?
ओशो – भाई मेरे, उन्हें सुलझाओगे कैसे? उलझाव ही यही है कि प्रेम का अभाव है। जीवन की समस्याएं ही इसलिए हैं कि प्रेम के रसस्रोत से हमारे संबंध छूट गए हैं। भक्ति का प्रवाह नहीं है इसलिए जीवन में समस्याओं के डबरे भर गए हैं।
तुम तो यह कह रहे हो, अभी लोग बहुत बीमार हैं, अभी औषधि की बात करने से क्या फायदा? पहले लोग तो ठीक हो लें, पहले लोग स्वस्थ हो लें फिर औषधि की चिंता करेंगे। तुम्हारा प्रश्न ऐसा है।
भक्ति औषधि है। भक्ति का अर्थ क्या है? भगवान से जुड़ने का उपाय। उससे नहीं जुड़े हैं, यही तो दुख है। उससे टूट गए हैं, यही तो पीड़ा है। उसे भूल गए हैं, विस्मरण कर बैठे हैं, यही तो अंधकार है। उसकी तरफ पीठ कर ली है और कचरे की तरफ उन्मुख हो गए हैं। धन से जुड़ गए हैं, ध्यान से टूट गए हैं। पद से जुड़ गए हैं, परमात्मा से टूट गए हैं। देह से जुड़ गए हैं, आत्मा से टूट गए हैं। इससे ही जीवन में इतना दुख है।
–ओशो(नाम सुमिर मन बावरे)
06/03/2026
* # *Spiritual Retreat*
🌷 समर्थगुरुधारा, जो वैज्ञानिक अध्यात्म की एकमात्र धारा है और जो आत्मज्ञान (Enlightenment) एवं उससे आगे की दिशा में मार्गदर्शन करती है, आपको एक दिवसीय आध्यात्मिक शिविर में सादर आमंत्रित करती है, जो हरियाली से आच्छादित शांत वातावरण में स्थित समर्थगुरु धाम, मुरथल (सोनीपत), दिल्ली एनसीआर के निकट आयोजित किया जाता है।
🌷*आप अपने परिवार और मित्रों के साथ प्रत्येक माह के द्वितीय एवं चतुर्थ रविवार को प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक इस ध्यान शिविर में सम्मिलित हो सकते हैं*।
🌷*प्रति व्यक्ति सहयोग राशि मात्र ₹100 है, जिसमें नाश्ता, दोपहर का भोजन एवं सायंकालीन चाय सम्मिलित है*।
🌷 कम समय के लिए आने वाले मित्रों को केवल इन दो निर्धारित रविवारों को ही प्रवेश की अनुमति है। अन्य दिनों में केवल 3-दिवसीय कार्यक्रम के प्रतिभागियों को ही अनुमति दी जाती है।
*अगली तारीख 8 मार्च, 2026*
🌷पूर्व बुकिंग करने से हम आपको बेहतर आतिथ्य प्रदान कर सकेंगे।
📞9671400193/96
06/03/2026
36
मंदिर की भीड़ बताती है
कामना ग्रस्त हैं लोग सभी
बिरला कोई है भक्त यहाँ
प्रभु भीतर बाहर यहीं अभी
है जहाँ भीड़ कामना वहाँ
है जहाँ कुटी साधना वहाँ
अथ सद्गुरु शरणं गच्छामि
गोविन्दं शरणं गच्छामि
20/01/2026
आपा पिघला कर झील बना,
तब सहसकमलदल खिल जाता;
ईड़ा पिंगला का पानी सब,
सुषुमन में आकर भर जाता।
अमृत का झरना बहता है,
बड़भागी योगी पीता है।
अथ अमृत शरणं गच्छामि,
भज गोरख शरणं गच्छामि।।
-Samarthguru Ji 🏵
16/01/2026
https://youtu.be/MQ4NsVJ7UIQ?si=8wzxl2PScPqcamgL
Osho on Love & Ego: Is Your Relationship a Bo***ge? Ft SamarthGuruDhara
Is your quest for spiritual awakening stuck in the modern rat race? In this deep-dive exploration, we break down the most controversial and profound teaching...
08/01/2026
*घर जाना पड़ेगा हमें एक दिन ,*
लौट आना पड़ेगा हमें एक दिन ,
*कांटे बोते हैं जो दूसरों के लिए ,*
दुख उठाना पड़ेगा हमें एक दिन ,
*सर कलम कर रहे बेगुनाहों का जो ,*
सर कटाना पड़ेगा हमें एक दिन ,
*देखते हैं जो अन्याय चुपचाप जो ,*
पछताना पड़ेगा हमें एक दिन ,
*जैसा कर वैसा भर कर्म का है नियम ,*
ऋण चुकाना पड़ेगा हमें एक दिन ,
*'कामिल मुर्शिद' से नाता जोड़ा नहीं ,*
सब गंवाना पड़ेगा हमें एक दिन ....!!
समर्थगुरु सिद्धार्थ औलियाजी
*गुलशन-ए- मुर्शिद* 🩵