28/04/2026
विद्यालय परिवार में नये सदस्य का आगमन.
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28/04/2026
विद्यालय परिवार में नये सदस्य का आगमन.
आज दिनांक 28 अप्रैल, मंगलवार से विद्यालय का समय सुबह 7.00 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा।
भीषण गर्मी को देखते हुये नर्सरी क्लास से 12th क्लास तक ये ही समय रहेगा.
Earth day 22 April celebration at school class 6th students made Globe,charts and delivered speeches..
Happy Earth Day 🌍🌿💐
Project Teacher :- Alok Verma
RAS में चयनित टीवीएम स्कूल के पूर्व विधार्थी सियाराम का आज विद्यालय परिसर में स्वागत किया गया. सियाराम अभावों के रहकर यहाँ तक पहुँचा है.
मात्र एक वर्ष की उम्र में इसके पिताजी का निधन हो गया. इनकी माँ ने मेहनत, मजदूरी करके तीनों भाईयों को पढ़ाया. आज तीनों भाई अधिकारी हैं और उन सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो अभावों का रोना रोते हैं.
विद्यालय परिवार को सियाराम पर गर्व है. खूब तरक्की करो बेटा.आगे बढ़ो और अपने जैसे लोगों की मदद करो.
18/04/2026
टीवीएम के पूर्व विधार्थी सियाराम मीणा का RAS में चयन विद्यालय परिवार के लिए गर्व का पल है. सियाराम गूदड़ी का लाल है. बचपन में पिता को खोने के बाद, कठोर संघर्ष करके यहाँ तक पहुँचना एक बड़ी उपलब्धि है.
काफ़ी सालों से इस पल का इंतजार था. ये तो अभी शुरुआत है. तुम्हे अभी काफ़ी आगे जाना है बेटा. आपको और आपके परिवार सहित सम्पूर्ण ग्राम वासियों को हार्दिक बधाई.
16/04/2026
अलवर पत्रिका.
14/04/2026
संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर जयंती पर शत -शत नमन, वंदन 🙏🙏.
Admission Open: 2026-27
TVM & TPS Academy, Thanagazi
English/Hindi Medium Co-Educational School PG to 12th Both Science & Arts Faculty
Experience excellence in education at TVM & TPS Academy. We are now accepting applications for the upcoming academic session 2026-27, offering a nurturing environment designed to empower the leaders of tomorrow.
11/04/2026
भारत में स्त्री शिक्षा के जनक, सामाजिक, शैक्षणिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा फुले की जयंती की पर शत - शत नमन,वंदन 🙏🙏🙏.
जीवन परिचय
महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले (११ अप्रैल १८२७ - २८ नवम्बर १८९०) एक भारतीय समाजसुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें महात्मा फुले एवं ''जोतिबा फुले के नाम से भी जाना जाता है। सितम्बर १८७३ में इन्होने महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया। महिलाओं व पिछडे और अछूतो के उत्थान के लिये इन्होंने अनेक कार्य किए। समाज के सभी वर्गो को शिक्षा प्रदान करने के ये प्रबल समथर्क थे। वे भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन और भेदभाव के विरुद्ध थे.
नीतिशास्त्र, धर्म, मानवतावाद
इनका मूल उद्देश्य स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार प्रदान करना, बाल विवाह का विरोध, विधवा विवाह का समर्थन करना रहा है। फुले समाज की कुप्रथा, अंधश्रद्धा की जाल से समाज को मुक्त करना चाहते थे। अपना सम्पूर्ण जीवन उन्होंने स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने में, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में व्यतीत किया.१९ वी सदी में स्त्रियों को शिक्षा नहीं दी जाती थी। फुले महिलाओं को स्त्री-पुरुष भेदभाव से बचाना चाहते थे।उन्होंने कन्याओं के लिए भारत देश की पहली पाठशाला पुणे में बनाई थीं। स्त्रियों की तत्कालीन दयनीय स्थिति से फुले बहुत व्याकुल और दुखी होते थे इसीलिए उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि वे समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाकर ही रहेंगे। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले को स्वयं शिक्षा प्रदान की।
एक वर्ष की अवस्था में ही इनकी माता का निधन हो गया। इनका लालन-पालन एक बाई ने किया। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले सतारा से पुणे आकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। इसलिए माली के काम में लगे ये लोग 'फुले' के नाम से जाने जाते थे। ज्योतिबा ने कुछ समय पहले तक मराठी में अध्ययन किया, बीच में पढाई छूट गई और बाद में 21 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढाई पूरी की। इनका विवाह 1840 में सावित्री बाई से हुआ, जो बाद में स्वयं एक प्रसिद्ध समाजसेवी बनीं। दलित व स्त्रीशिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्नी ने मिलकर काम किया .वह एक कर्मठ और समाजसेवी की भावना रखने वाले व्यक्ति थे।[6]
कार्यक्षेत्र
उन्होंने विधवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए बहुत काम किया, इसके साथ ही किसानों की हालत सुधारने और उनके कल्याण के लिए भी काफी प्रयास किये। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए फुले ने 1848 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री फुले को इस योग्य बना दिया। कुछ लोगों ने आरम्भ से ही उनके काम में बाधा डालने की चेष्टा की, किंतु जब फुले आगे बढ़ते ही गए तो उनके पिता पर दबाब डालकर पति-पत्नी को घर से निकालवा दिया.इससे कुछ समय के लिए उनका काम रुका अवश्य, पर शीघ्र ही उन्होंने एक के बाद एक बालिकाओं के तीन स्कूल खोल दिए।
विद्यालय की स्थापना
ज्योतिबा को संत-महात्मा की जीवनियाँ पढ़ने में बड़ी रुचि थी। उन्हें ज्ञान हुआ कि जब भगवान के सामने सब नर-नारी समान हैं तो उनमें ऊँच-नीच का भेद क्यों होना चाहिए?
निर्धन तथा निर्बल वर्ग को न्याय दिलाने के लिए ज्योतिबा ने 'सत्यशोधक समाज' १८७३ मे स्थापित किया। उनकी समाजसेवा देखकर १८८८ ई. में मुंबई की एक विशाल सभा में उन्हें महात्मा' की उपाधि दी।वे बाल-विवाह विरोधी और विधवा-विवाह के समर्थक थे। अपने जीवन काल में उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं-गुलामगिरी, तृतीय रत्न, छत्रपति शिवाजी, राजा भोसला का पखड़ा, किसान का कोड़ा, अछूतों की कैफियत. महात्मा ज्योतिबा व उनके संगठन के संघर्ष के कारण सरकार ने ‘एग्रीकल्चर एक्ट’ पास किया। धर्म, समाज और परम्पराओं के सत्य को सामने लाने हेतु उन्होंने अनेक पुस्तकें भी लिखी.
ब्रिटिश सरकार द्वारा उपाधि: १८८३ में स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने के महान कार्य के लिए उन्हें तत्कालीन ब्रिटिश भारत सरकार द्वारा "स्त्री शिक्षण के आद्यजनक" कहकर गौरव किया।
16 महाजनपदों को एकता के सूत्र में पिरोने वाले महान मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की जयंती आज विद्यालय में मनाई गई.
05/04/2026
गुरुशिखर
मध्य भारत की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर है, जिसकी ऊँचाई लगभग 1,722 मीटर (5,650 फीट) है और यह राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित अरावली पर्वतमाला का हिस्सा है.
यह अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी है।