मेरी जिंदगी मेरे शौक

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15/08/2026

Mehdi women's world happy teej

स्कूल 15 अगस्त और बूंदी के लड्डूमैंने सन 2012 में अपना 12th कंप्लीट कर लिया थापांचवी कक्षा तक हमें लड्डू की जगह पारले जी...
14/08/2026

स्कूल 15 अगस्त और बूंदी के लड्डू
मैंने सन 2012 में अपना 12th कंप्लीट कर लिया थापांचवी कक्षा तक हमें लड्डू की जगह पारले जी बिस्कुट मिलता हैहम बहुत खुश होते थे उस पारले-जी बिस्कुट में भी अलग स्वाद था ।उसके बाद 6 से 12 तकहमें बूंदी के लड्डू का प्रसाद15 अगस्त और 26 जनवरी पर मिलता हैएक बच्चे को चार लड्डू मिलते थे।और जब कभी लड्डू कम पड़ जाए तो अगले दिन दोबारा से लड्डू मिलता हैऔर हम बहुत खुश होते पास लंबी दोबारा मिलेंगे लेकिन अगले दिन संख्या कम हो जाती है चार की जगह दो पर आ जाते थे।
15 अगस्त हो या 26 जनवरी हमारे स्कूल में1 महीने पहले से यानी की जुलाई में ही वंदे मातरम सारे जहां से अच्छा की एक्स्ट्रा ट्रेनिंग शुरू हो जाता है कुछ खास मेहमान आते थे जिनके सामने यह पूरे तौर तरीके से लयबद्ध गाया जाता था ।
ध्वजा रोहण से पहले एनसीसी के बच्चे परेड करते हैं और क्या शान से वह बच्चे चलाते थे जैसे कि यही आर्मी के जवान हो उसके बाद ध्वजारोहण फिर रंगारंग कार्यक्रम और फिर हमारे लड्डू ।
मेरी शादी हो गईबच्चा भी स्कूल जाने लग गया उसकी स्कूल में भी लड्डू मिलता हैलेकिन यहां राजस्थान के लड्डू में वह स्वाद नहीं जो हमारे अग्रसेन के लड्डू स्वाद होता है ।
पोस्ट लिखते टाइम में वह स्वाद मुंह में आ रहा है पता नहीं अब हमारे स्कूल में वही लड्डू मिलते हैं या अलग लेकिन जब जब 15 अगस्त और 26 जनवरी आता है सारा देश उत्सव मनाता है और मुझे अपने लड्डू याद आते है । मुझे नहीं पता मेरी तरह किस-किस को वह लड्डू अभी भी याद आता है क्या आपको स्कूल और वह लड्डू याद आते हैं।
आज गूगल से अपने स्कूल का फोटो लिया है ।यूट्यूब पर भी मेरे स्कूल का फंक्शन आता है और मैं अपने सीसी वाली परेड को जरूरदेखती हूंबच्चे आते हैं एनसीसी के परेड करते हैं तिरंगे को सलामी दी जाती है और मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण ।
आजादी की अग्रिम शुभकामानाएँ

14/08/2026

Women's world

कभी कभी आवश्यकतासे अधिक चीज मिल जाती है तो उसका मोल नहीं रहतायह बात बिल्कुल सच हैमेरा बेटाथर्ड स्टैंडर्ड में पढ़ता है । ...
13/08/2026

कभी कभी आवश्यकतासे अधिक चीज मिल जाती है तो उसका मोल नहीं रहतायह बात बिल्कुल सच हैमेरा बेटाथर्ड स्टैंडर्ड में पढ़ता है । जब से उसने एडमिशन लिया हैहमेशा से उसके एडमिशन के टाइम में हम पूरे साल के पेंसिल इरेज़र एक साथ लाते है । रोज-रोज के झंझट से बचने के लिएजब वह छोटा था तुम उसको हफ्ते में दो पेंसिल दो इरेज़र देते थे इस साल वह थर्ड क्लास मेंहमने समझदार हो गया और ओपन नहीं सब कुछ उसके स्टेशन में की जगह रख दियाअब तो मेरी महान आत्मा के लिए दो-दो तीन-तीन पेंसिल लेकर जाती है मैं पेंसिल बॉक्स चेक करूं ऐसा क्यों बोलते हैं अगर क्लास में कोई नहीं उसकी हेल्प कर देता हूं
मैंने बोला वह हरिश्चंद्र की औलाद भाई एक पेंसिल ज्यादा ले जाना तो ठीक है मदद करो लेकिन तीन चार पाँच पूरी क्लास का ठेका नहीं इतना पैसा नहीं है हमारे पास अभी
तो बोलता है बस पेंसिल ही तो है। ये तो रही बच्चे की बात ।

लेकिन अगर हम किसी को प्यार भी ज्यादा करें तो उसको रास नही आता यह सच है अगर पत्नी पति की ज्यादा परवाह करे तो 90% केसेज में उसका पति तुनक मिजाज मिलेगा
और पति ज्यादा प्यार करने वाला हो तो 95% केसेज में पत्नी तुनक मिजाजी मिलेगी । बहु अच्छी हो ससुराल नही ससुराल अच्छा हो तो बहु नही
इसलिएमैंतो बीच में रहती हूं।😉😉😏😏😏
फोटो गुगल बाबा से मांगी हैं।

13/08/2026

हमारा जीवन एक सीधी सरल रेखा नही है । इसमें सुख भी आते हैं तो दुख भी आता है।
हम सुख को तो जल्दी भूल जाते है लेकिन दुःख को पता नही कितने वर्षों तक गले लगाये घूमते हैं। ' जबकि होना इसके उल्टा चाहिए सुख को लम्बा खींचना चाहिए और दुःख को छोटा करना चाहिए
दुःख की उम्र तितली की जैसी होनी चाहिए । हमे दुःख को भूलकर जिंदगी में आगे आने वाले पल को संवारना चाहिए ।
सच में दुनिया मे बहुत दुःख है । अगर हम भगवान से हिसाब लगवाये तो सुख ज्यादा दुःख कम होंगे ।लेकिन जो चीज कम होती है उसकी अहमियत ज्यादा होती है ।इसलिए हमें सुख की कीमत नहीं होती जबकि दुख हमें सालों साल तक नहीं छोड़ पता ।
यहां इस दुनिया में हर कोई दुखी है और हर कोई सुखी हैलेकिन हम लोग सुख को कम और दुख को ज्यादा पहचानते है । अगर भगवान का दिया हमारे पास पूरा शरीर सही है दोनों वक्त की रोटी मिल रही हैघर में सुकून हैं
तो सच मेंहम सबसे सुखी इंसान है और हमे उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए
कभी-कभी देखा है ना रात में किसी को दुख के बारे में सोचते सोचते आधी रात निकल जाती हैऔर हमें पता ही नहीं चलता ।जबकि अगर हम इतना ही अपने सुख के बारे में सोचें कि हमारी जिंदगी कितनी सुखी है तो शायद हमारे थायराइड हार्ट रेट ब्लड शुगर कोलेस्ट्रॉल सभी खुश हो और हम शरीर से भी सुखी रहे
मैं बस नहीं इतना कहना चाहती हूं कि सुख दुख सभी की जिंदगी में हैं। लेकिन हम दुख को जितना छोटा करें उतना ज्यादा अच्छा होगा तभी हम इस जिंदगी में खुश रह पाएंगे और दुख को हम जितना ज्यादा लंबा खींच कर रोते रहेंगे तो शायद हम आने वाले पल में हमारी जिंदगी कितनी भी सुकून हो फिर भी तनाव भरी रहेगी
इसलिए खुश रहे और दूसरों को भी खुश रखें

13/08/2026

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