13/08/2021
आज मुरादाबाद ईदगाह नरसंहार की बरसी है। आज ही के दिन 13 अगस्त 1980 को मुरादाबाद ईदगाह में हज़ारों-हज़ार की तअदाद में मुसलमान ईद की नमाज़ पढ़ने के लिए इकट्ठा हुए थे। तभी साज़िशन मुरादाबाद ईदगाह में उसी वक़्त सुअर छोड़ दिया गया था। जिसके बाद अफ़रा-तफ़री मच गई और फिर सुरक्षा में लगे सुरक्षाबलों से ईदगाह की इंतज़ामिया से तू-तू मैं-मैं हुई। मामूली झड़प हुई। जिसके बाद मुरादाबाद ईदगाह को पीएसी/पुलिस ने पूरी तरह से घेर लिया था और फिर देखते ही देखते मुरादाबाद ईदगाह की ज़मीन मुसलमानों के ख़ून से सुर्ख हो गई। पीएसी ने कई राउंड ईदगाह में नमाज़ के लिए इकट्ठे हुए मुसलमानों पर फ़ायरिंग की जिसमें सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ 400 से ज़्यादा बेगुनाह मुसलमान मारे गए थे। ये कोई हिन्दू-मुस्लिम दंगा नहीं था बल्कि कांग्रेस हुकूमत द्वारा कराया गया मुसलमानों का "सरकारी नरसंहार" था। लेकिन इस सरकारी नरसंहार को कुछ ही घण्टों बाद धार्मिक बना दिया गया था। उस वक़्त मरकज़ में भी कांग्रेस की हुकूमत थी और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी।ईद की नमाज़ अदा करने गए सैकड़ों मुसलमानों की मां, बहन, बीवियां अपने घर सेवइयां बनाकर अपने बाप, भाई, बच्चों का इंतज़ार कर रही थीं। मगर वो वापिस नहीं आ सके थे। सैकड़ों मांओं की कोखें उजड़ गई, हज़ारों बच्चे यतीम हो गए थे, सैकड़ों ख़्वातीन बेवा हो गई थीं। कांग्रेस की तत्कालीन सरकार के इशारों पर वर्दी पहने गुंडों ने मुरादाबाद में खुलेआम मुसलमानों का कत्ल-ए-आम किया था। उस वक़्त 20 हज़ार से ज़्यादा मुसलमान ईदगाह के मैदान में मौजूद थे। 13 अगस्त 1980 को कांग्रेस सरकार की स्टेट मशीनरी ने मुसलमानों के खून से ऐसी काली इबारत लिखी जिसे याद करके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उस वक़्त केंद्र और राज्य दोनो जगह कांग्रेस की सरकार थी। बावजूद इसके मुसलमानों का कांग्रेस के साथ किया वफ़ादारी का सिला मिला था