Raja Ram Prajapati

Raja Ram Prajapati

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01/01/2023

आप को परिवार सहित नव वर्ष 2023 की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं
💐💐💐💐🙏🙏🙏💐💐💐💐
यह नया साल आपके जीवन में सुख समृद्धि और शांति लाए आप सदा मुस्कुराते रहें
🌷🌷🌷🌷💥🪔💥🌷🌷🌷🌷
Happy 😊 New Year 2023
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

19/12/2022

न्यायालय में एक मुकद्दमा आया ,जिसने सभी को झकझोर दिया |अदालतों में प्रॉपर्टी विवाद व अन्य पारिवारिक विवाद के केस आते ही रहते हैं| मगर ये मामला बहुत ही अलग किस्म का था|
एक 70 साल के बूढ़े व्यक्ति ने ,अपने 80 साल के बूढ़े भाई पर मुकद्दमा किया था|
मुकद्दमे का कुछ यूं था कि "मेरा 80 साल का बड़ा भाई ,अब बूढ़ा हो चला है ,इसलिए वह खुद अपना ख्याल भी ठीक से नहीं रख सकता |मगर मेरे मना करने पर भी वह हमारी 110 साल की मां की देखभाल कर रहा है |
मैं अभी ठीक हूं, इसलिए अब मुझे मां की सेवा करने का मौका दिया जाय और मां को मुझे सौंप दिया जाय"।
न्यायाधीश महोदय का दिमाग घूम गया और मुक़दमा भी चर्चा में आ गया| न्यायाधीश महोदय ने दोनों भाइयों को समझाने की कोशिश की कि आप लोग 15-15 दिन रख लो|
मगर कोई टस से मस नहीं हुआ,बड़े भाई का कहना था कि मैं अपने स्वर्ग को खुद से दूर क्यों होने दूँ |अगर मां कह दे कि उसको मेरे पास कोई परेशानी है या मैं उसकी देखभाल ठीक से नहीं करता, तो अवश्य छोटे भाई को दे दो।
छोटा भाई कहता कि पिछले 40 साल से अकेले ये सेवा किये जा रहा है, आखिर मैं अपना कर्तव्य कब पूरा करूँगा।
परेशान न्यायाधीश महोदय ने सभी प्रयास कर लिये ,मगर कोई हल नहीं निकला|
आखिर उन्होंने मां की राय जानने के लिए उसको बुलवाया और पूंछा कि वह किसके साथ रहना चाहती है|
मां कुल 30 किलो की बेहद कमजोर सी औरत थी और बड़ी मुश्किल से व्हील चेयर पर आई थी|उसने दुखी दिल से कहा कि मेरे लिए दोनों संतान बराबर हैं| मैं किसी एक के पक्ष में फैसला सुनाकर ,दूसरे का दिल नहीं दुखा सकती|
आप न्यायाधीश हैं , निर्णय करना आपका काम है |जो आपका निर्णय होगा मैं उसको ही मान लूंगी।
आखिर न्यायाधीश महोदय ने भारी मन से निर्णय दिया कि न्यायालय छोटे भाई की भावनाओं से सहमत है कि बड़ा भाई वाकई बूढ़ा और कमजोर है| ऐसे में मां की सेवा की जिम्मेदारी छोटे भाई को दी जाती है।
फैसला सुनकर बड़ा भाई जोर जोर से रोने लगा कि इस बुढापे ने मेरे स्वर्ग को मुझसे छीन लिया |अदालत में मौजूद न्यायाधीश समेत सभी रोने लगे।
कहने का तात्पर्य यह है कि अगर भाई बहनों में वाद विवाद हो ,तो इस स्तर का हो|
ये क्या बात है कि 'माँ तेरी है' की लड़ाई हो,और पता चले कि माता पिता ओल्ड एज होम में रह रहे हैं |यह पाप है।
हमें इस मुकदमे से ये सबक लेना ही चाहिए कि माता -पिता का दिल दुखाना नही चाहिए।

31/10/2022
30/10/2022

श्रीलंका का एक खिलाड़ी था, उसके

दिमाग में बस एक ही चीज चलती थी….

क्रिकेट.क्रिकेट और बस क्रिकेट…

अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उसे

श्री लंका की टेस्ट टीम में डेब्यू करने

का मौका मिला….
पहली इन्निंग्स…… जीरो पे आउट

दूसरी इन्निंग्स……. जीरो पे आउट



टीम से निकाल दिया गया….

practice…practice….practice….
फर्स्ट क्लास मैचेज में लगातार अच्छा

प्रदर्शन किया और एक 21 महीने बाद

फिर से मौका मिला।
पहली इन्निंग्स…… जीरो पे आउट

दूसरी इन्निंग्स……. 1 रन पे आउट


फिर टीम से बाहर।
.
प्रैक्टिस….प्रैक्टिस….प्रैक्टिस….

फर्स्ट क्लास मैचेज में हजारों रन बना

डाले और 17 महीने बाद एक बार फिर से

मौका मिला….
पहली इन्निंग्स…… जीरो पे आउट

दूसरी इन्निंग्स……. जीरो पे आउट




फिर टीम से निकाल दिया गया….


प्रैक्टिस…
प्रैक्टिस….प्रैक्टिस….प्रैक्टिस…

प्रैक्टिस….प्रैक्टिस…

और तीन साल बाद एक बार फिर उस

खिलाड़ी को मौका दिया
गया…..जिसका नाम था मर्वन
अट्टापट्टू
इस बार अट्टापट्टू नहीं चूका उसने जम

कर खेला और ….श्रीलंका की और से 16

शतक और 6 दोहरे शतक जड़ डाले और

श्रीलंका का one of the most
successful कप्तान बना!
सोचिये जिस इंसान को अपना दूसरा

रन बनाने में 6 साल लग गए अगर वो

इतना बड़ा कारनामा कर सकता है तो

दुनिया का कोई भी आदमी कुछ भी

कर सकता है!
और कुछ कर गुजरने के लिए डंटे रहना

पड़ता है…लगे रहना पड़ता है…मैदान छोड़

देना आसान होता है…मुश्किल होता है

टिके रहना…और जो टिका रहता है वो

आज नहीं तो कल ज़रूर सफल होता है।

इसलिए आपने जो कुछ भी पाने का

निश्चय किया है उसे पाने
की अपनी

जिद मत छोडिये…
🐎🐎
मन से किये छोटे
🌸प्रयास 🌸
हमेशा बड़ा परिणाम देते है।

30/10/2022

आज से कोई 6 साल पुरानी बात है, 2016 की

रेलवे के एक बड़े अधिकारी थे, बहुत बड़े वाले

पेशे से इंजीनियर थे

उनके रिटायरमेंट में सिर्फ दो साल बचे थे

आमतौर पे रिटायरमेंट के नज़दीक जब अंतिम पोस्टिंग का समय आता है तो कर्मचारी से उसकी पसंद पूछ ली जाती है

पसंद की जगह अंतिम पोस्टिंग इसलिये दी जाती है ताकि कर्मचारी अपने अंतिम दो साल में पसंद की जगह घर मकान इत्यादि बनवा ले और रिटायर हो के सेटल हो जाये व आराम से रह सके पर उस अधिकारी ने अपनी अंतिम पोस्टिंग मांग ली ICF चेन्नई में

ICF बोले तो Integral Coach Factory मने रेल के डिब्बे बनाने वाला कारखाना

चेयरमैन रेलवे बोर्ड ने उनसे पूछा कि क्या इरादा है ?

वो इंजीनियर बोला अपने देश की अपनी खुद की सेमी हाई स्पीड ट्रेन बनाने का इरादा है

ये वो दौर था जब देश मे 180Km प्रति घंटा दौड़ने वाले Spanish Talgo कंपनी के रेल डिब्बों का ट्रायल चल रहा था

ट्रायल सफल था पर वो कंपनी 10 डिब्बों के लगभग 250 करोड़ रु मांग रही थी और तकनीक स्थानांतरण का करार भी नही कर रही थी

ऐसे में उस इंजीनियर ने ये संकल्प लिया कि वो अपने ही देश मे स्वदेशी तकनीक से Talgo से बेहतर ट्रेन बना लेगा उसके आधे से भी कम दाम में

चेयरमैन रेलवे बोर्ड ने पूछा Are You Sure, We Can Do It ?
Yes Sir

कितना पैसा चाहिये R&D के लिये ?
सिर्फ 100 करोड़ रु सर

रेलवे ने उनको ICF में पोस्टिंग और 100 करोड़ रु दे दिया

उस अधिकारी ने आनन फानन में रेलवे इंजीनियर्स की एक टीम खड़ी की औऱ सभी काम मे जुट गए

दो साल के अथक परिश्रम से जो नायाब प्रॉडक्ट तैयार हुआ उसे हम ट्रेन 18 बोले तो वन्दे भारत रेक के नाम से जानते हैं

और जानते हैं 16 डब्बे की इस ट्रेन 18 की लागत कितनी आई ?

सिर्फ 97 करोड़ जबकि Talgo सिर्फ 10 डिब्बों के 250 करोड़ माँग रही थी

ट्रेन 18 भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास का सबसे नायाब हीरा है

इसकी विशेषता ये है कि इसे खींचने के लिए किसी इंजन की ज़रूरत नही पड़ती क्योंकि इसका हर डिब्बा खुद ही सेल्फ प्रोपेल्ड है, बोले तो हर डिब्बे में मोटर लगी है

दो साल में तैयार हुए पहले रैक को वन्दे भारत ट्रेन के नाम से वाराणसी नई दिल्ली के बीच चलाया गया

उस होनहार इंजीनियर का नाम था सुधांशु मनी साहब

2018 में ही Retire हो गये

इस देश में ट्रेन 18 जैसी विलक्षण उपलब्धि के लिये उनकी टीम की किसी ने पीठ तक न थपथपाई

पिछले दिनों जब वन्दे भारत भैंस से टकरा गई और उसका अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया तो सब ट्रेन के डिज़ाइन की अनर्गल आलोचना करने लगे तब सुधांशु सर का दर्द छलक आया और उन्होंने एक लेख लिख उसके डिजाइन की खूबियां बताईं...

मनी साहब सेवानिवृत्त होकर आजकल लखनऊ में रहते हैं

30/10/2022

*क्या दिन थे । वाह वाह*

जब हम स्कूल में पढ़ते थे (😳) उस स्कूली दौर में निब पैन का चलन जोरों पर था..!

तब कैमलिन की स्याही प्रायः हर घर में मिल ही जाती थी, कोई कोई टिकिया से स्याही बनाकर भी उपयोग करते थे और बुक स्टाल पर शीशी में स्याही भर कर रखी होती थी 5 पैसा दो और ड्रापर से खुद ही डाल लो ये भी सिस्टम था ...जिन्होंने भी पैन में स्याही डाली होगी वो ड्रॉपर के महत्व से भली भांति परिचित होंगे !

कुछ लोग ड्रापर का उपयोग कान में तेल डालने में भी करते थे...😜

महीने में दो-तीन बार निब पैन को खोलकर उसे गरम पानी में डालकर उसकी सर्विसिंग भी की जाती थी और लगभग सभी को लगता था की निब को उल्टा कर के लिखने से हैंडराइटिंग बड़ी सुन्दर बनती है।

सामने के जेब मे पेन टांगते थे और कभी कभी स्याही लीक होकर सामने शर्ट नीली कर देती थी जिसे हम लोग सामान्य भाषा मे पेन का पोंक देना कहते थे...पोंकना अर्थात लूज मोशन...😧

हर क्लास में एक ऐसा एक्सपर्ट होता था जो पैन ठीक से नहीं चलने पर ब्लेड लेकर निब के बीच वाले हिस्से में बारिकी से कचरा निकालने का दावा कर लेता था !!

नीचे के हड्डा को घिस कर परफेक्ट करना भी एक आर्ट था !

हाथ से निब नहीं निकलती थी तो दांतों के उपयोग से भी निब निकालते थे...दांत , जीभ औऱ होंठ भी नीला होकर भगवान महादेव की तरह हलाहल पिये सा दिखाई पड़ता था 😜

दुकान में नयी निब खरीदने से पहले उसे पैन में लगाकर सेट करना फिर कागज़ में स्याही की कुछ बूंदे छिड़क कर निब उन गिरी हुयी स्याही की बूंदो पर लगाकर निब की स्याही सोखने की क्षमता नापना ही किसी बड़े साइंटिस्ट वाली फीलिंग दे जाता था..!

निब पैन कभी ना चले तो हम सभी ने हाथ से झटका देने के चक्कर में आजू बाजू वालों पर स्याही जरूर छिड़कायी होगी!

कुछ बच्चे ऐसे भी होते थे जो पढ़ते लिखते तो कुछ नहीं थे लेकिन घर जाने से पहले उंगलियो में स्याही जरूर लगा लेते थे, बल्कि पैंट पर भी छिड़क लेते थे ताकि घरवालों को देख के लगे कि बच्चा स्कूल में बहुत मेहनत करता है!!

भूली हुइ यादें...

29/10/2022

एक औरत को आखिर
क्या चाहिए होता है?

एक बार जरुर पढ़े ये छोटी सी कहानी:

राजा हर्षवर्धन युद्ध में हार गए।
हथकड़ियों में जीते हुए पड़ोसी राजा के सम्मुख पेश किए गए। पड़ोसी देश का राजा अपनी जीत से प्रसन्न था और उसने हर्षवर्धन के सम्मुख एक प्रस्ताव रखा...

यदि तुम एक प्रश्न का जवाब हमें लाकर दे दोगे तो हम तुम्हारा राज्य लौटा देंगे, अन्यथा उम्र कैद के लिए तैयार रहें।

प्रश्न है.. एक स्त्री को सचमुच क्या चाहिए होता है ?

इसके लिए तुम्हारे पास एक महीने का समय है हर्षवर्धन ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया..

वे जगह जगह जाकर विदुषियों, विद्वानों और तमाम घरेलू स्त्रियों से लेकर नृत्यांगनाओं, वेश्याओं, दासियों और रानियों, साध्वी सब से मिले और जानना चाहा कि एक स्त्री को सचमुच क्या चाहिए होता है ? किसी ने सोना, किसी ने चाँदी, किसी ने हीरे जवाहरात, किसी ने प्रेम-प्यार, किसी ने बेटा-पति-पिता और परिवार तो किसी ने राजपाट और संन्यास की बातें कीं, मगर हर्षवर्धन को सन्तोष न हुआ।

महीना बीतने को आया और हर्षवर्धन को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला..

किसी ने सुझाया कि दूर देश में एक जादूगरनी रहती है, उसके पास हर चीज का जवाब होता है शायद उसके पास इस प्रश्न का भी जवाब हो..

हर्षवर्धन अपने मित्र सिद्धराज के साथ जादूगरनी के पास गए और अपना प्रश्न दोहराया।

जादूगरनी ने हर्षवर्धन के मित्र की ओर देखते हुए कहा.. मैं आपको सही उत्तर बताऊंगी परंतु इसके एवज में आपके मित्र को मुझसे शादी करनी होगी ।

जादूगरनी बुढ़िया तो थी ही, बेहद बदसूरत थी, उसके बदबूदार पोपले मुंह से एक सड़ा दाँत झलका जब उसने अपनी कुटिल मुस्कुराहट हर्षवर्धन की ओर फेंकी ।

हर्षवर्धन ने अपने मित्र को परेशानी में नहीं डालने की खातिर मना कर दिया, सिद्धराज ने एक बात नहीं सुनी और अपने मित्र के जीवन की खातिर जादूगरनी से विवाह को तैयार हो गया

तब जादूगरनी ने उत्तर बताया..

"स्त्रियाँ, स्वयं निर्णय लेने में आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं | "

यह उत्तर हर्षवर्धन को कुछ जमा, पड़ोसी राज्य के राजा ने भी इसे स्वीकार कर लिया और उसने हर्षवर्धन को उसका राज्य लौटा दिया

इधर जादूगरनी से सिद्धराज का विवाह हो गया, जादूगरनी ने मधुरात्रि को अपने पति से कहा..

चूंकि तुम्हारा हृदय पवित्र है और अपने मित्र के लिए तुमने कुरबानी दी है अतः मैं चौबीस घंटों में बारह घंटे तो रूपसी के रूप में रहूंगी और बाकी के बारह घंटे अपने सही रूप में, बताओ तुम्हें क्या पसंद है ?

सिद्धराज ने कहा.. प्रिये, यह निर्णय तुम्हें ही करना है, मैंने तुम्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया है, और तुम्हारा हर रूप मुझे पसंद है ।

जादूगरनी यह सुनते ही रूपसी बन गई, उसने कहा.. चूंकि तुमने निर्णय मुझ पर छोड़ दिया है तो मैं अब हमेशा इसी रूप में रहूंगी, दरअसल मेरा असली रूप ही यही है।

बदसूरत बुढ़िया का रूप तो मैंने अपने आसपास से दुनिया के कुटिल लोगों को दूर करने के लिए धरा हुआ था ।

अर्थात, सामाजिक व्यवस्था ने औरत को परतंत्र बना दिया है, पर मानसिक रूप से कोई भी महिला परतंत्र नहीं है।

इसीलिए जो लोग पत्नी को घर की मालकिन बना देते हैं, वे अक्सर सुखी देखे जाते हैं। आप उसे मालकिन भले ही न बनाएं, पर उसकी ज़िन्दगी के एक हिस्से को मुक्त कर दें। उसे उस हिस्से से जुड़े निर्णय स्वयं लेने दें।

29/10/2022

🌳🦚आज की कहानी🦚🌳

💐💐एक ही घर की मानसिकता💐💐

हम दो भाई बचे थे एक ही मकान में रहते हैं, मैं पहली मंजिल पर और भैया निचली मंजिल पर। पता नही हम दोनों भाई कब एक दूसरे से दूर होते गए, एक ही मकान में रहकर भी ज्यादा बातें न करना, विवाद वाली बातों को तूल देना, यही सब चलता था।

भैया ऑफिस के लिए जल्दी निकलते और घर भी जल्दी आते थे, जबकि मैं देर से निकलता और देर से लौटता था, इसलिए मेरी गाड़ी हमेशा उनकी गाड़ी के पीछे खड़ी होती थी।

हर रोज सुबह गाड़ी हटाने के लिए उनका आवाज देना मुझे हमेशा अखरता, मुझे लगता कि मेरी नींद खराब हो रही है। कभी रात के वक्त उनका ये बोलना नागवार गुजरता कि बच्चों को फर्श पर कूदने से मना करो, नींद में खलल पड़ता है।

ऐसे ही गुजरते दिनों के बीच एक बार मैं बालकनी में बैठा था, कि मुझे नीचे से मकान का गेट खुलने की आवाज सुनाई दी, झांककर देखा, तो पाया कि नीचे कॉलोनी के युवाओं की टोली थी जो किसी त्यौहार का चंदा मांगने आई थी।

नीचे भैया से चंदा लेकर वो लोग पहली मंजिल पर आने के लिए सीढ़ियाँ चढ़ने लगे, तो भैया बोले," अरे उपर मत जाओ, उपर नीचे एक ही घर है"।

युवाओं की टोली तो चली गई पर मेरे दिमाग में भैया कि बात गूँजने लगी, "उपर नीचे एक ही घर है"।

मैं शर्मिंदा महसूस करने लगा कि भैया में इतना बड़प्पन हैं, और मैं उनसे बैर रखता हूँ?

बात सौ दो सौ रूपयों के चंदे की नहीं बल्कि सोच की थी, और भैया अच्छी सोच में मुझसे कहीं आगे थे।

अगले दिन से मैने सुबह जल्दी उठकर गाड़ी बाहर करना शुरू कर दिया, बच्चों को हिदायत दी कि रात जल्दी सोया करें ताकि घर के बड़े चैन से सो सकें, क्योंकि "हमारा घर एक है"।

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

24/10/2022

🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
𝑾𝒊𝒔𝒉𝒊𝒏𝒈 𝒚𝒐𝒖 𝒂𝒏𝒅 𝒚𝒐𝒖𝒓 𝒇𝒂𝒎𝒊𝒍𝒚 𝒂 𝒗𝒆𝒓𝒚 𝑯𝒂𝒑𝒑𝒚 𝑫𝒊𝒘𝒂𝒍𝒊 . 𝑶𝒏 𝒕𝒉𝒊𝒔 𝒃𝒆𝒂𝒖𝒕𝒊𝒇𝒖𝒍 𝒇𝒆𝒔𝒕𝒊𝒗𝒆 𝒐𝒄𝒄𝒂𝒔𝒊𝒐𝒏, 𝑰 𝒑𝒓𝒂𝒚 𝒇𝒐𝒓 𝒚𝒐𝒖𝒓 𝒉𝒆𝒂𝒍𝒕𝒉, 𝒉𝒂𝒑𝒑𝒊𝒏𝒆𝒔𝒔, 𝒔𝒖𝒄𝒄𝒆𝒔𝒔,𝒑𝒓𝒐𝒔𝒑𝒆𝒓𝒊𝒕𝒚, 𝒈𝒍𝒐𝒓𝒚 𝒂𝒏𝒅 𝒋𝒐𝒚...
𝑴𝒂𝒚 𝒚𝒐𝒖 𝒂𝒓𝒆 𝒃𝒍𝒆𝒔𝒔𝒆𝒅 𝒘𝒊𝒕𝒉 𝒃𝒆𝒂𝒖𝒕𝒊𝒇𝒖𝒍 𝒎𝒐𝒎𝒆𝒏𝒕𝒔 𝒐𝒇 𝒄𝒆𝒍𝒆𝒃𝒓𝒂𝒕𝒊𝒐𝒏 𝒂𝒏𝒅 𝒍𝒂𝒖𝒈𝒉𝒕𝒆𝒓 𝒘𝒊𝒕𝒉 𝒚𝒐𝒖𝒓 𝒍𝒐𝒗𝒆𝒅 𝒐𝒏𝒆𝒔.
𝑺𝒉𝒖𝒃𝒉 𝑫𝒆𝒆𝒑𝒂𝒘𝒂𝒍𝒊.

𝑩𝒆𝒔𝒕 𝒘𝒊𝒔𝒉𝒆𝒔 𝒇𝒓𝒐𝒎
*Raja Ram Prajapati*
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