24/09/2025
प्रश्न... महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान संघर्ष- विराम -संघर्ष नीति को अपनाया था l समझाइए..
उत्तर... इस विचार पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय स्तर पर जनता को साथ लेकर कोई भी आंदोलन अनवरत नहीं चलाया जा सकता । आंदोलन में सक्रियता के साथ एक समय ,निष्क्रियता का भी आता है । इसी बात को ध्यान में रखते हुए गांधी जी ने स्वतंत्रता आंदोलन की सक्रियता के दौरान नकारात्मक कार्यक्रम जैसे ब्रिटिश नीतियों का बहिष्कार, सरकारी नौकरियां व अंग्रेजी स्कूल, कॉलेज का त्याग, शराब की दुकानों के सामने धरना ,न्यायालय का बहिष्कार, विदेशी कपड़ों की होली जैसे कार्यक्रमों को अंजाम दिया । लेकिन जब आंदोलन में सक्रियता नहीं होती थी अर्थात विराम काल आता था तब गांधीजी रचनात्मक कार्यों के माध्यम से जनता को आंदोलन से जोडे रखते थे जैसे- हिंदू मुस्लिम एकता का प्रयास ,खादी आश्रम की स्थापना ,राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना, महिलाओं व आदिवासियों को कताई -बुनाई का प्रशिक्षण, बाढ़ पीड़ितों की सहायता, कुष्ठ रोगियों की सेवा, छुआछूत का विरोध जैसे कार्यक्रम गांधी जी के द्वारा प्रारंभ असहयोग आंदोलन (1920 -22) सविनय अवज्ञा आंदोलन( 1930 व 1932) भारत छोड़ो आंदोलन( 1942 )में दर्शित होते हैं ।इसे ही गांधी जी की " संघर्ष -विराम -संघर्ष "की नीति कहा जाता है l
02/06/2023
28/04/2022