Dhamma Meera

Dhamma Meera Vipassana Meditation Information And Consult Center. Alwar Rajasthan

19/04/2023

प्रिय FB मित्रों , अतिशीघ्र विपासना मेडिटेशन के अनुभवों को शेयर करने के लिए अलवर में एक केंद्र की स्थापना की जाएगी .

05/01/2022

प्रिय FB मित्रों , नये साल में 05 दिन " विपासना मेडिटेशन " में यात्रा करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ । वास्तव में यह एक अविस्मरणीय सफ़ल सफ़र रहा । शारिरिक , मानसिक रूप से बहुत ही संतोष मिला ।

21/04/2020

बौद्ध दर्शन का एक सूत्र वाक्य : -
" अप्प दीपो भव " - अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनो ।
तथागत सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के कहने का मतलब यह है कि किसी दूसरे से उम्मीद लगाने की बजाये अपना प्रकाश (प्रेरणा) खुद बनो। खुद तो प्रकाशित हों ही , लेकिन दूसरों के लिए भी एक प्रकाश स्तंभ की तरह जगमगाते रहो।
भगवान गौतम बुद्ध ने अपने प्रिय शिष्य आनन्द से उसके यह पूछने पर कि जब सत्य का मार्ग दिखाने के लिए आप या कोई आप जैसा पृथ्वी पर नहीं होगा तब हम कैसे अपने जीवन को दिशा दे सकेंगे ?
तो भगवान बुद्ध ने ये जवाब दिया था – “ अप्प दीपो भव ” अर्थात अपना दीपक स्वयं बनो । कोई भी किसी के पथ के लिए सदैव मार्ग प्रशस्त नहीं कर सकता केवल आत्मज्ञान के प्रकाश से ही हम सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं ।
भगवान बुद्ध ने कहा , तुम मुझे अपनी बैसाखी मत बनाना । तुम अगर लंगड़े हो , और मेरी बैसाखी के सहारे चल लिए - कितनी दूर चलोगे ? मंजिल तक न पहुंच पाओगे । आज मैं साथ हूँ , कल न रहूंगा , फिर तुम्हें अपने ही पैरों पर चलना है । मेरी साथ की रोशनी से मत चलना क्योंकि थोड़ी देर को संग-साथ हो गया है अंधेरे जंगल में , तुम मेरी रोशनी में थोड़ी देर रोशन हो लोगे ; फिर हमारे रास्ते अलग हो जाएंगे । मेरी रोशनी मेरे साथ होगी, तुम्हारा अंधेरा तुम्हारे साथ होगा । अपनी रोशनी पैदा करो । अप्प दीपो भव !!!
जिसने देखा , उसने जाना ।
जिसने जाना , वो पा गया ।
जिसने पाया , वो बदल गया ।
अगर नहीं बदला , तो समझो कि ,
उसके जानने में ही कोई खोट था ।
भवतु सव्वे मंगलं ..।

02/04/2020

बौद्ध कथा
एक बुजुर्ग महिला ( भगवान बुद्ध से ) : - मैं एक कम पढ़ी लिखी , कम समझदार महिला हूँ , मुझे सीधे और सरल भाषा में बताईये कि धर्म क्या है ?
भगवान बुद्ध : - करने योग्य कामों को करना ही धर्म है ।
भवतु सब्बे मंगलं ( खुश रहें , सुखी रहें ) Stay Home , Make Social Distance . 🙏

22/03/2020

प्रिय मित्रों / दोस्तों / साथियों ,
सादर अभिवादन ,
कोरोना वायरस से बचने के लिए एवं इसके फ़ैलाव को रोकने के लिए घरों में रहना ज़रूरी हो गया है । और घरों में भी अधिकांशत एकान्त । TV , Mobile , Study एवं घर के कामों के बाद भी हमारे पास समय होगा ।
1. - क्या करें ?
- तन , मन , दिमाग़ एवं विचारों की शुद्धता ।
2. - कैसे करें ?
- विपश्यना मेडिटेशन । महात्मा / भगवान बुद्ध ने इसी से बुद्धत्व को प्राप्त किया ।
3. - कब करें ?
- जब भी आपके पास समय हो । बस एकांत , शान्त घर का कोई कोना । थोडी सी बैठने की जगह जहाँ आप सहजता से पीठ और गर्दन सीधी करके बैठ सकें । ज़रूरत होने पर पैर फैला सकें ।
4. - क्या है यह विपश्यना मेडिटेशन ?
- कोई मंत्र नहीं , कोई जप नहीं , केवल तप है ।
Step 1st आनापान - साँसों का आना जाना . इसको जानना , लगातार जानना , सज़ग होकर जानना , सम होकर जानना .
5. - क्या होगा इससे ?
- असीम शान्ति , तन , मन , दिमाग़, विचार शुद्ध होंगे ।
कृपया इसकी विस्तृत जानकारी इंटरनेट पर देखें । शुरुआत के लिये आचार्य श्री सत्यनारायण गोयनका का एक वीडियो 10 minute का वीडियो U tube पर है , केवल जानना है , केवल जानना है ।

28/04/2019
30/12/2018

1 Mind / Man मन - जो कुछ भी दिमाग / मन / मस्तिष्क में आ / घट रहा है जैसे विचार , तर्क , any type of emotion , tension , stress , अहंकार , उपलब्धि , ज्ञान , चिंता , इच्छा , तृष्णा , complex , भूत , भविष्य , दुःख , सुख आदि कुछ भी उसे as it is ( न उसमें कुछ जोडें न घटायें , न उससे जुड़े जैसे अच्छा , बुरा , राग n द्वेष etc . ) - Equanimity से देखना And उसे as it is जाने देना ।
2 Body - ऐसे ही जो कुछ भी Body / किसी भी कर्मेन्द्रियों में आ / घट रहा है जैसे दर्द , थकान , संवेदना etc उसे as it is ( न उसमें कुछ जोडें न घटायें , न उससे जुड़े जैसे अच्छा , बुरा , राग n द्वेष etc . ) - Equanimity से देखना And उसे as it is जाने देना।
यहां से Law of Nature शुरू होता है , धर्म जागता है , विपश्यना अपना काम करना शुरू करती है ।
Rule no 1 - जो कुछ भी उत्पन्न हुआ है वो मरेगा , मिटेगा , खत्म होगा । जन्म , मृत्यु ।
Rule no 2 जो कुछ भी मन दिमाग में उत्पन्न होता है वह शरीर में संवेदना , वेदना बनकर प्रकट होता है ।
# जब आप aware हैं तो
- जैसे ही दिमाग , मन में कुछ उत्पन्न , पैदा , Arise हुआ ।
- आपने उसे equanimity से as it is देखा ।
- उसे as it is जाने दिया ।
धर्म जागेगा ,
प्रकृति के नियमानुसार वह संवेदना बनकर शरीर में आयेगा ।
पुनः आप aware हैं : - जैसे ही शरीर में कुछ संवेदना के रूप में उत्पन्न , पैदा , Arise हुआ ।
- आपने उसे equanimity से as it is देखा ।
- उसे as it is जाने दिया ।
मतलब वो चीज हमेशा के लिए चली गयी । इसी प्रकार आपको सब कुछ अपने mind n body से delete करते जाना है ।

25/12/2018

इंसानों और भगवानों को तो बाँट चुके हम ।
जाति ,धर्म और नफ़रत के पैमानों पर ।।
आओ चलो आसमान बांटते हैं ।
मिलकर दोनों जहान बांटते हैं ।
आधा सूरज तेरा , आधा चंदा मेरा ।
आधी शाम तेरी , आधा सवेरा मेरा ।
आधी रात तेरी , आधा दिन मेरा ।
आधी हवाएं तेरी , आधी दिशाएं मेरी ।
सप्तर्षि मंडल तेरा , ध्रुव तारा मेरा ।
मंगल शनि राहु केतु तेरा , रवि शुक्र गुरु मेरा
आधा सावन तेरा , आधा बसंत मेरा ।
आधी सर्दी तेरी , आधी गर्मी मेरी ।
आधी धूप तेरी , आधी छाँव मेरी ।
आधा नफ़ा तेरा , आधा नुकसान मेरा ।
माँ है धरती , पिता आसमान ।
इन्हें बांटना , है बहुत ही आसान ।
आधी माँ तेरी , आधा बापू मेरा ।

26/08/2017

मित्रों , साथियों -
हममें से कोई भगवान / ईश्वर / अल्लाह / रब / गॉड / अन्य ईश्वरीय शक्ति को ढूंढ रहे हैँ या पाना चाहते हैँ ।
सभी धर्मों के धर्म ग्रन्थ / वेद , पुराण / ऋषि , मुनि / धार्मिक गुरू यही कहते हैँ कि वह ईश्वरीय शक्ति हमारे भीतर ही विद्यमान है तो -
- क्यों हम उसे बाहर ढूंढ रहे हैं ?
- क्यों हम इन ढोंगी बाबाओं के चक्कर में आ रहे हैं ?
- क्या ये बाबा उस परम् स्थिति को प्राप्त हैं ?
- ये बाबा लोग जिन रास्तों से ईश्वरीय शक्ति के दर्शन आपको कराना चाहते हैँ उन रास्तों को आप भी जानते हैँ ।
कृपया अपनी मानसिकता बदलिये ।
सांसारिक सुखों / सुविधाओं की चाह , पुत्र मोह , धन की इच्छा , नौकरी , पत्नी , स्वर्ग / अगला जन्म आदि के लिए इनके बहकावे में ना आएं ।

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