20/05/2026
“कल तक जो अपना था…
आज वही शरीर सबकुछ छोड़कर ‘अनजान’ बन गया। 💔
ना अब उसे दौलत की खबर है,
ना रिश्तों की,
ना सुख का एहसास… ना दुख का डर।
जलती चिता पर लेटा वो शरीर
बस एक सवाल छोड़ जाता है —
जिस जिंदगी के पीछे हम भागते रहे…
क्या आखिर में वही सच में हमारी थी? 🥀
ज़िंदगी बहुत छोटी है,
अपनों को वक्त दीजिए…
क्योंकि अंत में सिर्फ यादें रह जाती हैं। 🕯️”