“कल तक जो अपना था…
आज वही शरीर सबकुछ छोड़कर ‘अनजान’ बन गया। 💔
ना अब उसे दौलत की खबर है,
ना रिश्तों की,
ना सुख का एहसास… ना दुख का डर।
जलती चिता पर लेटा वो शरीर
बस एक सवाल छोड़ जाता है —
जिस जिंदगी के पीछे हम भागते रहे…
क्या आखिर में वही सच में हमारी थी? 🥀
ज़िंदगी बहुत छोटी है,
अपनों को वक्त दीजिए…
क्योंकि अंत में सिर्फ यादें रह जाती हैं। 🕯️”
SANEE 007 WALA
DUSRI DUNIYA
तिरे माथ पे ये आँचल बहुत ही खूब है लेकिन तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा
मधुशाला | हरिवंश राय बच्चन | Madhushala By Harivansh Rai Bachchan | Hindi poetry
हर पंक्ति एक ही शब्द पर आकर खत्म होती है वह है मधुशाला।
सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि हाला, प्याला, साकीबला और मधुशाला यही चार रूपक 139 बार प्रयोग किए गए हैं और हर बार एक अनोखे अर्थ लेकर सामने आते हैं ।
हाला - मदिरा, शराब
साकीबाला - मदिरा पान कराने वाली
प्याला - वह पात्र जिसमें मदिरा पिलाई जाए
मधुशाला - मदिरालय, वह स्थान जहां मदिरा मिले
इन्हीं चंद शब्दों से तैयार होती है मधुशाला
आप सभी ने इस मधु को कभी न कभी चखा होगा अगर नहीं तो यह है आपके सामने अब , आनंद लीजिए बताइएगा
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Website
Address
Bhiti
Allahabad
221502