Hindustani Academy U.P. prayagraj

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मान्यवर!हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में फ़िराक़ गोरखपुरी के जन्म-जयंती की पूर्व संध्या पर दिनांक ग...
24/08/2026

मान्यवर!
हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में फ़िराक़ गोरखपुरी के जन्म-जयंती की पूर्व संध्या पर दिनांक गुरूवार, 27 अगस्त 2026 को मुशायरे का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में आप सादर आमंत्रित हैं।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में 19 अगस्त 2026, बुधवार को एकेडेमी स्थित गाँधी सभागार में गोस्वामी तुलसीदास के जन्म-...
19/08/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में 19 अगस्त 2026, बुधवार को एकेडेमी स्थित गाँधी सभागार में गोस्वामी तुलसीदास के जन्म-जयंती के अवसर पर ‘भक्तिकालीन साहित्य में गोस्वामी तुलसीदास का योगदान’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा एवं गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भ में एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शाॅल देकर किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए पायल सिंह ने कहा कि ‘गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के माध्यम से समाज को हर रिश्ते में एक आदर्श व्यक्तित्व को दर्शाया है। चाहें गुरू-शिष्य की परंपरा हो, अनुज-भार्ता का रिश्ता हो, पिता-पुत्र का हो, माता-पुत्र का हो, राजा-प्रजा का हो आदि में समाज को आदर्श व्यक्त्त्वि को प्रदर्शित किया है।’ सगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित, पूर्व विभागाध्यक्ष, हिन्दी, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ ने कहा कि ‘हिन्दी भक्ति काव्य परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास का योगदान अद्वितीय और युगांतरकारी है। उन्होंने कविता का ध्येय लोकमंगल बनाया और राजाश्रय का त्याग कर जनसामान्य को साहित्य के केंद्र में रखा। लोकभाषा में रचना कर तुलसी ने भक्ति और साहित्य को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया। राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप के माध्यम से उन्होंने आदर्श जीवन, परिवार, त्याग और भ्रातृभक्ति के मूल्यों को स्थापित किया। उनकी रचनाओं में सामाजिक समरसता, जातिगत भेदभाव के विरोध तथा नारी और वंचित वर्गों के प्रति सम्मान की भावना दिखाई देती है। तुलसी ने प्रचलित रामकथा को समयानुकूल रूप देकर धर्म, संस्कृति और समाज को जोड़ने का कार्य किया। उनके काव्य में दर्शन, इतिहास, पुराण, समाजशास्त्र और लोकजीवन का व्यापक ज्ञान सहज भाषा में मिलता है। उन्होंने धर्मशास्त्र के गूढ़ तत्वों को जनसामान्य के लिए सरल और लोकप्रिय बनाया। तुलसी केवल भक्त कवि नहीं, बल्कि भारतीय समाज और संस्कृति के महान चिंतक थे। तुलसी जैसा गूढ़ विषयों को सरल और जनप्रिय बनाने वाला कवि विश्व साहित्य में विरल है और भारत के सांस्कृतिक भविष्य को समझने के लिए तुलसी-विचार आज भी प्रासंगिक हैं।’ संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. ऋषि कुमार मिश्र विभागाध्यक्ष हिन्दी, लखनऊ क्रिश्चियन पी.जी. काॅलेज, लखनऊ ने कहा कि ‘हिन्दी साहित्य के स्वर्णिम भक्तिकाल के प्रमुख भक्तिधारा की राम भक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि गोस्वामी तुलसीदास जी का भक्तिकाल में सर्वोच्च श्रेय राम-भक्ति की साधना है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने तत्कालीन समाज में व्याप्त वैषम्य, परस्पर विरोधी विचारधाराओं का तर्कसंगत सामंजस्य अपनी रचनाओं के माध्यम से किया। उनके प्रमुख समन्वय में निर्गुण-सगुण समन्वय, ज्ञान-भक्ति समन्वय, शैव, वैष्णव, शाक्त मतों का समन्वय है। अपने विश्वविख्यात ग्रंथ रामचरितमानस के प्रत्येक सोपान के प्रारंभ में संस्कृत भाषा तत्पश्चात हिन्दी में काव्य रचना की। इन दोनों भारतीय भाषाओं का समन्वय विभिन्न विभाषाओं में अवधी-ब्रज का समन्वय किया। ‘रामचरितमानस’ यदि अवधी की सशक्त कृति है तो ‘विनयपत्रिका’ ब्रज भाषा की।।’ संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता प्रो. बृजेश कुमार पाण्डेय विभागाध्यक्ष - हिन्दी, इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने ‘भक्तिकालीन साहित्य में गोस्वामी तुलसीदास का योगदान’ पर प्रकाश पर डालते हुए कहा ‘तुलसी ने जनता को लोक धर्म की ओर मोड़ा, जिस कारण जनता ने लोक की रक्षा करने वाले प्राकृतिक धर्म का मनोहर रूप देखा। उसने धर्म को दया , नम्रता, उदारता, प्रजापालन, क्षमा आदि ही नहीं देखा बल्कि क्रोध, करुणा, शोक, विनाश, आदि में भी उसे देखा। तुलसीदास सामाजिक दायित्व और मर्यादा को ध्यान में रखकर दास्य भक्ति की। भक्ति का विनीत भाव उत्पन्न करते हैं। प्रसंग आते ही भक्त को भगवान के सगुण रूप से जोड़ देते हैं और भगवान से दास्य भक्ति मांग लेते हैं। इस प्रकार तुलसीदास जिस सूक्ष्मदर्शनी और सारग्राहिणी दृष्टि ने अपने युग के धार्मिक वातावरण से धर्म का वही रूप ग्रहण किया जिसमें लोक रंजन और लोक आरक्षण के तत्व विद्यमान है।’। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अरूण कुमार मिश्रा, सहायक आचार्य, हिन्दी विभाग, मुनीश्वरदत्त महाविद्यालय, प्रतापगढ़ ने किया। कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन एकेडेमी के प्रशासनिक अधिकारी रतन पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्धानों में डाॅ. ओंकार नाथ द्विवेदी, सुनील दानिश, गोपाल जी पाण्डेय, रेखा चैरसिया, एम एस खान, डाॅ. अनिल कुमार सिंह, वजीर खान सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्म जयंती के अवसर पर दिनांक 19 अग...
17/08/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्म जयंती के अवसर पर दिनांक 19 अगस्त 2026 बुधवार को अपराह्न 3:00 बजे गाँधी सभागार हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज में ''भक्तिकालीन साहित्य में गोस्वामी तुलसीदास" का योगदान विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
संगोष्ठी में प्रतिभाग एवं प्रमाण पत्र हेतु नीचे दिए गए लिंक अथवा QR कोड को स्कैन करके अपना पंजीकरण कर सकते हैं।
https://hindustaniacademyup.org.in/panjikaran.php

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जन्म जयंती दिनांक सोमवार, 03 अगस्त 20...
03/08/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जन्म जयंती दिनांक सोमवार, 03 अगस्त 2026 को ‘कवि-दिवस’ के अवसर पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती जी की प्रतिमा तथा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के चित्र पर माल्यापर्ण के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भ में सम्मानित कवियों का स्वागत शॉल, पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिह्न प्रदान कर एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने कहा ‘राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के जन्म-शताब्दी वर्ष के अवसर पर सर्वप्रथम वर्ष 1987 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिवर्ष कवि-दिवस मनाए जाने की शुरूआत हुई। कवि दिवस मनाने की संकल्पना हिंदुस्तानी एकेडेमी के तत्कालीन सचिव एवं प्रसिद्ध कवि डॉ. जगदीश गुप्त की थी। इसी संकल्पना को आधार बनाकर एकेडेमी के तत्कालीन अध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रामकुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह को एक पत्र (18-07-1987) लिखा और कवि-दिवस मनाए जाने की औपचारिक स्वीकृति माँगी। उप्र सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकृति प्राप्त हो गई। तब से यह दिवस उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे हिन्दी जगत में कवि-दिवस के रूप में मनाया जाता है। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि जनकवि प्रकाश (प्रयागराज) तथा संचालन डॉ. पीयूष मिश्र ‘पीयूष’ ने किया। कवि सम्मेलन में डॉ. अमिताभ त्रिपाठी (प्रयागराज), डॉ0 सुरेश अवस्थी (कानपुर), सुनील दानिश (प्रयागराज), शैलेन्द्र (प्रयागराज), जयकृष्ण राय ‘तुषार’ (प्रयागराज), संतोष शुक्ला ‘समर्थ’ (प्रयागराज), शिखा सिंह (आगरा), राधा शुक्ला (प्रयागराज), अमित श्रीवास्तव (लखनऊ), अकांक्षा बुन्देला (वाराणसी) ने काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन में कवियो ने कविता के सभी रसों से सराबोर किया तथा समाज की विसंगतियों पर प्रहार करते हुए कविताएँ सुनायी गयीं। विशेषकर सामाजिक सरोकारों से रुबरु होते हुए रचनाकारों ने रचनाओं में विविध रंग उड़ेले जिनका रसास्वादन करके श्रोता भाव विभोर हो गये।
रचनाकारों की पंक्तियां -
बेटा कहे बाप न श्राब पीजिए
आने वाली पीढ़ी न खराब कीजिए
जनकवि प्रकाश
समय पर साथ सच का दो तो सच उपहार देता है।
अगर झूठों की हो संगत तो वो दुत्कार देता है
डॉ सुरेश अवस्थी, कानपुर
गले में क्रास पहने माथ पर चंदन लगाती है
सियासत भी इलाहबाद में संगम नहाती है
जयकृष्ण राय तुषार
कितने काटे हरे पेड़ हम भूल गए
कुदरत पर इलजाम लगाया जारी है
तस्वीरें दीवार पे टांगी फूलों की
और आंगन में पेड़ गिराना जारी है
सुनील दानिश इलाहाबाद
सुनील दानिश प्रयागराज
बहुत सहज हो जाने के भी अपने खतरे हैं
लोग समझने लगते हैं हम गूँगे-बहरे हैं
बौनों की आबादी में है कद पर पाबंदी
उड़ने लायक सभी परिंदों के पर कतरे हैं
डॉ. अमिताभ त्रिपाठी ’अमित’
जमाने के इशारे पर
हम ना बदलेंगे
कह दो जमाने से
खुद को बदल लो स
ऐ हवा रूख ईधर कर
शैलेन्द्र
सद्भाव से सदैव ही सत्काम कीजिये
इस लोक व उस लोक में भी नाम कीजिये
पीड़ा, प्रकोप, पाप, पीछे छूट जायेंगे
जय बोल मातृ भूमि को प्रणाम कीजिये
शिखा सिंह ‘ऊर्जिता’
कभी जिंदगी से न हार जाइएगा,
खामोश होकर न बैठ जाइएगा।
सफर आखिरी तक ये मसले चलेंगे,
तो हर हाल में आप मुस्कुराइएगा।।
राधा शुक्ला
लोग खिंचते चले आयेंगे,
बांसुरी को अधर दीजिये।
पांव पथ में रुकें न कभी,
हौंसले को ही पर दीजिये।
शिव स्वयं में ही लवलीन हैं,
अब न उनको जहर दीजिये।
डॉ. पीयूष मिश्र ‘पीयूष’
मुरझाए पत्तों में फिर बहार नहीं होती ,
गांव के घरों के बीच कोई दीवार नहीं होती ,
जो मसले सुलझ जाते हैं , महज आँखों की दलीलों से
उनके लिए कचहरियों में फिर तकरार नहीं होती
जिनके सर पे रहता है बुजुर्गों का साया ,
उन्हें फिर किसी छत की दरकार नहीं होती
अमित श्रीवास्तव
धरती के दग्ध हृदय पर जी संगीत कहां अब लिख दूं मैं
प्रलयकारी परिवेश में बोलो गीत कहां अब लिख दूं मैं
हारे हारे मानव सारे तो जीत कहां अब लिख दूं मैं
बिछुड़न की सर्व घटाएँ हैं तो प्रीति कहां अब लिख दूं मैं
आकांक्षा बुन्देला

कार्यक्रम के अंत में एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर धर्मराज पटेल (पूर्व सांसद), अनुग्रह नारायण सिंह (पूर्व विधाय), डॉ. कल्पना वर्मा, रधुनाथ द्विवेदी, अरिंदम धोष, प्रेमचंद प्रजापति, वजीर खान, अखिलेश द्विवेदी, नजर इलाहाबादी, जितेन्द्र मिश्र ‘जलज’, कुमार विकास, अभिजीत मिश्रा, शरद श्रीवास्तव, बिरेन्द्र तिवारी, डॉ. संजय कुमार सिंह, एम. एस. खान सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य आदि उपस्थित रहे।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा प्रकाशित 'हिन्दुस्तानी' त्रैमासिक पत्रिका के अक्टूबर - दिसम्बर 2026 ...
01/08/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा प्रकाशित 'हिन्दुस्तानी' त्रैमासिक पत्रिका के अक्टूबर - दिसम्बर 2026 अंक लेख आमंत्रित है। जिसकी अंतिम तिथि 30 अगस्त 2026 है। नीचे दिए गए प्रारूप में आप लेख प्रेषित कर सकते हैं।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के तत्वावधान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जन्म जयंती 'कवि दिवस' के अवसर प...
01/08/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के तत्वावधान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जन्म जयंती 'कवि दिवस' के अवसर पर दिनांक 3 अगस्त 2026 सोमवार को अपराह्न 3:30 बजे से गांधी सभागार, हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। कवि सम्मेलन में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में 28 जुलाई 2026, मंगलवार, अपराह्न 3ः00 बजे एकेडेमी स्थित गाँधी सभागार में डाॅ उदयनार...
28/07/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में 28 जुलाई 2026, मंगलवार, अपराह्न 3ः00 बजे एकेडेमी स्थित गाँधी सभागार में डाॅ उदयनारायण तिवारी स्मृति व्याख्यानमाला के अन्तर्गत ‘भाषा विज्ञान वर्तमान स्वरूप चुनौतियां और भविष्य’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा एवं डाॅ उदयनारायण तिवारी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भ में एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शाॅल देकर किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए पायल सिंह ने कहा कि डाॅ उदयनारायण तिवारी का भाषा-विज्ञान के क्षेत्र मे विशेष योगदान था उनकी स्मृति में हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को ‘डाॅ उदयनारायण तिवारी स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन करती है इसी क्रम में आज व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया है। हिन्दुस्तानी एकेडेमी का हमेशा से यह प्रयास रहता है कि साहित्य के प्रत्येक क्षेत्र के विद्वानों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व को आम जनमानस तक पहुँचाया जाय। सगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. रामकिशोर शर्मा, पूर्व आचार्य, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने कहा कि भाषा विज्ञान अनेक अन्य अनुशासनों की तुलना में नवीन है इसे एक स्वतंत्र विषय की संज्ञा 19वीं शताब्दी में मिली पहले भाषा संबंधी जो कार्य किए जाते थे उन्हें व्याकरण कहते थे यह तभी भारत में अति प्राचीन काल से शिक्षा, कल्प, निरुक्ती, निघंटु विज्ञान, व्युत्पत्ति शास्त्र, कोश विज्ञान, की नई पड़ गई थी। पणिनी ने संस्कृत भाषा का इस प्रकार सूत्रबद्ध व्याकरण अष्टााध्यायी के नाम से प्रस्तुत किया था इसकी वैज्ञानिकता से जब पाश्चात्य विद्वान अवगत हुए तो उनके प्रयास से आधुनिक भाषा विज्ञान का श्रीगणेश हुआ। भाषा विज्ञान के अध्ययन का मूल विषय भाषा व्याख्या व्यवहार का क्षेत्र जैसे-जैसे व्यापक और बहुआयामी होता गया वैसे-वैसे भाषा विज्ञान के सामने नई-नई चुनौतियां आती गई। फलस्वरुप भाषा विज्ञान के अध्ययन की अनेक पद्धतियां तथा अनेक शाखाएं विकसित हो गई ऐतिहासिक तुलनात्मक, वर्णनात्मक आदि पद्धतियां तथा वेदों के समय के साथ भाषा के अंगों के आधार पर ध्वनि विज्ञान ध्वनि प्रक्रिया विज्ञान तथा वाक्य, विज्ञान, रूप विज्ञान, अर्थ विज्ञान, कोश विज्ञान, समाजभाषिकी, मनोभाषिकी, व्यतिरेकी भाषा विज्ञान, व्याप्त हो गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास से संगणक भाषा विज्ञान का नया क्षेत्र विकसित हुआ है। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. हरिश्रांकर मिश्र ने कहा कि ‘वर्तमान तकनीक और प्रौद्योगिकी के युग में भाषा विज्ञान की महत्ता कई दृष्टियों से सामने आती है। आज भाषा विज्ञान अपने परंपरागत रूप से बहुत आगे बढ़ चुका है। अब यह केवल भाषा के अध्ययन तक ही सीमित नहीं है अपितु भाषा को माध्यम बनाकर समाज और व्यक्ति की मनोवृत्ति और गतिविधि को समझने और दिशा देने में सहायक है। मनोचिकित्सा में भी इसकी महती भूमिका है। युवा पीढ़ी को इसके अध्ययन में विशेष रुचि लेनी चाहिए। इसमें तकनीक की सहायता से बढ सकते हैं। यद्यपि भाषा विज्ञान के समक्ष अनेक चुनौतियां भी हैं किंतु अध्ययन-अनुशीलन ,परिश्रम और विवेक से उन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। भाषा विज्ञान भविष्य में विशेष रूप से उपयोगी और महत्वपूर्ण होगा।’ संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता डाॅ. रविनंदन सिंह, सम्पादक ‘सरस्वती’ पत्रिका ने ‘भाषा विज्ञान वर्तमान स्वरूप चुनौतियां और भविष्य’ पर प्रकाश पर डालते हुए कहा ‘प्राचीन काल में भाषा ईश्वरीय देन थी, किंतु आज भाषा को एक सामाजिक उत्पाद माना जाता है। भाषा मनुष्य की सबसे बड़ी सांस्कृतिक उपलब्धि है। यह केवल विचारों के आदान-प्रदान का साधन नहीं, बल्कि मानव की सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना की आधारशिला है। मानव समाज की समस्त ज्ञान-परंपरा भाषा के माध्यम से ही सुरक्षित रहती है। इसलिए भाषा का अध्ययन वस्तुतः मानव जीवन, समाज और संस्कृति के अध्ययन का ही पर्याय है। इसी व्यापक दृष्टि से भाषाविज्ञान आधुनिक युग में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं बहुआयामी अनुशासन के रूप में स्थापित हुआ है।’। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अनूप कुमार ने किया। कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन एकेडेमी के प्रशासनिक अधिकारी रतन पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्धानों में रामनरेश तिवारी ‘पिण्डीवासा’, डाॅ. बीरेन्द्र कुमार तिवारी, सुनील दानिश, प्रवीण माधव, डाॅ. अनिल कुमार सिंह, डाॅ. पारूल सिंह, शरद श्रीवास्तव, एम. एस. खान सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

28/07/2026

डॉ उदय नारायण तिवारी स्मृति व्याख्यानमाला

28/07/2026

हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ.प्र., प्रयागराज के तत्वावधान डॉ उदय नारायण तिवारी स्मृति व्याख्यानमाला के अंतर्गत दिनांक 28 जुलाई 2026, मंगलवार, अपराह्न 3:00 बजे 'भाषा विज्ञान: वर्तमान स्वरूप चुनौतियां और भविष्य' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया

मान्यवर,हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ.प्र., प्रयागराज के तत्वावधान डॉ उदय नारायण तिवारी स्मृति व्याख्यानमाला के अंतर्गत दिनांक ...
25/07/2026

मान्यवर,
हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ.प्र., प्रयागराज के तत्वावधान डॉ उदय नारायण तिवारी स्मृति व्याख्यानमाला के अंतर्गत दिनांक 28 जुलाई 2026, मगलवार, अपराह्न 3:00 बजे 'भाषा विज्ञान: वर्तमान स्वरूप चुनौतियां और भविष्य' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में आप सादर आमंत्रित हैं।

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