19/06/2026
⚖️ सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें पूरे देश में वकीलों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाने और उनके पेशेवर आचरण को लेकर सोशल मीडिया कोड लागू करने की मांग उठाई गई है। यह मामला W.P.(C) No. 727/2026, Bar Association of India & Anr. बनाम Union of India & Ors. के तहत सुना गया, जिसकी सुनवाई Supreme Court of India में हुई। इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल रहे।
याचिका में मांग की गई है कि पूरे देश के अधिवक्ताओं का एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस बनाया जाए, जिसे National Digital Registry for the Legal Profession of India (NDRLP) कहा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फर्जी या अप्रमाणित वकीलों की पहचान हो सके और कानूनी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़े। इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि हर वकील के लिए एक यूनिक नेशनल एडवोकेट आइडेंटिफायर और QR-आधारित वेरिफ़ायबल प्रोफाइल सिस्टम लागू किया जाए, जिससे उनकी योग्यता और स्टेटस तुरंत जांचा जा सके।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए सबसे जरूरी है युवा वकीलों को सशक्त बनाना और उन्हें पर्याप्त अवसर तथा प्रशिक्षण देना, ताकि वे मुख्यधारा में आ सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं जिनका कानून या पेशेवर आचरण से कोई संबंध नहीं होता, हालांकि यह भी जरूरी है कि सभी को एक ही दृष्टि से न देखा जाए क्योंकि अधिकतर अधिवक्ता अपने पेशे के प्रति जिम्मेदार होते हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वकीलों के आचरण को लेकर एक स्पष्ट गाइडलाइन होनी चाहिए, क्योंकि जब कोई अधिवक्ता सार्वजनिक रूप से बोलता है तो उसकी बात को लोग अधिक गंभीरता से लेते हैं। वहीं Bar Council of India की भूमिका को भी इस पूरे मुद्दे में महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यही संस्था देश में वकालत के पेशेवर मानकों और नैतिकता को नियंत्रित करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि पहले एक व्यावहारिक और तकनीकी रूप से मजबूत मॉडल तैयार किया जाए, जिसके बाद आगे की कार्यवाही पर विचार होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर एक नई समिति का गठन भी किया जा सकता है।