IAS Brahmastra by Ashutosh Ranjan Sir

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13/08/2024

बलिया Episode -1
बलिया जिला उत्तर प्रदेश के धूर पूरब में स्थित है। वस्तुतः यह मध्य गंगा के मैदान में स्थित है। बलिया के पूर्वी भाग में घाघरा नदी गंगा नदी में आकर मिलती है।
आखिर हमारे जिले का नाम बलिया क्यों पड़ा, इसको लेकर विवाद है।
एक पौराणिक कथा के अनुसार राजा बली ने यज्ञ किया था, इसलिए इसका नाम बलियाग पड़ गया. कालांतर में यही बलिया के रूप में उच्चारित होने लगा।
एक पौराणिक कथा यह मानती है कि यहाँ का भूगोल इस नाम के लिए जिम्मेदार है। बलिया की अवस्थिति गंगा और घाघरा नदियों की दुआब में है। परिणामतः इसके चतुर्दिक बालू ही बालू है. अतः इसी के आधार पर इसे बलुआ कहा जाता था। बाद में यही बलिया के रूप में उच्चारित होने लगा।

आशुतोष चौबे
लेक्चरर, समाजसेवी, लेखक, IAS कोच
श्री परमहंस मझौली, बलिया।

06/07/2024

जल सम्भरण (Water Harvesting )-
वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के इस दौर में जल संभरण एक चर्चित शब्द है. इस लेख में हम लोग इसी पर चर्चा करेंगे.
वर्षा जल बादलों से पृथ्वी की सतह पर पहुँचता है. वर्षा जल को आकाशीय जल भी कहा जाता है.धरातल पर आने के बाद इस जल की कुछ मात्रा पृथ्वी के ऊपरी सतह पर विद्यमान छिद्र एवं दरारों के माध्यम से सतह के नीचे चला जाता है.यह जल अंततः भूमिगत जल का रूप ग्रहण कर लेता है.जो जलराशि जमीन में रिस नहीं पाता है, वह झील, तालाब, पोखरा, नदियों और गड्ढों में एकत्रित हो जाता है. इस जल को सतही जल राशि कहतें हैं. यह जल अंततः नदियों के माध्यम से महासागरो तक पहुंच जाता है. उल्लेखनीय है कि यह जल मानवीय दृष्टिकोण से बेकार हो जाता है.
सार तत्व यह है की जो जल भूमिगत जल के रूप परिणित हो जाता है, वही मानव जाति के काम में आ सकता है.
इस प्रकार मानव जाति का यह प्रयास होना चाहिए कि वर्षा का जल अधिक से अधिक भूमिगत जल का रूप धारण कर लें.
निष्कर्ष के रूप में हम यह सकते हैं कि वे सभी विधियां और तरीके जिसके माध्यम से वर्षा जल रीस कर भूमिगत जल का रूप ले लेता है, उसे हम जल संभरण कहते हैं. इसके निम्न उपाय हैं.
-ग्रामीण क्षेत्रों में जो पुराने गड्ढे हैं उनका जीर्णोद्धार और नये गड्ढे और तालाबों का निर्माण. इसके माध्यम से जल एकत्रित होता है और रीस कर भूमिगत जल का रूप ले लेता है.गाँव के चारों ओर जो तालाब इत्यादि दिखाई देते हैं, हमारे पूर्वजों ने इसी उद्देश्य से इनका निर्माण किया था.
-बृक्षों का रोपण होना चाहिए, क्योंकि ये सतही जल को रोक कर मिट्टी में रीसने के लिए प्रेरित करते हैं. किन्तु यहाँ मुख्य बात यह है कि उन्हीं बृक्षों का चयन होना चाहिए जो किसी क्षेत्र विशेष के पर्यावरण के अनुकूल हो.
-छतों पर वर्षा जल को रोकने के लिए टंकियों का निर्माण. इसी प्रकार हैंडपम्प के जल को किसी गड्ढे में रोकना.
जल सम्भरण का आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से क्या लाभ है, इसे अगले लेख में देखा जायेगा.
जय हिन्द, जय भारत.
आशुतोष चौबे
लेक्चरर, IAS Mentor

11/04/2024

World History के लिए अर्जुन देव की Old NCERT काफ़ी बेहतर book है. साथ ही साथ यह book अंतराष्ट्रीय सम्बन्ध के लिए भी अति महत्वपूर्ण है. वास्तविकता है कि समकालीन इतिहास जाने बिना अंतराष्ट्रीय सम्बन्ध की बेहतर समझ हो ही नहीं सकती है. इस book को पढ़ने के बाद केवल करेंट के दृष्टिकोण से अपडेट करने की आवश्यकता पड़ती है.IAS &PCS mains International Relation के लिए फिर किसी book की आवश्यकता नहीं है.

04/05/2022

New NCERT batches.

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