16/02/2026
हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप - इलाहाबाद चैप्टर की ओर से 14 फ़रवरी और 15 फ़रवरी को दो दिवसीय राजनीतिक अर्थशास्त्र का अध्ययन चक्र चलाया गया। इस बार अध्ययन चक्र में सापेक्ष बेशी मूल्य, निरपेक्ष बेशी मूल्य, साधारण पुनरुत्पादन, विस्तारित पुनरुत्पादन, बेशी मूल्य का बँटवारा, मुनाफ़े की दर में गिरावट की प्रवृति का नियम और आर्थिक संकट पर विस्तार से चर्चा की गयी।
22/01/2026
सर्वहारा वर्ग के महान शिक्षक व्लादिमीर लेनिन के 102वें स्मृति दिवस पर हंड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप- इलाहाबाद चैप्टर की ओर से चलाये जा रहे तीन दिवसीय राजनितिक अर्थशास्त्र के अध्ययन चक्र का कल आख़िरी दिन था। अध्ययन चक्र की शुरुआत सवाल जवाब के सिलसिले से हुई. इसके बाद पूँजी, बेशी मूल्य, सापेक्ष बेशी मूल्य, निरपेक्ष बेशी मूल्य पर बातचीत की गयी। तीन दिन के अध्ययन चक्र में राजनितिक अर्थशास्त्र के सभी पहलुओं को समेट पाना सम्भव नहीं है इसलिए इस अध्ययन चक्र को आगे नियमित रूप से चलाया जायेगा।
तीन दिवसीय विशेष अध्ययन चक्र का समापन मार्क्सवाद और प्रथम समाजवादी क्रान्ति में लेनिन के अवदानों पर चर्चा और क्रान्तिकारी गीत के साथ किया गया।
20/01/2026
सर्वहारा वर्ग के महान शिक्षक और प्रथम समाजवादी क्रान्ति के नायक लेनिन के 102 वें स्मृतिदिवस (21 जनवरी) पर हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप - इलाहाबाद चैप्टर की ओर से राजनीतिक अर्थशास्त्र पर चलाये जा रहे तीन दिवसीय अध्ययन चक्र का आज दूसरा दिन था।
आज दूसरे दिन अध्ययन चक्र की शुरुआत सवाल-जवाब से की गई। इसे बाद श्रम और श्रम शक्ति में अन्तर, श्रम शक्ति का मूल्य, बेशी मूल्य, बेशी मूल्य का स्रोत स्थित पूँजी और परिवर्तनशील पूँजी पर बातचीत की गई।
“…मैंने जो माल तुम्हारे हाथ बेचा है, वह दूसरे मालों की भीड़ से इस बात में भिन्न है कि इसका उपभोग मूल्य का सृजन करता है, और वह मूल्य उसके अपने मूल्य से अधिक होता है। इसीलिए तो तुमने उसे खरीदा है। तुम्हारी दृष्टि में जो पूँजी का विस्तार है, वह मेरी दृष्टि में श्रम शक्ति का अतिरिक्त उपयोग है। मण्डी में तुम और मैं केवल एक ही नियम मानते हैं, और वह है मालों के विनिमय का नियम। और माल के उपभोग पर बेचने वाले का, जो माल को हस्तानांतरित कर चुका है, अधिकार नहीं होता: माल के उपभोग पर उसे खरीदने वाले का अधिकार होता है, जिसने माल को हासिल कर लिया है। इसलिए मेरी दैनिक श्रम-शक्ति के उपभोग पर तुम्हारा अधिकार है, लेकिन उसका जो दाम तुम रोज देते हो वह इसके लिए काफी होना चाहिए कि मैं अपनी श्रम शक्ति का रोजाना कुल उत्पादन कर सकूं और फिर उसे बेच सकूं। बढ़ती हुई आयु, इत्यादि के कारण शक्ति का जो स्वाभाविक ह्रास होता है, उसको छोड़ कर मेरे लिए संभव होना चाहिए कि मैं हर सुबह को पहले जैसे सामान्य बल, स्वास्थ्य तथा ताजी साथ काम कर सकूं। तुम मुझे हर घड़ी “मितव्ययिता” और “परिवर्जन” का उपदेश सुनाते रहते हो। अच्छी बात है! अब मैं भी विवेक और मितव्ययिता से काम लूंगा और अपनी एकमात्र सम्पति - यानी अपनी श्रमशक्ति - के किसी भी प्रकार के मूर्खतापूर्ण अपव्यय का परिवर्जन करूंगा। मैं हर रोज अब केवल उतनी ही श्रम शक्ति खर्च करूंगा, केवल उतनी ही श्रमशक्ति को क्रियाशील बनाऊंगा, जितनी उसकी सामान्य अवधि तथा स्वस्थ विकास के अनुरूप होगी। काम के दिन काम का मनमाना विस्तार करके, मुमकिन है कि तुम एक ही दिन में इतनी श्रम शक्ति का इस्तेमाल कर डालो, जिसे मैं तीन दिन में भी प्राप्त न कर सकूं। श्रम के रूप में तुम्हारा जितना लाभ होगा, श्रम के सारतत्व के रूप में मेरा उतना ही नुकसान हो जाएगा। मेरी श्रम शक्ति का उपयोग करना एक बात है और उसे लूट कर चौपट कर देना बिल्कुल दूसरी बात है। यदि एक औसत मजदूर (उचित मात्रा में काम करते हुए) औसतन 30 वर्ष तक जिंदा रह सकता है, तो मेरी श्रम शक्ति का वह मूल्य जो तुम मुझे रोज देते हो उसके मूल्य का 1/365x30 या 1/10950वां भाग होता है। किंतु यदि तुम मेरी श्रम शक्ति को 30 के बजाय 10 वर्षों में खर्च कर डालते हो तो तुम रोजाना मुझको मेरी श्रमशक्ति के कुल मूल्य के 1/3650 के बजाय उसका 1/10950 यानी उसके दैनिक मूल्य का केवल 1/3 ही देते हो। इस तरह तुम मेरे माल के मूल्य का 2/3 भाग प्रतिदिन लूट लेते हो। तुम मुझे दाम दोगे एक दिन की श्रम शक्ति का लेकिन इस्तेमाल करोगे तीन दिन की श्रम शक्ति का। यह हम लोगों के करार और विनिमय के खिलाफ है। इसलिए मैं मांग करता हूं कि काम का दिन सामान्य लंबाई का हो और इस मांग को मनवाने के लिए मैं तुम्हारे हृदय को द्रवित करना नहीं चाहता क्योंकि रुपए पैसे के मामले में भावनाओं को कोई स्थान नहीं होता मुमकिन है कि तुम एक आदर्श नागरिक हो। संभव है कि तुम पशु-निर्दयता-निवारण समिति के भी सदस्य हो और तुम्हारा साधुपन सारी दुनिया में विख्यात हो। लेकिन मेरे सामने खड़े हुए तुम जिस चीज का प्रतिनिधित्व करते हो उसकी छाती में हृदय का अभाव है। वहां जो कुछ धड़कता सा लगता है वह मेरे दिल की आवाज है। मैं सामान्य दीर्घता के काम के दिन की इसलिए मांग करता हूं कि दूसरे विक्रेता की ही तरह मैं भी अपने माल का पूरा पूरा मूल्य चाहता हूं।
इस तरह हम देखते हैं कि बहुत लोचदार सीमाओं के अलावा मालों के विनिमय का स्वरूप खुद काम के दिन पर, यह बेशी श्रम पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता। पूँजीपति जब काम के दिन को ज्यादा से ज्यादा लंबा खींचना चाहता है, और मुमकिन हो, तो एक दिन को दो दिन बनाने की कोशिश करता है, तब वह खरीदार के रूप में अपने अधिकार का ही प्रयोग करता है। दूसरी तरफ उसके हाथ बेचा जाने वाला माल इस अजीब तरह का है कि उसका खरीददार एक सीमा से अधिक उसका उपयोग नहीं कर सकता, और जब मजदूर काम के दिन को घटाकर एक निश्चित एवं सामान्य अवधि का दिन कर देना चाहता है तब वह भी बेचने वाले के रूप में अपने अधिकार का ही उपयोग करता है। इसलिए असल में यहाँ दो अधिकारों का विरोध सामने आता है, एक अधिकार दूसरे अधिकार से टकराता है और दोनों अधिकार ऐसे हैं जिन पर विनिमय की मुहर लगी हुई है। जब समान अधिकारों की टक्कर होती है तो बल प्रयोग द्वारा ही निर्णय होता है। यही कारण है कि पूँजीवादी उत्पादन के इतिहास में काम का दिन कितना लंबा हो, इस प्रश्न का निर्णय एक संघर्ष के द्वारा होता है, जो संघर्ष सामूहिक पूँजी अर्थात् पूँजीपतियों के वर्ग और सामूहिक श्रम अर्थात मजदूर वर्ग के बीच चलता है।”
(पूँजी, खण्ड 1, पृ. 257-59)
19/01/2026
सर्वहारा वर्ग के महान शिक्षक लेनिन के स्मृति दिवस (21 जनवरी) पर हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप - इलाहाबाद चैप्टर की ओर से तीन दिवसीय राजनीतिक अर्थशास्त्र विशेष अध्ययन चक्र चलाया जा रहा है।
आज अध्ययन चक्र के पहले दिन मूल्य के मार्क्सवादी सिद्धान्त पर बातचीत की गई।
"कम्युनिज्म का निर्माण हम केवल उस ज्ञान-राशि, संगठनों तथा संस्थाओं की उस समग्रता के आधार पर, मानवीय शक्तियों तथा साधनों के केवल उन भण्डार का उपयोग करके ही कर सकते हैं जो पुराने समाज से से हमें प्राप्त हुआ है। युवा वर्ग के अध्यापन, संगठन तथा प्रशिक्षण के काम को मूल रूप से नये सांचे में ढाल कर ही हम इस बात को सुनिश्चित बना सकेंगे कि नयी पीढ़ी के प्रयासों के फलस्वरूप एक ऐसे समाज की रचना हो सके जो कि पुराने समाज से भिन्न होगा, अर्थात् जो कम्युनिस्ट समाज होगा।"
- 'युवक संघों के कार्यभार' नामक लेख से
हण्ड्रेड फ्लावर्स माक्सिस्ट स्टडी ग्रुप- इलाहाबाद चैप्टर
07/11/2025
महान अक्टूबर क्रान्ति की 108 वीं वर्षगांठ पर 'हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप, इलाहाबाद चैप्टर' की ओर से आज फ़िल्म शो और बातचीत का आयोजन किया गया।
फ़िल्म शो में ग्रेगोरी अलेक्जेंडरोव द्वारा निर्देशित और जॉन रीड की उपन्यास पर बनी फ़िल्म "दस दिन जब दुनिया हिल उठी" दिखाई गई। फ़िल्म के बाद समाजवाद की स्थापना, उसका विकास, पूंजीवादी पूनर्स्थापना आदि मुद्दों पर विस्तार से
बातचीत किया गया।
बात रखते हुए अविनाश ने कहा कि समाजवाद वर्ग समाज और वर्गविहीन समाज के बीच एक लम्बा संक्रमण काल होता है। इस अवधि में भी समाज में वर्ग, पूंजीवादी उत्पादन सम्बन्ध, शोषण और पूंजीवादी तथा अन्य वर्गीय अधिरचनाएं मौजूद रहती हैं। समाजवादी संक्रमण के दौरान तीन महान अन्तरवैयक्तिक असमानताएं (मानसिक श्रम व शारीरिक श्रम, उद्योग व कृषि और गाँव व शहर के बीच का अन्तर्विरोध) मौजूद रहता है। समाजवादी संक्रमण के इस दीर्घावधि में लम्बे समय तक पुराने शोषक वर्गों, समाजवादी सामाजिक संरचना के भीतर से पैदा हुए नए बुर्जुआ वर्गों और उसकी सहायता के लिए तत्पर साम्राज्यवाद की ओर से पूंजीवादी पुनर्स्थापना की सम्भावना अपरिहार्यतः मौजूद रहती है।
लेनिन ने बार- बार इंगित किया कि समाजवाद के अन्तर्गत जारी वर्ग संघर्ष पहले की तुलना में जटिल और दीर्घकालिक होगा। इस दौरान कई कई हार-जीत, उतार-चढ़ाव के बाद ही अन्तिम विजय का फैसला हो सकता है।
05/08/2025
सर्वहारा वर्ग के महान शिक्षक फ्रेडरिक एंगेल्स के स्मृति दिवस (5 अगस्त) के अवसर पर...
"वह (श्रम) समूचे मानव अस्तित्व की प्रथम मौलिक शर्त है और इस हद तक प्रथम मौलिक शर्त है कि एक अर्थ में हमें यह कहना होगा कि मानव का सृजन भी श्रम ने ही किया है।"
30/05/2025
हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप, इलाहाबाद चैप्टर की ओर से 'भारत में जाति व्यवस्था: उद्गम, गतिकी और उन्मूलन का रास्ता' विषय पर आयोजित तीन दिवसीय विशेष शिविर का अख़बारी कवरेज।
29/05/2025
हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप, इलाहाबाद चैप्टर की ओर से 'भारत में जाति व्यवस्था: उद्गम, गतिकी और उन्मूलन का रास्ता' विषय पर आयोजित तीन दिवसीय विशेष शिविर के दूसरे दिन माध्यकालीन भारत, ब्रिटिश भारत और स्वातंत्र्योत्तर भारत में जाति व्यवस्था के बदलते स्वरूप पर बातचीत की गई और इससे सम्बन्धित अखिल भारतीय जाति विरोधी मंच के यूट्यूब चैनल से कामरेड अभिनव के लेक्चर को सामूहिक रूप से देखा गया।
जाति-वर्ण व्यवस्था वर्ग विभाजन के तौर पर पैदा हुई और बदलते उत्पादन सम्बन्ध के साथ जाति व्यवस्था के चरित्र में भी बुनियादी परिवर्तन हुये। बदलते उत्पादन पद्धति के साथ जाति-वर्ण व्यवस्था कमजोर नहीं हुई बल्कि ज़्यादा विचारधारात्मक होती गयी। जाति-वर्ण की ब्राह्मणवादी विचारधारा हर युग के शासक वर्गों को दमन का एक उपकरण मुहैया कराती रही है। इसलिए हर युग का शासक वर्ग थोड़े बहुत हेरफेर के साथ जाति वर्ण व्यवस्था को अपनाता रहा है और यह प्रक्रिया आज तक चली आ रही है।
आज शिविर के आख़िरी दिन जाति उन्मूलन का रास्ता क्या हो सकता है? पर बातचीत की जायेगी।
27/05/2025
हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप, इलाहाबाद चैप्टर की ओर से 'भारत में जाति व्यवस्था: उद्गम, गतिकी और उन्मूलन का रास्ता' विषय पर आयोजित तीन दिवसीय विशेष शिविर का आज पहला दिन था।
कैम्प का संचालन कर रहें अविनाश ने हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप का परिचय देते हुये कार्यक्रम की शुरुआत की। तीन दिनों के शिविर में जाति व्यवस्था के उद्गम, विकास व इसकी गतिशीलता और उन्मूलन के सभी पहलुओं को समेट पाना सम्भव नहीं है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जाति व्यवस्था को मार्क्सवादी नज़रिये से समझने और आगे इस विषय पर गहन अध्ययन के लिये रास्ता खोलना है।
जाति व्यवस्था कोई गतिहीन स्थैतिक परिघटना नहीं है बल्कि बदलते उत्पादन सम्बन्धों के साथ इसमें बदलाव होते रहे हैं। साथ ही साथ जाति व्यवस्था के ख़िलाफ़ संघर्ष का भी एक लम्बा इतिहास रहा है। जाति व्यवस्था के ख़िलाफ़ संघर्ष का पहला ऐतिहासिक प्रमाण 500 ई. पूर्व में मिलता है।
आज पहले दिन प्राचीन भारत में जाति व्यवस्था का उद्गम और इसके विकास पर अखिल भारतीय जाति विरोधी मंच के यूट्यूब चैनल से कामरेड अभिनव के लेक्चर को सामूहिक रूप से देखा गया और इसके विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की गयी।
कैम्प के दूसरे दिन कल मध्यकालीन भारत और आधुनिक भारत में जाति व्यवस्था के बदलते स्वरुप पर बातचीत की जायेगी।
21/05/2025
हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप
इलाहाबाद चैप्टर की ओर से तीन दिवसीय
विशेष शिविर
विषय: भारत में जाति व्यवस्था का उद्गम, गतिकी और उन्मूलन का सवाल
27-29 मई, 2025
सम्पर्क: 9891951393, 9336541026
22/04/2025
सर्वहारा वर्ग के महान नेता लेनिन के जन्मदिवस (22 अप्रैल), इतालवी कम्युनिस्ट क्रान्तिकारी ग्राम्शी के स्मृति दिवस (27 अप्रैल) और सर्वहारा वर्ग के महान शिक्षक कार्ल मार्क्स के जन्मदिवस (05 मई) के अवसर पर हण्ड्रेड फ्लावर्स मार्क्सिस्ट स्टडी ग्रुप- इलाहाबाद चैप्टर की ओर से मार्क्सवादी पख़वाड़ा मनाया जा रहा है। पख़वाड़े के पहले दिन आज लेनिन के जन्मदिवस पर 'मार्क्सवाद क्या है?' विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद, ऐतिहासिक भौतिकवाद, मार्क्सवादी ज्ञान सिद्धान्त पर बातचीत की गयी। पखवाड़े के तहत अध्ययन चक्र, पुस्तक प्रदर्शनी, फ़िल्म शो आदि का आयोजन किया जायेगा।