भारतीय शासन एवं राजनीति

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हमारे साथ भारतीय राजनीति और शासन का अन्वेषण करें। प्रमुख मुद्दों और घटनाओं से अवगत रहें।

13/10/2024

उत्तर भारत की क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियाँ
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उत्तर भारत में राजनीति की एक विविधता भरी तस्वीर देखने को मिलती है। यहाँ विभिन्न राज्यों की राजनीतिक जरूरतों और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्यों के आधार पर कई क्षेत्रीय पार्टियाँ सक्रिय हैं। ये पार्टियाँ राष्ट्रीय पार्टियों के साथ-साथ अपने राज्यों में सत्ता में आती और जाती रहती हैं। आइए, इस ब्लॉग में हम उत्तर भारत की कुछ प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों पर चर्चा करते हैं।

1. आम आदमी पार्टी (AAP)
स्थापना वर्ष: 2012
राज्य: दिल्ली और पंजाब
चुनाव चिन्ह: झाड़ू
यह पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से उभरी और जल्द ही दिल्ली तथा पंजाब में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

2. इंडियन नेशनल लोक दल (INLD)
स्थापना वर्ष: 1999
राज्य: हरियाणा
चुनाव चिन्ह: चश्मा
हरियाणा में इसका बड़ा आधार है, और यह राज्य की पुरानी पार्टियों में से एक है।

3. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP)
स्थापना वर्ष: 2013
राज्य: बिहार
चुनाव चिन्ह: सिले हुए कपड़े का पैकेज
यह पार्टी बिहार में शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देती है।

4. जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC)
स्थापना वर्ष: 1932
राज्य: जम्मू और कश्मीर
चुनाव चिन्ह: हल
जम्मू-कश्मीर की सबसे पुरानी और प्रभावशाली पार्टी, जो राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर दशकों से हावी है।

5. जम्मू और कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी (JKNPP)
स्थापना वर्ष: 1982
राज्य: जम्मू और कश्मीर
चुनाव चिन्ह: साइकिल
यह पार्टी जम्मू और कश्मीर में क्षेत्रीय मुद्दों पर जोर देती है।

6. समाजवादी पार्टी (SP)
स्थापना वर्ष: 1992
राज्य: उत्तर प्रदेश
चुनाव चिन्ह: साइकिल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के उत्थान पर ध्यान केंद्रित करती है।

7.जननायक जनता पार्टी (JJP)
स्थापना वर्ष: 2018
राज्य: हरियाणा
चुनाव चिन्ह: चाबी
हरियाणा की नई राजनीतिक शक्ति, यह पार्टी युवा और किसान समुदायों पर ध्यान केंद्रित करती है।

8. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP)
स्थापना वर्ष: 2000
राज्य: बिहार
चुनाव चिन्ह: बंगला
बिहार में प्रमुख रूप से दलित और पिछड़े वर्गों के हितों की आवाज उठाने वाली पार्टी।

9. राष्ट्रीय लोक दल (RLD)
स्थापना वर्ष: 1998
राज्य: उत्तर प्रदेश
चुनाव चिन्ह: हैंडपंप
उत्तर प्रदेश में किसानों और ग्रामीण जनता के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख पार्टी।

10. जनता दल (यूनाइटेड) [JD(U)]
स्थापना वर्ष: 1999
राज्य: बिहार और अरुणाचल प्रदेश
चुनाव चिन्ह: तीर
बिहार की प्रमुख पार्टी, जो सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के लिए संघर्ष करती रही है।

11. शिरोमणि अकाली दल (SAD)

स्थापना वर्ष: 1920
राज्य: पंजाब
चुनाव चिन्ह: तराजू
पंजाब की एक पुरानी और सशक्त राजनीतिक पार्टी, जो सिख समुदाय के हितों का प्रतिनिधित्व करती है।

12. राष्ट्रवादी जनता दल (RJD)
स्थापना वर्ष: 1997
राज्य: बिहार और झारखंड
चुनाव चिन्ह: लालटेन
बिहार की प्रमुख पार्टी, जो सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के लिए संघर्ष करती रही है।

ये पार्टियाँ अपने-अपने राज्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और राज्य की राजनीति को राष्ट्रीय राजनीति से अलग रखते हुए स्थानीय मुद्दों पर अधिक जोर देती हैं। भारत की राजनीति में इन पार्टियों का योगदान समय के साथ और भी बढ़ता जा रहा है, खासकर जब राज्य के विकास और जनता की आवश्यकताओं की बात होती है।

28/11/2023

दुविधा____?
_______________________________

अपने चिंताओं से व्यथित होकर
मैं रात में टहलने निकला
रात सन्नाटे भरी थी
बस कभी कभी ठण्डी हवा
पूरे बदन को सहला जाती थी
और चंद्रमा जैसे ख़ुद बादलों के बीच
छुपना चाह रहा हो..

रात कभी कभी इश्क़ करती है
और कभी कभी विरह का
आलंबन बनती है
पर जब रात में पूनम का चन्द्रमा
पूरे शबाब पे हो, तो
ये चन्द्रमा कई कवियों के कल्पनाओं का
नायक होता है..

और आज मुझ जैसे
अदने कवि का नायक होना
शायद चन्द्रमा को भी मंजूर नहीं था
आज कवि के सामने दृश्य ही कुछ और था___

मैंने देखा इस सर्द रात में
सो रहें सड़क के किनारे दो बच्चें
जैसे चन्द्रमा मुझसे कह रहा हो आज
की इस चन्द्र रात के नायक
तुम्हारे सामने हैं,थके हैं,निढाल हैं
फिर भी उनकी चमक कवि के
चन्द्र नायक से ज्यादा है

दोनों बच्चें करवट बदलते हुए
ऐसे लग रहे थें जैसे वो दिन भर की
भाग दौड़ के बाद मिले
चन्द सिक्कों की पोटली में
अपने छिपाए हुए ख़्वाबों को
अपने छोटे कदमों ढूंढ रहें हों

मैंने गौर से जब देखा
उन बच्चों के बगल में
उनकी माँ मासूम बच्चों को
अपनी फटी साड़ी उढ़ा रही थी

मैं अपने आप को
जिस साल में लपेटा था
सोचा यही इन्हें उढ़ा दूँ
इनके लिये मेरा भी धर्म बनता है
इस अवसर पे उसे ही निभा लूँ

तभी मुझे अपने व्यवहारिकता
के दायरे का अंदाजा हुआ
की आज तो, ये शाल मैंने
छोटू की पुरानी साईकिल
बेच कर खरीदी है,अब तो
उसकी साईकिल भी नयी है
जाने फिर कब टूटेगी
इस तरह मुझे
अपने वजूद में होकर भी
ना होने का तकाज़ा हुआ

इस सोच में डूबा मैं
उन बच्चों से
ना जाने कब का
दूर हो गया था
पर इतने दूर आकर
एक और दुविधा में फंस गया था,
कि अगर मेरे पास
अपने चिंताओं का समाधान होता
तो क्या मैं इस सर्द रात में
टहलने निकलता?

या फिर इन्हें यूँ देख पाता?
या इनके बारे में कभी सोच पाता..?
या फिर अपने गर्म कमरे में
चद्दर तान के सो जाता।

सही बताइए आप होतें तो क्या करते____

आनन्द त्रिपाठी



















22/11/2023

जेंडर चुनने की आज़ादी में सरकारी मदद___________________

लिंग परिवर्तन सर्जरी की अनुमति मांगने वाली महिला कांस्टेबल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दी
न्यायालय की टिप्पणी______
"कभी-कभी ऐसी समस्या घातक हो सकती है क्योंकि ऐसा व्यक्ति विकार, चिंता, अवसाद, नकारात्मक आत्म-छवि और किसी की यौन शारीरिक रचना के प्रति नापसंदगी से पीड़ित हो सकता है। यदि इस तरह के संकट को कम करने के लिए उपरोक्त मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप विफल हो जाते हैं, तो सर्जिकल हस्तक्षेप करना चाहिए और इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।"

जेंडर चुनने की आज़ादी में सरकारी मदद________
जेंडर पहचान एक व्यक्ति की आंतरिक भावना है कि वह पुरुष, महिला या कोई अन्य लिंग पहचान के रूप में खुद को कैसे देखता है। यह जन्म लिंग से हमेशा मेल नहीं खाता है। लिंग परिवर्तन प्रक्रिया एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शारीरिक रूप से लिंग को बदला जाता है। यह आमतौर पर हार्मोन थेरेपी, लिंग-पुष्टि सर्जरी और अन्य प्रक्रियाओं को शामिल करता है।

भारत में, लिंग परिवर्तन प्रक्रिया अभी भी काफी महंगी है। इसमें लाखों रुपये का खर्च आ सकता है। यह कई लोगों के लिए पहुंच से बाहर है। इस वजह से, कई लोग लिंग परिवर्तन प्रक्रिया नहीं करा पाते हैं।

सरकार लिंग परिवर्तन प्रक्रिया में मदद कर सकती है। यह आर्थिक सहायता प्रदान करके, लिंग परिवर्तन प्रक्रिया को अधिक किफायती बना सकती है। सरकार लिंग परिवर्तन प्रक्रिया के लिए जागरूकता और शिक्षा भी बढ़ा सकती है। इससे लोगों को लिंग परिवर्तन प्रक्रिया के बारे में बेहतर जानकारी मिलेगी और वे इस प्रक्रिया के लिए अधिक तैयार होंगे।

जेंडर परिवर्तन प्रक्रिया में सरकारी मदद के समर्थन में कई विशेषज्ञ हैं। वे मानते हैं कि यह लोगों को अपने लिंग पहचान के अनुरूप जीवन जीने में मदद करेगी। इससे उनकी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।

उदाहरण के लिए, दिल्ली स्थित ट्रांसजेंडर रिसर्च एंड एडवोकेसी सेंटर (ट्रांस-रेस) के निदेशक मधु गुप्ता कहते हैं, "सरकार को लिंग परिवर्तन प्रक्रिया में आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए। इससे लिंग परिवर्तन कराने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी। इससे उनकी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।"

असम स्थित ट्रांसजेंडर एडवोकेसी नेटवर्क के अध्यक्ष विनोद रॉय कहते हैं, "सरकार को लिंग परिवर्तन प्रक्रिया के लिए जागरूकता और शिक्षा बढ़ानी चाहिए। इससे लोगों को लिंग परिवर्तन प्रक्रिया के बारे में बेहतर जानकारी मिलेगी और वे इस प्रक्रिया के लिए अधिक तैयार होंगे।"

सरकार लिंग परिवर्तन प्रक्रिया में मदद कर सकती है। यह लोगों को अपने लिंग पहचान के अनुरूप जीवन जीने में मदद करेगी। इससे उनकी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।
________इस विषय पर आप की क्या राय है?

आनन्द त्रिपाठी




19/11/2023

आज 19 नवंबर है, और यह अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस है। इस दिन को पुरुषों के योगदान और उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। पुरुषों ने दुनिया को कई तरह से आकार दिया है, और उनके योगदान को कभी भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

आइये आप को पुरुष दिवस के अवसर पर इससे जुड़े 5 रोचक तथ्यों से अवगत कराते हैं______
•अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पहली बार 1999 में ऑस्ट्रेलिया में मनाया गया था।
•पुरुष दिवस का उद्देश्य पुरुषों के स्वास्थ्य, कल्याण और अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करना है।
•पुरुष दिवस को मनाने के कई तरीके हैं, जैसे कि पुरुषों के लिए एक विशेष भोजन पकाना, उन्हें उपहार देना, या उनके साथ समय बिताना।
•पुरुष दिवस एक महत्वपूर्ण अवसर है ताकि हम पुरुषों के योगदान और उपलब्धियों को मान्यता दें।
•पुरुष दिवस सभी पुरुषों के लिए एक खुशहाल और समृद्ध भविष्य की कामना करता है।
इस पुरुष दिवस, आइए हम पुरुषों के योगदान और उपलब्धियों को मान्यता दें। हम ऐसा पुरुषों के लिए एक विशेष भोजन पकाकर, उन्हें उपहार देकर, या उनके साथ समय बिताकर कर सकते हैं।
आनन्द त्रिपाठी




12/11/2023

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं______

दीपावली, प्रकाश का त्योहार, खुशियों का त्योहार।
दीपावली के इस पावन अवसर पर मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

दीपावली का पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। यह हमें यह सिखाता है कि हमें हमेशा अपने जीवन में सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए और बुराई से लड़ना चाहिए।

मैं आप सभी से प्रार्थना करता हूं कि आप इस त्योहार को पूरी धूमधाम से मनाएं और अपने जीवन में खुशियां और समृद्धि लेकर आएं।

शुभ दीपावली____
आनन्द त्रिपाठी
अधिवक्ता
उच्च न्यायालय
इलाहाबाद

#दीपावली

12/11/2023

चुनाव और प्रौद्योगिकी_________
चुनावों को लोकतंत्र की आत्मा कहा जाता है। चुनावों के माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है। चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ने चुनावी प्रक्रिया को बदल दिया है। ICT का उपयोग चुनावों की योजना, संचालन और प्रबंधन के लिए किया जा रहा है। ICT का उपयोग चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए भी किया जा रहा है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनावों में ICT का उपयोग करने के लिए कई पहल की हैं। ECI ने मतदाता सूची प्रबंधन प्रणाली, EVMs, मतदान केंद्रों से मतदान की कार्यवाही की वेब कास्टिंग/वीडियो स्ट्रीमिंग, परिणाम/रुझानों का प्रसार आदि के लिए ICT का उपयोग किया है।

ECI ने "डेमोक्रेसी कॉहोर्ट ऑन इलेक्शन इंटीग्रिटी" का नेतृत्व भी किया है। इस कॉहोर्ट के तहत ECI दुनिया भर के अन्य लोकतंत्रों के साथ अपने ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभवों को साझा कर रहा है।

चुनावों में ICT के लाभ_______
चुनावों में ICT के कई लाभ हैं, जिनमें शामिल हैं:

निष्पक्षता और पारदर्शिता में वृद्धि: ICT का उपयोग चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, EVMs का उपयोग मतदान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाता है।

कार्यक्षमता में वृद्धि:______
ICT का उपयोग चुनाव प्रबंधन प्रक्रिया की कार्यक्षमता में वृद्धि करने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, मतदाता सूची प्रबंधन प्रणाली का उपयोग मतदाता सूची को बनाए रखने और अपडेट करने की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाता है।
सुलभता में वृद्धि: ICT का उपयोग चुनावों को अधिक सुलभ बनाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, ऑनलाइन मतदान का उपयोग शारीरिक रूप से अक्षम मतदाताओं के लिए मतदान करना आसान बनाता है।
चुनावों में ICT की चुनौतियां

चुनावों में ICT की कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनमें शामिल हैं:

तकनीकी समस्याएं:_____
ICT की तकनीकी समस्याएं चुनावों में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, EVMs की खराबी मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

सुरक्षा चिंताएं:______
ICT की सुरक्षा चिंताएं चुनावों की निष्पक्षता को खतरे में डाल सकती हैं। उदाहरण के लिए, EVMs को हैक किया जा सकता है।
समानता की चुनौतियां: ICT का उपयोग कुछ मतदाताओं के लिए अन्य मतदाताओं की तुलना में चुनाव में भाग लेना अधिक आसान बना सकता है। उदाहरण के लिए, ऑनलाइन मतदान उन मतदाताओं के लिए अधिक सुलभ हो सकता है जिनके पास इंटरनेट तक पहुंच है।

निष्कर्ष_____
चुनावों में ICT का उपयोग लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, ICT का उपयोग करते समय तकनीकी समस्याओं, सुरक्षा चिंताओं और समानता की चुनौतियों से अवगत रहना महत्वपूर्ण है।

Photos from भारतीय शासन एवं राजनीति's post 21/10/2023

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) 8.45 बजे गगनयान मिशन के टेस्ट व्हीकल को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च करने वाला था किन्तु कुछ मौसम की खराबी और टेक्निकल प्रोब्लम की वजह से लांचिंग को अंततः रोक दिया गया हैं । इसे टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन-1 (TV-D1) नाम दिया गया है। आसान भाषा में कहे तो मिशन के दौरान रॉकेट में गड़बड़ी होने पर अंदर मौजूद एस्ट्रोनॉट को पृथ्वी पर सुरक्षित लाने वाले सिस्टम की टेस्टिंग हो रही है।

10/10/2023

स्वयं को भीड़ से अलग करें________

आधुनिक प्रौद्योगिकी समाज ने एक मिथ्या चेतना का बढ़वा दे कर देकर मानव मात्र को अपने शिकंजे में कस रखा है । मिथ्या चेतना भय और उपभोक्तावाद पर आधारित है। इसके अलावा , प्रौद्योगिक क्रांति ( Technological Revolution ) जीवन की सुख सुविधाएं बहुत बढ़ा दी हैं । आज का समाज ज्यादा से ज्यादा सुखमय जीवन की आशा बँधाता है। ऐसी हालत में कुछ महत्त्वपूर्ण स्तरों पर अलगाव या पराएपन की अनुभूति बहुत हद तक लुप्त हो चुकी है ।

विस्तृत मशीनीकरण के कारण कामगार का काम काफी हल्का हो गया है । अब उसे अपने काम में जी - तोड परिश्रम नहीं करना पड़ता और इतनी कम मजदूरी भी नहीं मिलती कि उसका जीना दूभर हो जाए अतः ऐसा लगता है कि वह एक हद तक 'अलगाव' की स्थिति से मुक्त हो गया है, परंतु साथ ही बँधा बँधाया मशीनी काम करते - करते उसका मन स्वतंत्र और सृजनात्मक कार्य के महत्व को अनुभव करने योग्य नहीं रह गया है ।

आज का कामगार यह स्पष्ट अनुभव नहीं कर पाता कि अपने उत्पादन से उसका नाता टूट चुका है । उसके चारों और बनावटी सुखों का जो जाल फैला है, उसमें उलझकर वह सृजनशीलता के सच्चे आनंद की कामना भी नहीं कर पाता। इस तरह वह अपने अलगाव की स्थिति से बेखबर हो गया है। वह एक मिथ्या चेतना की छाया में श्रम करता है।

यह मिथ्या चेतना धर्म ( Religion ) की नहीं , किसी अतींद्रिय सुख ( Supersensuous Pleasure ) की नहीं, बल्कि वर्तमान भोगवादी सुख ( Hedonistic Pleasure ) की मिथ्या चेतना है।
जो उसके अलगाव पर पर्दा डाल देती है। मनुष्य सोने के पिंजरे में बंद पंछी की तरह उसके आकर्षण में इतना डूब चुका है कि वह मुक्त आकाश में उड़ान भरने के आनंद को भूल गया है।

इस तरह पूंजीवादी समाज की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इसमें मनुष्य न केवल अपनी स्वतंत्रता खो चुका है, बल्कि वह यह भी नहीं जानता कि वह उसे खो चुका है। इस खोई हुई स्वतंत्रता को ढूंढ लाने के लिए सबसे पहले उसे अपने 'अलगाव' के प्रति सचेत रहना होगा ताकि उसे यह अनुभव हो जाए कि उसकी कोई मूल्यवान वस्तु गुम हो गई है और वह उसकी तलाश शुरू कर दे।

आनन्द त्रिपाठी
09/10/2023

16/09/2023

स्वधर्म का महत्व____________

भगवद्गीता में स्वधर्म का बहुत महत्व बताया गया है। गीता के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति का अपना-अपना स्वधर्म होता है। स्वधर्म का अर्थ है कि व्यक्ति को अपने गुणों और क्षमताओं के अनुसार जो कार्य करना चाहिए, वही करना। स्वधर्म का पालन करने से व्यक्ति को शांति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

वर्तमान समय में स्वधर्म का महत्व और भी बढ़ गया है। आज हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं, जिसमें हर व्यक्ति के सामने कई तरह के विकल्प मौजूद हैं। हम किसी भी क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं, किसी भी तरह का जीवन जी सकते हैं। लेकिन, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हमें अपने स्वधर्म का पालन करना चाहिए।

स्वधर्म का पालन करने से हम अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। जब हम अपने गुणों और क्षमताओं के अनुसार कार्य करते हैं, तो हमें उस कार्य में आनंद आता है और हम उसमें सफल होने की अधिक संभावना रखते हैं। इसके अलावा, स्वधर्म का पालन करने से हम समाज में भी अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं।

आजकल कई लोग अपने स्वधर्म का पालन करने से बचते हैं। वे दूसरों के कहने पर दूसरा काम करने लगते हैं। इससे उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट होता है। वे अपने जीवन में कभी भी पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हो पाते हैं।

स्वधर्म का पालन करने के लिए हमें अपने गुणों और क्षमताओं को पहचानना होगा। हमें अपने अंदर की आवाज को सुनना होगा। हमें यह समझना होगा कि हम किस कार्य में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं।

भगवद्गीता के अनुसार है कि प्रत्येक व्यक्ति का अपना-अपना ‘धर्म’ होता है। ‘धर्म’ का अभिप्राय यहां हिन्दू-ईसाई- मुसलमान धर्म से नहीं, अपनी ‘प्रकृति’ से है। मनुष्य की जो प्रकृति है, स्वभाव है, वही उसका धर्म है। ब्राह्मण स्वभाव वाला व्यक्ति अगर व्यापार करने लगेगा तो घाटा ही घाटा उठाएगा, वैश्य स्वभाव वाला व्यक्ति अगर पढ़ाने-लिखाने का काम करेगा तो हर समय वेतन बढ़ाने की बात करेगा। युद्ध करना क्षत्रियों का धर्म है, प्रकृति है, स्वभाव है। दुष्ट की दुष्टता को सहन न करना – यही क्षात्र-धर्म है। इसलिए सांख्य-दृष्टि से विचार करने पर व्यक्ति को ‘स्व-धर्म’ का पालन करना चाहिए। ‘स्व-धर्म’ के क्षेत्र में रहकर कार्य करना ही हमारा कर्त्तव्य है।

स्वधर्म का पालन करना आसान नहीं है। इसके लिए हमें कड़ी मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है। लेकिन, अगर हम स्वधर्म का पालन करते हैं, तो हम अपने जीवन में सफलता और सुख प्राप्त कर सकते हैं।

स्वधर्म के कुछ लाभ

स्वधर्म का पालन करने से व्यक्ति को शांति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
स्वधर्म का पालन करने से व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है।
स्वधर्म का पालन करने से व्यक्ति समाज में अपनी एक अलग पहचान बना सकता है।
स्वधर्म का पालन करने से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ता है।
स्वधर्म का पालन करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक सोच विकसित होती है।

स्वधर्म का पालन कैसे करें?__________

स्वधर्म का पालन करने के लिए हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

अपने गुणों और क्षमताओं को पहचानें।
अपने अंदर की आवाज को सुनें।
जिस कार्य में आप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं, वही करें। कड़ी मेहनत और लगन से काम करें।

सार_______
स्वधर्म का पालन करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। स्वधर्म का पालन करने से हम अपने जीवन में सफलता, सुख और शांति प्राप्त कर सकते हैं।
आनन्द त्रिपाठी

15/08/2023

सभी की स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं स्वीकृत हैं।

07/05/2023

आधुनिक लोकतंत्र एवं अवसर की समानता_____________________

आधुनिक लोकतंत्रीय राज्यों में ‘ अवसर की समानता ' की लंबी चौड़ी बातें की जाती हैं , परंतु फिर भी यह देखने में आता है कि ऊंचे पदों पर कुछ विशेष वर्गों का एकाधिकार बना रहता है । भारत की प्रशासनिक सेवाओं की रचना में पिछले चार - पांच दशकों के दौरान कुछ परिवर्तन अवश्य आया है , फिर भी कुल मिलाकर उनमें एक विशिष्टवर्ग की ही प्रधानता है । इनमें से अधिकांश किन्हीं विशेष परिवारों में जन्मे हैं , किन्हीं विशेष स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ें हैं, एक विशेष प्रकार के सामाजिक ढांचे में पले - बढ़े हैं , और तो और अभी दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतंत्र संयुक्त राज्य अमेरिका की न्याय पालिका ने नामचीन शिक्षातंत्रों में प्रवेश के लिए वर्षों से चले आ रहे घोटालों के ख़िलाफ़ की गयी कार्यवाही, शिक्षा तंत्र के घोटालों को उजागर करती है। ब्यौरे बतातें हैं की धनी अभिभावकों ने प्रसिद्ध शिक्षा संस्थानों में बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए किस तरह पैसे खर्च किये और उन संस्थाओं ने कैसे नियमों की धज्जियां उड़ाई इसलिए ज़ाहिर सी बात है की यह भारत के शिक्षा संस्थाओं में भी व्याप्त है और यहाँ प्रवेश तो छोड़िये शिक्षा संस्थाओं में नौकरियों की भी यही स्थिति है यहाँ गौर करने वाली बात है की यह दशा अन्य विभागों में भी है। कुछ अपवाद छोड़ दिए जाए तो लगभग यही व्यवस्था प्रशासन,न्याय और विधायिका में भी चलन में है।

अत : ऐसे लोगों का जीवन के प्रति एक विशेष दृष्टिकोण है। इन्होंने भारत के आम आदमी के संघर्ष को उस तरह नहीं झेला जिससे वे अपने - आपको उसकी स्थिति में रखकर देख सकें । ये अपनी योग्यता से तो आगे आए हैं , परंतु इन्हें एक छोटे से वर्ग के साथ मुक़ाबला करना पड़ा है । इनसे कहीं सुयोग्य और प्रतिभाशाली व्यक्ति साधनों के अभाव में बीच रास्ते में छूट गए , या भटक गए । फिर उन्हें इनके साथ चलने का अवसर कभी नहीं मिला। अतः आज के वर्तमान चरित्र को बदलने के लिए यह जरूरी है कि आगे बढ़ने का अवसर केवल संपन्न वर्गों का ‘ परमाधिकार ' न रहें । यदि साधारण परिवारों में जन्मे लोग केवल प्रतिभा और परिश्रम के बल ऊंचे पदों पर पहुँचने में समर्थ होंगे तो समाज की रचना भी बदल जाएगी , और उसका दृष्टिकोण भी।

28/04/2023
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