Swami Vivekanand Mission

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यदि भारत को जानना है तो विवेकानन्द को ?

10/04/2026

वीर बनो।वीर कभी पाप नही करते।कायर ही पाप करता है।

13/01/2026

गर्व से कहो हम हिंदू हैं

11/01/2026

जयंती पर कोटि कोटि नमन 💐
#गर्व_से_कहो_हम_हिंदू_हैं।

Photos from Swami Vivekanand Mission's post 12/01/2025
16/11/2024
12/01/2024

प्रथम हिंदू सन्यासी जिन्होंने भारत के बाहर हिंदू धर्म और संस्कृति की पताका फहराकर नए भारत के भावी उदय का सपना गढ़ा और युवाओं को उसके लिए जीना दिखाया।

Photos from Swami Vivekanand Mission's post 04/07/2023

4 जुलाई 1902
स्वामी जी की पुण्य तिथि
शत शत नमन।
मुझे जीवन की दृष्टि देने वाले मेरे गुरु...जो १६वें वर्ष में मिले । मिले अर्थात उनका दर्शन मिला ।
वैसे ही जैसे सिखों के लिए पवित्र गुरु ग्रंथ साहब हैं और आरएसएस के लिए भगवा ध्वज ही गुरु हैं।
ऐसे ही मेरे गुरु स्वामी जी बन गए।मैने बना लिया।मान लिया।
या एकलव्य की तरह कहिए ,स्वामी जी के चित्र ,उनकी पुस्तकें,उनके आडियो और उनके संदेशों को आत्मसात करने का,उन्हे उनकी तकनीक द्वारा साधने का पूरा प्रयास करता रहा हूं।
आज जो कुछ बेहतर है मुझमें वह उन्ही की कृपा है। बाकी मनुष्य तो कमजोरियों और गलतियों का पुतला है।
मैं भी वैसा ही हूं।लेकिन को कुछ भी अच्छा है वह गुरु के कारण है और जो कुछ खराब है वह मेरा है।
आज उनकी १२१ वीं पुण्य तिथि पर मैं उन्हे स्मरण करके धन्य हूं,हमेशा रहूंगा।और भारत को भी उनका पुण्य स्मरण हमेशा कल्याणकारी रहेगा।

Photos from Swami Vivekanand Mission's post 20/06/2023

स्वामीजी प्राच्य भारत और आधुनिक भारत के मध्य एक पक्के सेतु की तरह हैं। जो पूरी प्राचीन हिंदू सभ्यता संस्कृति का आधुनिक भारतीयों को प्रासंगिक,तार्किक और नए भारत की दिशा और बेहतरी की दृष्टि के साथ दिग्दर्शन कराते हैं। उनमें एक सर्वांगपूर्ण समग्रता है।जो अद्वितीय है। उनमें आधुनिक पश्चिमी सभ्यता के साथ प्राच्य हिंदू संस्कृति के आवश्यक मिलन से निर्मित उत्तम फल निष्पादित करने की समझ,दृष्टि और कौशल है।
बिना ऊर्जा व्यर्थ किए,न्यूनतम टकराव और बिना भटकाव वाले उस राजमार्ग को उन्होंने निकाला है जिस पर चलकर नया भारत विश्व गुरु बनेगा।
स्वामी जी भविष्य दृष्टा थे वह अगले हजार वर्ष को देख रहे थे।वह आध्यात्मिक शक्ति पुंज थे इसलिए बहुत सारे अज्ञात तथ्यों के बावजूद प्राचीन भारत के मूल भाव,विशिष्ट दर्शन और सनातन संस्कृति के कालजई होने के खास कारणों को अनुभव से आत्मसात करके उन्होंने संसार में जिस हिंदू धर्म संस्कृति की पताका फहराई और संदेश दिया वह उनके जाने के डेढ़ शताब्दी के बावजूद उतना ही प्रेरक ,मार्गदर्शक और प्रासंगिक है।अगले पांच सौ वर्ष तक वह भारत और संसार को मार्ग दिखायेगा।
बाकी जितने भी उनके पूर्व और उत्तर के हिंदू हृदय सम्राट रहे हैं,कोई भी स्वामी जी के व्यापक,स्पष्ट और कल्याणकारी दर्शन को खारिज करने की भूल नहीं किया।बल्कि गीता की तरह उनकी ही किसी एक व्याख्या को पकड़ा और खुद को संसार में प्रमाणित कर दिया।
इसलिए स्वामी जी को आधुनिक कृष्ण भी कहा गया...जिन्होंने श्री गीता की ही तरह अपने संबोधन में सनातन के सभी मार्गो बल्कि संसार के सभी पंथों की युक्तियुक्त व्याख्या करी और सबको यथोचित सम्मान और समीक्षा भी करी।जिसको जो रुचे पचे उसे ग्रहण करने का रास्ता भी बताया।इसलिए वह नए भारत की दृष्टि से सर्वोपयुक्त थे हैं और बने रहेंगे।

28/05/2023

हर व्यक्ति अज्ञानता से ज्ञान की ओर बढ़ रहा है।
अंधकार से प्रकाश की ओर
स्वार्थ से निस्वार्थ की ओर गतिशील है।

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