23/06/2025
K k institute of English spoken
23/06/2025
जो रोज़ मर के भी ना मरे, वे मज़दूर हैं,
जो घर के हर मौके पर उपस्थित ना हो, वे मज़दूर हैं,
जो अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी परवरिश देने की चाह रखते हैं, वे मज़दूर हैं,
जो चाहकर भी अच्छी परवरिश ना दे पाएं, वे मज़दूर हैं,
जो धूप, पानी, गर्मी से बिना शिकायत मोहब्बत करें, वे मज़दूर हैं,
जिनके पाँव में छाले हों, आँखों से आँसू बहते हों — वे भी मज़दूर हैं।
लेखक – कार्तिकेय पाण्डेय
तू मेरे पास आकर भी दूर है,
हो ना हो, तू कही मजबूर है।
तू थोड़ी हिमाकत तो कर,
तेरे हर फैसले में मेरा जीहजूर है।।
लेखक -कार्तिकेय नूतन
ऊ औरत, से माई हो जाई ।
जब अपने ना खा के तोहके खिआई, ।
ऊ रात भर जाग के तोहके सुताई ,
ऊ औरत, से माई हो जाई ।
तोहके आपने सुख देखाई।
ऊ तोहरे सुख से सुखी हो जाई ,
ऊ औरत, से माई हो जाई ।
नीक जबुन जवने बोल देबअ,
ओकरा त अमृत न बुझाई ,
ऊ औरत, से माई हो जाई ।
तोहके सुखा पर, अपने गीलो में सुत जाई,
ऊ औरत से भाई हो जाई ।
तोहरा शरीर खातिर,आपन शरीर गलाई,
ऊ औरत से माई हो जाई ।
एक समय बाद, तु ओके भुला जईब,
ऊ औरत, में माई हो जाई ।
तु ओकर एहसान का चुकइब
जे औरत, से माई हो जाई।
लेखक -कार्तिकेय पाण्डेय (नूतन)
केहू केतनो गोदी में उठाई,
यार ऊ आपन माई थोड़े हो जाई ।
प्यार केतनो गैर देखाई,
यार ऊ भाई थोड़े हो जाई ।
जे चार जुता मार के भी ,
माई से धीरे से तोहार हाल क पता लगाई।
यार ऊ बाप कसाई थोडे हो जाई।
यार चार पइसा कमाएं खातिर उ तोहरा पर लठाइयो उठाई ,
यार ऊ बाप कसाई थोडे हो जाई।
थक हार के घरे जब आइबा , आकारों बाद, तोहके लाठियों दिखाई।
यार ऊ बाप कसाई थोडे हो जाई।
ऊ जब मर जाई, तब याद बहुत आई ,
यार ऊ बाप कसाई थोडे हो जाई।
लेखक - कार्तिकेय पाण्डेय (नूतन)
जीवन ही तो है ,काट लेंगे |
दुःख ही तो है, बाट लेंगे
ओ मेरे ना हुए तो क्या ,
ज़हर थोड़ी चाट लेंगे ||
लेखक- कार्तिकेय (नूतन)
13/04/2025
कुछ लोग पेड काटकर कटी हुई टहनियों से छाव चाहते हैं ।
अपनो को ही घाव देकर ,अपनो का साथ चाहते हैं।
लेखक कार्तिकेय नूतन
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