Anand Commerce Classes

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13/03/2025

जोगी रै सररररररा होली है हररररररररा
होलिका कै दहन मै अपनी सारी विषमताऔ-क्लैशो की आहुति दै कर
मिल-जुल कर रंग-गुलाल कै साथ ऐक-दुसरै के जीवन-चक्र मै उपलब्धियाँ,स्नैह सै सरोबार करै
होली कै पावन रंग-बिरंगै पर्व की प्रत्यैक कौ ढैरों रंगबिरंगी हार्दिक मंगल शुभ कामनाऐं, होली है भई होली है !!
जोगी रै सररररररा होली है हररररररररा

16/01/2025

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नारायणादविधिर्जातो जातोनारायणाच्छिवः।
जातो नारायणादिन्द्रो नारायण नमोस्तुते।।

"नारायण से उत्पन्न हुआ है, जीवन का स्रष्टा है, इन्द्र भी नारायण से हुए है, उस नारायण को हमारा प्रणाम है।"
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रविर्नारायणं तेजश्चन्द्रो नारायणं महः।
बहिर्नारायणः साक्षन्नारायण नमोस्तु ते।।

"सूरज भी नारायण है, चंद्रमा भी नारायण है, बाहर और अंदर से सभी दिशाओं में नारायण है, उस नारायण को हमारा प्रणाम हैं।"
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🌺🌺🌺🌺।। शुभ प्रभात।।🌺🌺🌺🌺

07/01/2025

न फूल चढे, न दीप जले.
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

मित्रो राष्टिय स्वंय सैवक संघ पर उंगली उठाने वालोें के थुथड पर मारो ये पोस्ट और पिछवाड़े पर जोरदार लात...
स्थान - श्रीनगर ( कश्मीर )
समय - 1965 का युद्ध.
शत्रू तेज गति से आगे बढ रहे थे.कश्मीर को शीघ्र सैन्य मदद चाहिए थी.
दिल्ली के सेना कार्यालय से श्रीनगर को संदेश प्राप्त हुआ कि किसी भी परिस्थिति में श्रीनगर के हवाई अड्डे पर शत्रु का कब्जा नहीं होना चाहिए. शत्रु नगर को जीत ले, तो भी चलेगा, किन्तु हवाई अड्डा बचना चाहिए. हम हवाई जहाज से सेना के दस्ते भेज रहे है.
हवाई अड्डे पर सर्वत्र हिम के ढेर लगे हैं. हवाई जहाज उतारना अत्यंत कठिन है. श्रीनगर सें यह प्रति उत्तर आया.
मजदुर लगाकर तुरन्त हटाइए. चाहे कितनी भी मजदूरी देनी पड़े और इस काम के लिए कितने भी मजदूर लगाने पड़े, व्यवस्था कीजिए.
मजदूर नही मिल रहे हैं....
और ऐसे समय में सेना के प्रमुखों को संघ याद आया.
रात्रि के ग्यारह बजे थे.एक सैन्य जीप संघ-कार्यालय के आगे आकर रुकी.उसमें से एक अधिकारी उतरे.
कार्यालय में प्रमुख स्वंय सेवकों की बैठक चल रही थी. प्रेमनाथ डोगरा व अर्जुन जीं वही बैठे थें.
सेनाधिकारी ने गंभीर स्थिति का संदेश दिया. फिर उसने पूछा - आप हवाई अड्डे पर लगे हिम के ढेर हटानें का कार्य कर सकेंगे क्या.?
अर्जुन जी ने कहा- अवश्य.!कितने व्यक्ति सहायता के लिए चाहिए.
कम से कम डेढ़ सौ, जिससे तीन-चार घंटों में सारी बरफ हट जाये.
अर्जुन जी ने कहा - हम छः सौ स्वयंसेवक देते है.
इतनी रात्रि में आप इतने.?
सैन्य अधिकारी ने आश्चर्य से कहा.
आप हमें ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था कीजिए. ४५ मिनट में हम तैयार है.
संघ कि पद्धति का कमाल था कि तय समय पर सभी 600 स्वयंसेवक कार्यालय पर एकत्र होकर साथ साथ चले गये.
दिल्ली को संदेश भेजा गया - बरफ हटाने का काम प्रारंम्भ हो गया है. हवाई जहाज कभी भी आने दें.
"इतनी जल्दी मजदूर मिल गये क्या.?"
हाँ, पर वे मजदूर नही, सभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हैं.
रात्रि के डे़ढ बजे वे काम पर लग गये. २७ अक्टूबर को प्रातः के समय प्रथम सिख रेजीमेन्ट के ३२९ सैनिक हवाई जहाज से श्रीनगर उतरे और उन्होने बड़े प्रेम से स्वंय सेवको को गले लगाया. फिर क्या था एक के बाद एक ऐसे आठ हवाई जहाज उतरे.
उन सभी में प्रयाप्त मात्रा में शस्त्रास्त्र थे. सभी स्वंयसेवको ने वे सारे शस्त्रास्त्र भी उतार कर ठिकाने पर रख दिये.
हवाई अड्डा शत्रु के कब्जे में जाने से बच गया. जिसका सामरिक लाभ हमें प्राप्त हुआ.
हवाई पट्टी चौड़ी करने का कार्य भी तुरन्त करना था, इसलिए विश्राम किये बिना ही स्वंयसेवक काम में जुट गये.

संदर्भ पुस्तक :
न फूल चढे, न दीप जले.
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

01/01/2025

आज कलयुग के वर्ष 2025 का प्रथम दिवस,
षौष माष ,संवत 2081.मे हम सभी
सर्व विघ्न विनाशक प्रथम पुज्य श्री गणेश भगवन
का पुजन करते हुए,प्रचलित आग्लं कैलैण्डरानुसार
नए आग्लं वर्ष की शुरुआत करे,आप सभी को
नव-वर्ष 2025 की मंगल शुभ कामनाएं!

16/12/2024

भारतीय पुरातत्व निर्णाण तकनीकी
का एक छिपाया हुआ उदाहरण

8 प्रविष्टियों के साथ 1,000 साल पुराना हेलिकल स्टेपवेल वालूर गांव, सेलू तालुका, महाराष्ट्र, भारत के परभणी जिले में स्थित है। इस अद्वितीय "हेलिकल स्टेपवेल" में 8 पक्षों से सर्पिल कदम हैं, जो अच्छी तरह से शाफ्ट और 8 देवकोष्टा (नीचेस) की ओर जाते हैं।

हाल ही में, वालूर गांव के स्थानीय लोगों ने स्टेपवेल को अपने पूर्व गौरव में बहाल करने के लिए विशाल स्वच्छता अभियान चलाया। उन्होंने इस प्राचीन संरचना के जटिल डिजाइन और ऐतिहासिक महत्व का खुलासा करते हुए वर्षों से जमा कचरे और मलबे को हटा दिया। माना जाता है कि 1,000 और 1,500 साल पुराने, यह कदम क्षेत्र की स्थापत्य कुशलता और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक वसीयतनामा के रूप में खड़ा है।

10/12/2024

🌺🌺श्री गुरु चरण सरोज रज निज मनु सुधार 🌺🌺🌺बरनाऊ रघुवर बिमल जसू जो दायकू फल चारि।।🌺
🌺🌺बुद्धि हीन तनु जनिके सुमिरो पवन कुमार 🌺🌺
🌺बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार।🌺
🌺🌺पवनसुत हनुमान जी की जय🌺🌺

Photos from Anand Commerce Classes's post 07/11/2024

ॐ शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम् ।
लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम् ॥
यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे: ।
सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा: ।
ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनो
यस्यातं न विदु: सुरासुरगणा दैवाय तस्मै नम

30/10/2024

आज के दिन को हम नरक चतुर्दशी रूप चौदस काली चौदस अलग अलग नाम से जानते हैं आज के दिन महादेव जिन्हें अपने गले में विश धारण किया था ताकि पूरे ब्रह्मांड को नकारात्मकता से बचाया जा सके ।
इसलिए आज हमें अपने घर परिवार को नकारात्मकता से बचाने के लिए हनुमानजी की उपासना करनी है आज के दिन 11 हनुमान चालीसा और एक बजरंग बाण पाठ अवश्य करना है ।
अपने घर के बाहर 11 दीपक सरसों तेल के जलाएंगे साथ साथ दक्षिण दिशा की तरफ़ चौमुखा दीपक जलाना है जिसको यम दीप दान बोलते हैं और शाम के समय हनुमानजी के सिंदूर से अपने घर के मुख्य द्वार के आस पास दो स्वस्तिक करने हैं इससे आपका घर हर नकारात्मकता से दूर रहेगा और देवों की कृपा प्राप्त होगी!!

आज का नरक चतुर्दशी का समय
1.17 आज से to 3.55 सांयकाल कल तक ,पूजन मुर्हुत समय 7.00 सांय सै 9.00 रात्रि

20/10/2024

सुर्यदेव के प्रकाश सै आपका जीवन प्रकाशित रहे! प्रणाम!

18/10/2024

आखिर कौन है बडा संत ??

पुराने समय में दो संत एक साथ रहते थे। दोनों की भक्ति का तरीका अलग-अलग था। एक संत दिनभर तपस्या और मंत्र जाप करते रहता था। जबकि दूसरा संत रोज सुबह-शाम पहले भगवान को भोग लगाता और फिर खुद भोजन करता था।

एक दिन दोनों के बीच झगड़ा होने लगा कि बड़ा संत कौन है? इस दौरान वहां नारद मुनि पहुंच गए। नारद ने दोनों संतों से पूछा कि किस बात के लिए लड़ाई कर रहे हैं? संतों ने बताया कि हम ये तय नहीं कर पा रहे हैं कि दोनों में बड़ा संत कौन है? नारद ने कहा कि ये तो छोटी सी बात है, इसका फैसला मैं कल कर दूंगा।

अगले दिन नारद मुनि ने मंदिर में दोनों संतों की जगह के पास हीरे की एक-एक अंगूठी रख दी। पहले तप करने वाला संत वहां पहुंचा उसने एक अंगूठी देखी और चुपचाप उसे अपने आसन के नीचे छिपाकर मंत्र जाप करने लगा।

कुछ देर में दूसरा संत भगवान को भोग लगाने पहुंचा। उसने भी हीरे अंगूठी देखी, लेकिन उसने अंगूठी की ओर ध्यान नहीं दिया। भगवान को भोग लगाया और खाना खाने लगा। उसने अंगूठी नहीं उठाई, उसके मन में लालच नहीं जागा, क्योंकि उसे भरोसा था कि भगवान रोज उसके लिए खाने की व्यवस्था जरूर करेंगे।

कुछ देर बाद वहां नारदजी आ गए। दोनों संतों ने पूछा कि अब आप बताएं कि हम दोनों में बड़ा संत कौन है? नारद ने तपस्या करने वाले संत को खड़े होने के लिए कहा, जैसे ही वह संत खड़ा हुआ तो उसके आसन के नीचे छिपी हुई अंगूठी दिख गई।

नारद मुनि ने उससे कहा कि तुम दोनों में भोग लगाकर खाना खाने वाला संत बड़ा है। तपस्या करने वाले संत में चोरी करने की बुरी आदत है, उसने भक्ति के समय में भी चोरी करने से संकोच नहीं किया, जबकि भोग लगाने वाले संत ने अंगूठी की ओर ध्यान तक नहीं दिया। इस कारण वही संत बड़ा है।

🚩 जय श्री राम 🚩

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