17/11/2013
"नानक लीन भयो गोबिंद सो ज्यों पानी सँग पानी"
एक सच्चे सन्त, जिन्होंने विश्व-बंधुत्व के प्रचार के लिया पूरा जीवन यात्राओं में बिताया... एक बेहद संवेदनशील कवि, जिन्होंने फ़ारसी, मुल्तानी, पंजाबी, सिंधी , ब्रजभाषा, खड़ीबोली, संस्कृत और अरबी इत्यादि हर भाषा का अध्ययन किया और हर भाषा का प्रयोग अपनी कविताओं में किया... एक धर्मात्मा, जिन्होंने एकेश्वरवाद को स्थापित किया... एक मनुष्य-वादी, जिसने सन्त-साहित्य में पहली बार नारी वर्ग को सच्चा सम्मान दिया…
एक महान दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि और विश्वबंधु गुरु नानक जी के प्रकाश उत्सव की सभी भारतीयों को बधाइयाँ…!!!