16/01/2023
*अपनी ख़बर कुछ भी नहीं*
शम्अ' है गुल भी है बुलबुल भी है परवाना भी,
रात की रात ये सब कुछ है सहर कुछ भी नहीं ।
सब की है तुम को ख़बर अपनी ख़बर कुछ भी नहीं ।
आज मेरे गुरु और मेंटर प्रसिद्ध आलोचक सत्यप्रकाश मिश्र का जन्मदिन है । सत्यप्रकाश मिश्र यदि आज होते तो 77 के होते | आज उनका 78वाँ जन्मदिन है | सत्यप्रकाश मिश्र के पास समाज और साहित्य को देखने और समझने का एक बेहद मानवीय दृष्टिकोण था जिसमें वे साहित्य की भूमिका को लेकर साफ़ और स्पष्ट थे | वे हमेशा कहते थे कि, "जिस प्रकार हम केवल वोट देकर लोकतंत्र की चिंता दूसरों पर नहीं छोड़ सकते उसी तरह साहित्य केवल 'गलत' पर उँगली मात्र रखकर अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो सकता |" वे अपने एक सम्पादकीय में लिखते हैं कि, ""साहित्य का कार्य अगर केवल 'विरेचन' मात्र हो जाएगा तो उससे कुछ आलोड़न-विलोड़न होने वाला नहीं, वह तो एक तरह से यथास्थिति को बनाये रखने का ढंग भर है |" विचारों से वे लोहियावादी थे | वे नए से नए साहित्य और विचार के गहन अध्येता थे | उनकी समरण-शक्ति बेजोड़ थी | इलाहाबाद में जिन लोगों ने उन्हें उनकी कक्षाओं में, संगोष्ठियों और बहसों में सुना है वे उनकी बेबाक वक्तृता से परिचित हैं | आत्म -विश्वास सजग सधी हुई दृढ़-बुलंद आवाज़ अनायास ही एक अनुशासन कायम कर देती थी | सत्यप्रकाश जी जितना बाहर से कठोर दिखते थे अन्दर से उतने ही नरम-दिल इंसान थे | येन-केन-प्रकारेण आपकी मदद के लिए तैयार, वह भी बिना आपको इसका एहसास कराये | ऐसे लोगों की नस्ल ही अब ख़त्म होती जा रही है | आज हम अपने गुरु (और पापा) की 78वीं वर्षगाँठ मनाते हुए उन्हें शिद्दत से याद कर रहे हैं | स्व.सत्यप्रकाश मिश्र 'भेड़ियाधसान' 'वानर सत्ता' और 'कनकौवा उड़ाने' की प्रवृत्ति को भारतीय समाज के लिए अत्यंत ही घातक मानते थे । रचना और आलोचना को वे इन प्रवृत्तियों के प्रतिरोध के रूप में देखने के समर्थक थे । आज वे नहीं हैं, उनकी याद और अधिक आ रही है । आज वे होते तो देखते कि ये प्रवृत्तियाँ समाज में और अधिक जड़ता के साथ अपनी जड़ें पसार रही हैं । उनकी स्मृति को नमन । सत्यप्रकाश जी की स्मृति में हर साल होने वाली 'सत्यप्रकाश मिश्र स्मृति व्याख्यानमाला' का 16वां व्याख्यान इलाहाबाद में 27 मार्च को होगा । इस बार का व्याख्यान दलित कथाकार और चिंतक शरण कुमार लिंबाले जी देंगे । इस व्याख्यानमाला के अंतर्गत अब तक नामवर सिंह, नित्यानंद तिवारी, मैनेजर पांडेय, हरबंस मुखिया, राधावल्लभ त्रिपाठी, आलोक राय, सुधीर चन्द्र, निर्मला जैन, अशोक वाजपेयी, कृष्ण कुमार, अरुण कमल, राजेन्द्र कुमार, अभय कुमार दुबे, आदित्य निगम, नंदकिशोर आचार्य के व्याख्यान हो चुके हैं । ये सभी व्याख्यान पक्षधर में प्रकाशित हैं और 2020 तक के 13 व्याख्यानों की किताब ‘विचार के वातायन’ नाम से सेतु प्रकाशन से प्रकाशित हो चुकी है ।