अतुल्य भारत Incredible India

अतुल्य भारत  Incredible India

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भारत ..............

भारत .............. 'भा' एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है 'ज्ञान' और 'रत' का अर्थ होता है निरंतर लगा हुआ अर्थात जो ज्ञान मे निरंतर लगा हुआ है वही 'भारत' है |
भारत देश में बहुत ही विभिन्नताएँ हैं , जैसे रंग,रूप,वेश,भाषा,धर्म और ऋीतुएँ फिर भी हम एक हैं | अनेकता में एकता ही हमारी संस्कृति और विरासत है |

13/07/2017
Photos 03/01/2017
02/04/2016

Samne ho manzil to raaste na modna,
Jo bhi mann mein ho wo sapna na todna,
Kadam kadam pe milegi mushkil aapko,
Bas sitare chun-ne ke liye kabhi zameen mat chodna.

Photos 19/12/2015

WDG5 Bheem: यह है वाराणसी के डीजल लोकोमोटिव कारखाने में हमारे काबिल इंजीनियरों द्वारा अपनी संपुर्ण स्वदेशी तकनीक से बनाया हुआ ५५०० हॉर्सपावर का अल्ट्रामॉडर्न रेलवे इंजन भीम । याद रहे की कोई भी इंजन बनाना किसी भी देश के इंजीनियरों के लिये एक चुनौती भरा होता है । यह दिखता जितना जितना आसान है पर उतना ही मुश्किल काम है -- और उसमे भी भीम जैसे शक्तिशाली इंजिन को बनाना और वो भी कम से कम बजट - कम से कम साधन सामग्री मे यह तो नामुमकीन काम ही था। पर हमारे देश के प्रतिभाशाली इंजीनियरों के कठिन परिश्रम और लगन से यह कार्य सम्भव हो पाया।
भीम समग्र एशिया का सबसे शक्तिशाली और सबसे अत्याधुनिक रेलवे इंजन है जिसको खरीदने मे कई देश रुचि दिखा रहे है।
भारतीय इंजिनीयरों के जज्बे को सलाम्।

वन्देमातरम

Photos 09/11/2015

अद्भुत भारत!
भारत के बारे में 15 ऐसे तथ्य जो मजाकिया होने के साथ सच भी है।

1. भारत एक ऐसा देश है जो कई स्थानीय भाषाओ द्वारा विभाजित है और एक विदेशी भाषा द्वारा एकजुट।

2. हम भारतीय अपनी बेटी की पढ़ाई से ज्यादा खर्च बेटी की शादी पे कर देते है।

3.भारत मे लोग ट्रैफिक सिग्नल की रेड लाइट पर भले ही ना रुके लेकिन अगर एक काली बिल्ली रास्ता काट जाए हो हज़ारो लोग लाइन में खड़े हो जाते है। अब तो लगता है ट्रैफिक पुलिस में भी काली बिल्लियों की भर्ती करनी पड़ेगी।

4. भारत का मतदाता वोट देने से पहले उम्मीदवार की जात देखता है ना की उसकी योग्यता। अब इन लोगों को कौन समझाये की भाई तुम देश के लिए नेता ढूंढ रहे हो ना की अपने लिए जीजा।

5. भारत एक ऐसा देश है जहाँ एक्टर्स क्रिकेट खेल रहे है, क्रिकेटर्स राजनीति खेल रहे है, राजनेता पोर्न देख रहे है और पोर्न स्टार्स एक्टर बन रहे है।

6. भारत में आप 'जुगाड़' से करीब-करीब सब कुछ पा सकते है।

7. हम एक ऐसे देश में रहते है जहाँ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने से पहले लगभग कोई भारतीय नहीं जानता था की कैलाश सत्यार्थी कौन है। लेकिन अगर एक रशियन टेनिस खिलाडी हमारे देश के एक क्रिकेटर को नही जानती तो ये हमारे लिए अपमान की बात है।

8. 'भारत चौदह करोड़ मुस्लिमो का घर, और कोई अलक़ायदा नहीं'।- जॉर्ज बुश

9. भारत में किसी अनजान से बात करना खतरनाक है, लेकिन किसी अनजान से शादी करना बिलकुल ठीक।

10. चीन अपनी सरकार की वजह से तरक्की कर रहा है और भारत में तरक्की ना होने का सबसे बड़ा कारण उसकी अपनी सरकारें ही रही हैं।

11. हम एक ऐसे देश में रहते है जहाँ एक पुलिसवाले को देखकर लोग सुरक्षित महसूस करने की वजाए घबरा जाते है।

12. हम भारतीय बहुत शर्मीले है फिर भी 125 करोड़ है।

13. हम भारतीय हेलमेट सुरक्षा के लिहाज़ से कम, चालान के डर से ज्यादा पहनते है।

14. भारत गरीब लोगो का एक अमीर देश है।

15. भारतीय समाज सिखाता है की 'बलात्कार से कैसे बचें' नाकि ये की 'बलात्कार ना करें'।

08/11/2015

प्रगति का पथ
नव जाति का इतिहास स्थानांतरण या प्रवास की घटनाओं से भरा पड़ा है- अफ्रीका से यूरोप तक, मध्य एशिया से भारत (आर्यों का आगमन) तक, बर्फीले अटलांटिक को पार कर उत्तरी अमेरिका से अलास्का और आर्कटिक क्षेत्रों तक तथा इन स्थानों से वापसी भी। इन सभी में मनुष्यों और सामान का आवागमन तो हुआ ही होगा। इसलिए परिवहन के साधन मनुष्य के विकास में सदैव महत्वपूर्ण कारक थे- चाहे वे पैदल हों, बैलगाड़ी हों, घोड़े, गधे, याक, ऊंट हों या आसमान में उड़ते विमान हों, जो आपको कुछ ही घंटों में दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचा देते हैं।
आज जब हम परिवहन की बात करते हैं तो हमारा आशय होता है- राजमार्ग या उन्नत राजमार्ग (सुपर-हाईवे), त्वरित पटरियों पर दौड़ती बुलेट ट्रेन और शहरी जीवन का कायाकल्प करने वाली मेट्रो रेल आदि। लोगों और सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए सड़क परिवहन ही अब तक सबसे प्रमुख साधन बना हुआ है। इसका अर्थ है कि किसी भी देश को एक छोर से दूसरे छोर तक और सुदूर तथा दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने वाली अच्छी और बेहतर रख-रखाव वाली सड़कों की आवश्यकता होती है। हमारे पुरखों की ही तरह यह पीढ़ी भी प्रवासी है, जो आजीविका की तलाश में अपने गृहनगर से बड़े शहरों की ओर चली जाती है। छुट्टी मनाने के लिए घूमने का चलन भी आजकल बढ़ गया है। इसके अलावा दूध और सब्जियां या फ्रिज और वाशिंग मशीन जैसी उपभोक्ता तथा गैर उपभोक्ता सामग्री भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजी जाती हैं। इस प्रकार सड़कें अर्थव्यवस्था के केंद्र सरीखी हो गई हैं। इसलिए भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए अधिक सड़कों की योजना बनाना और निर्माण करना, देश के सुदूरतम भागों को भी जोड़ना सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीतियों के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
‘छुक छुक गाड़ी’ को आशीर्वाद में अशोक कुमार के ‘रेल गाड़ी, रेल गाड़ी’ से लेकर शाहरुख खान के ‘छैयां, छैयां’ तक कई फिल्मी गीतों में रूपक बनाया गया है। बचपन में यात्रा के दौरान मैं ट्रेन की खिड़की से झांकते हुए पटरी मुड़ने का बेसब्री से इंतजार करती थी क्योंकि वहां मुझे पूरी ट्रेन एक साथ दिख जाती थी। लेकिन, रेलगाड़ी केवल सपने नहीं दिखाती है। मालगाडि़यों और रेलगाडि़यों के व्यापक नेटवर्क के साथ रेलवे सचमुच भारत जैसे विशाल देश की जीवन रेखा है। यात्रियों को कश्मीर से कन्याकुमारी तक ले जाने से अलावा कोयले और लोहे को कारखानों तक पहुंचाने तक सब कुछ रेल ही करती है। भारत के पास संभवतः दुनिया का सबसे अच्छा और सबसे व्यापक रेल नेटवर्क है, जिसमें रोजाना 21000 से अधिक ट्रेन चलती हैं। दुख की बात है कि कोई इस बात पर ध्यान नहीं देता। खबर तो दुर्घटना और देर की ही दी जाती है, इतने कम किराए में यात्रियों और सामान को लाने-ले जाने की चर्चा कोई नहीं करता।
जो देश तीन ओर से समुद्र से घिरा हो और जिसके एक छोर से दूसरे छोर तक ढेरों नदियां बहती हों, वहां जहाजरानी और जलमार्ग भी परिवहन के उतने ही महत्वपूर्ण साधन होते हैं। सरकार की सागरमाला परियोजना का लक्ष्य बंदरगाहों को विकास का इंजन बनाना है। आंतरिक जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग बनाने का उसका निर्णय भी हमारी नदियों का उपयोग विकास के माध्यम के रूप में करने के उद्देश्य से है।
प्रदूषण का जिक्र किए बगैर आप परिवहन की बात नहीं कर सकते। दोनों का चोली-दामन का साथ लगता है, एक के बगैर दूसरा हो ही नहीं सकता। कम दूरी के लिए परिवहन के हरित यानी पर्यावरण के अनुकूल साधनों के प्रयोग को ही बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जैसे साइकिल, साइकिल रिक्शा, विक्टोरिया, ठेले और हमारे पांव। आस-पड़ोस की किराने की दुकान पर सामान खरीदने के लिए बाइक या कार से जाने की क्या आवश्यकता है? दूध-ब्रेड खरीदने के लिए सुबह टहलना निश्चित रूप से बाइक पर जाने की अपेक्षा अधिक स्वास्थ्यकर होगा। इसके अलावा राजमार्ग और मुख्य सड़कों के इर्द-गिर्द आॅक्सीजन पट्टियां विकसित करने के लिए हरित पट्टियों की योजना बनानी चाहिए। सरकार की हरित राजमार्ग नीति इस दिशा में स्वागत योग्य कदम है।
विमान यात्रा अब भी धनी वर्ग के यातायात का माध्यम मानी जाती है लेकिन यदि आज हवाई अड्डे देखें तो यह मिथक समाप्त हो रहा है। हवाई अड्डों पर प्रत्येक आयु आयु वर्ग और आर्थिक स्थिति वाले लोग मिलेंगे। इसका मुख्य कारण है तेज यात्रा करने और गंतव्य तक शीघ्र पहुंचने की लोगों की इच्छा। नागर विमानन इसीलिए यात्रा का महत्वपूर्ण साधन बन गया है। सरकार भी इसे स्वीकार कर रही है और नागर विमानन नीति शीघ्र ही आ सकती है।
अंग्रेजी भाषा के कवि राॅबर्ट प्रफाॅस्ट ने अपनी एक कविता में कहा था, ‘जंगल घने हैं, अंधेरे से भरे हैं और प्यारे हैं लेकिन मुझे सोना नहीं है, अभी तो मीलों चलना है।’ हमारे पहले प्रधानमंत्राी पंडित जवाहरलाल नेहरू विकास की बात करते समय अक्सर यह कविता कहते थे। यह सच है कि परिवहन के प्रमुख साधन-सड़क, रेल और विमान राष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और यदि सरकार राष्ट्र को विश्व के आर्थिक मानचित्रा पर देखना चाहती है तो उसे इनसे जुड़ी समस्याएं सुलझानी ही होंगी।
#योजना_हिंदी के #नवम्बर2015 अंक का संपादकीय

22/10/2015

एक नन्हा बालक ईश्वर से मिलना चाहता था।

वह जानता था कि उसकी यह यात्रा लंबी होगी।
इस कारण उसने अपने बैग में बिस्कुट के पैकेट और पानी की बोतलें रखीं और यात्रा पर निकल पड़ा। वह अपने घर से कुछ ही दूर पहुंचा होगा कि उसकी नजर एक बुजुर्ग सज्जन पर पड़ी, जो पार्क में कबूतरों के एक झुंडको देख रहे थे। वह बालक भी उनके पास जाकर बैठ गया। कुछ देर बाद उसनेपानी की बोतल निकालने के लिए अपना बैग खोला। उसे लगा कि वह बुजुर्ग सज्जन भी भूखे हैं, लिहाजा उसने उन्हें कुछ बिस्कुट दिए। उन्होंने बिस्कुट लेते हुए बालक की तरफ मुस्कराकर देखा।बालक को बुजुर्ग की मुस्कराहट बेहद भली लगी। वह उसके दीदार एक बार फिर करना चाहता था, सो उसने उन्हें पानी की बोतल भी पेश की।बुजुर्ग सज्जन ने पानी लेते हुए फिर मुस्कराकर उसकी तरफ देखा। बालक यह देखकर बेहद खुश हुआ। इसके बाद पूरी दोपहर वे साथ-साथ बैठे रहे।बालक उन्हें समय-समय पर पानी और बिस्कुट देता रहता।बदले में उसे उनकी भोली मुस्कराहट मिलती रही।अब तक शाम होने को आई थी। बालक को भी थकान लगने लगी थी। उसने सोचा कि अब घर चलना चाहिए। वह उठा और घर की ओर चलने लगा।कुछ कदम चलने के बाद वह ठिठका और पलटकर दौड़ते हुए वृद्ध के पास आया।उसने वृद्ध को अपनी बांहों में भरा।
बदले में वृद्ध शख्स ने होंठों पर और भी बड़ी मुस्कराहट लाते हुए उसका आभार प्रकट किया।कुछ देर बाद वह बालक अपने घर पर था।दरवाजा उसकी मां ने खोला और उसके होंठों पर खेलती मुस्कराहट देख पूछ बैठीं,'आज तुमने ऐसा क्या किया, जो तुम इतने खुश हो.....?'

बालक ने जवाब दिया, 'आज मैंने ईश्वर के साथ लंच किया।' इसके पहले कि मां कुछ और पूछती वह फिर बोला, 'तुम्हें मालूम है मां....?उनके जैसी मुस्कराहट मैंने आज तक नहीं देखी।'

उधर, वह बुजुर्ग सज्जन भी वापस अपने घर पहुंचे, जहां दरवाजा उनके बेटे ने खोला।
बेटा अपने पिता के चेहरे पर शांति और संतुष्टि के भाव देख पूछ बैठा, 'आज आपने ऐसा क्या किया है,जो आप इतने खुश लग रहे हैं।

'इस पर उन्होंने जवाब दिया, 'मैंने पार्क में ईश्वर के साथ बिस्कुट खाए।' इससे पहले की बेटा कुछ और कहता, वह आगे बोले, 'तुम्हें मालूम है....?मेरी अपेक्षा के अनुरूप ईश्वर कहीं छोटी उम्र के हैं।'

इस किस्से का निष्कर्ष यह निकलता है कि मुस्कराने में अपने पल्ले से कुछ भी खर्च नहीं होता है। इसके उलट जिसकी तरफ मुस्कराकर देखा जाता है,वह इससे और समृद्ध ही महसूस करता है। मुस्कराहट खरीदी नहीं जा सकती है,उधार नहीं मांगी जा सकती है और इसे चोरी नहीं किया जा सकता है।इसका तब तक कोई मूल्य नहीं है, जब तक कि किसी को मुस्कराकर देखा नहीं जाए। इसके बावजूद कुछ लोग मुस्कराने में थकान का अनुभव करते हैं।वे इसमें कंजूसी बरतते हैं। मुस्कराने के महत्व को समझते हुए मुस्कराएं। किसी को इससे ज्यादा और क्या चाहिए कि कोई उसे देखकर मुस्कराए।किसी की तरफ मुस्कराकर देखने से हमारा कुछ घटता नहीं है, बल्कि संतुष्टि और प्रसन्नता ही अनुभव होती है......!!!

Photos 25/09/2015

गांव होंगे स्मार्टनेस की असली कुंजी
बेंगलुरु उन शहरों में है, जहां अच्छे तरीके से ग्रामीण इलाकों का शहरीकरण किया गया और शहर को विस्तार मिला। वहां बनी इलैक्ट्राॅनिक सिटी गांवों की जमीनों के सटीक उपयोग का ही नतीजा थी। इस शहर में अब विस्तार की ज्यादा संभावनाएं बेशक नहीं दीखती हों तब भी अनुमान है कि इसका मौजूदा 99 वर्ग किलोमीटर का एरिया और बढ़कर 696 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाएगा। इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि स्मार्ट सिटी को किस कदर गांवों की जरूरत पड़ने वाली है
भारत गांवों में रहता है। हालांकि वर्ष 2011 के जनसंख्या के आंकड़े बताते हैं कि बहुत तेजी से गांवों के लोग शहर में आ रहे हैं। माना जाता है कि हर एक मिनट पर गांव के 30 लोग शहर की ओर पलायन कर जाते हैं। शहरों का विकास हो रहा है। शहरों की सीमाएं बढ़ रही हैं। उनकी सरहदों को छू रहे गांव शहर का हिस्सा बन रहे हैं। फिलहाल देश की 34 फीसदी आबादी शहरों में रहती है। वर्ष 2041 तक ये आंकड़ा बढ़कर 50 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में भविष्य में बनने वाले स्मार्ट शहरों पर दोहरी जिम्मेदारी होगी कि किस तरह वो भविष्य की बढी आबादी के लिए तैयार है और केसे आस पास के गांवों को शहरीकरण के लिए सुनियोजित ढंग से समायोजित कर पाते हैं।
#स्मार्ट_सिटी पर आधारित #योजना_हिंदी के #सितम्बर_2015 के अंक के कुछ अंश

Photos 24/09/2015

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Photos from अतुल्य भारत  Incredible India's post 19/09/2015

संसार का हर प्राणी जीना चाहता है और किसी भी प्राणी का जीवन लेने का अधिकार किसी को भी नहीं है. अन्य प्राणियों की तो छोड़ो आज तो बेटियों की जिंदगी कोख में ही छीनी जा रही है. "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहाँ नारियों की पूजा की जाती है वहां देवता निवास करते हैं. ऐसा शास्त्रों में लिखा है किन्तु बेटियों की दिनोदिन कम होती संख्या हमारे दौहरे चरित्र को उजागर करती है.

माँ के गर्भ में पल रही कन्या की जब हत्या की जाती है तब वह बचने के कितने जतन करती होगी यह माँ से बेहतर कोई नहीं जानता. गर्भ में 'माँ मुझे बचा लो ' की चीख कोई खयाली पुलाव नहीं है बल्कि एक दर्दनाक हकीकत है. अमेरिकी पोट्रेट फिल्म एजुकेशन प्रजेंटेशन ' The Silent Scream ' एक ऐसी फिल्म है जिसमे गर्भपात की कहानी को दर्शाया गया है. इसमें दिखाया गया है कि किस तरह गर्भपात के दौरान भ्रूण स्वयं के बचाव का प्रयास करता है. गर्भ में हो रही ये भागदौड़ माँ महसूस भी करती है. अजन्मा बच्चा हमारी तरह ही सामान्य इंसान है. ऐसे मैं भ्रूण की हत्या एक महापाप है.

वह नन्हा जीव जिसकी हत्या की जा रही है उनमे से कोई कल्पना चावला, कोई पी. टी. उषा, कोई स्वर कोकिला लता मंगेशकर तो कोई मदर टेरेसा भी हो सकती थी. कल्पना चावला जब अन्तरिक्ष में गयी थी तब हर भारतीय को कितना गर्व हुआ था क्योंकि हमारे भारत को समूचे विश्व में एक नयी पहचान मिली थी. सोचो अगर कल्पना चावला के माता पिता ने भी गर्भ में ही उसकी हत्या करवा दी होती तो क्या देश को ये मुकाम हासिल करने को मिलता ?

जीवन की हर समस्या के लिए देवी की आराधना करने वाला भारतीय समाज कन्या जन्म को अभिशाप मानता है और इस संकीर्ण मानसिकता की उपज हुयी है दहेज़ रुपी दानव से. लेकिन दहेज़ के डर से हत्या जैसा घ्रणित और निकृष्ट कार्य कहाँ तक उचित है ? अगर कुछ उचित है तो वह है दहेज़ रुपी दानव का जड़मूल से खात्मा. एक दानव के डर से दूसरा दानविक कार्य करना एक जघन्य अपराध है और पाशविकता की पराकाष्ठा है.

हिंसा का यह नया रूप हमारी संस्कृति और हमारे संस्कारों का उपहास है. नारी बिना सृष्टि संभव नहीं है. ऐसे में बढ़ते लिंगानुपात की वजह से वह दिन दूर नहीं जब 100 लड़कों पर एक लड़की होगी और वंश बेल को तरसती आँखे कभी भी तृप्त नहीं हो पायेगी.

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