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12/09/2026
सुप्रीम कोर्ट ने BNS की धारा 69 के बारे में बताया: शादी का असली वादा तोड़ने पर धोखे से सेक्स का अपराध नहीं बनतासुप्रीम क...
11/09/2026

सुप्रीम कोर्ट ने BNS की धारा 69 के बारे में बताया: शादी का असली वादा तोड़ने पर धोखे से सेक्स का अपराध नहीं बनता
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज FIR रद्द की। इस धारा में धोखे से (जैसे शादी का झूठा वादा करके) सहमति लेकर सेक्स करने को अपराध माना गया। कोर्ट ने पाया कि शिकायत से ही पता चलता है कि यह धोखे से बहला-फुसलाकर बनाया गया संबंध नहीं, बल्कि आपसी सहमति से बना संबंध था। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी की माँ की इजाज़त न होने के कारण शादी से इनकार करना धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ स्पेशल लीव पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करते हुए 'दीपक गुलाटी बनाम हरियाणा राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। याचिकाकर्ता (अपीलकर्ता/आरोपी) पर BNS की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोप था कि उसने शिकायतकर्ता से शादी का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में अपनी माँ की असहमति का हवाला देते हुए वादे से मुकर गया। इसके बाद हाई कोर्ट ने उसके खिलाफ मामला रद्द करने की याचिका खारिज की।
हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि हाईकोर्ट ने 'दीपक गुलाटी' मामले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया, "यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत होने चाहिए कि संबंधित समय पर, यानी शुरुआती चरण में ही, आरोपी का पीड़िता से शादी करने का अपना वादा निभाने का कोई इरादा नहीं था। बेशक, ऐसी परिस्थितियां हो सकती हैं जब अच्छे इरादे रखने वाला व्यक्ति भी कई अपरिहार्य कारणों से पीड़िता से शादी न कर पाए। भविष्य की किसी अनिश्चित तारीख के लिए किए गए वादे को पूरा न कर पाना - जब इसके कारण उपलब्ध सबूतों से स्पष्ट न हों - हमेशा 'तथ्य की गलतफहमी' (Misconception of Fact) नहीं माना जा सकता।"
"तथ्य की गलतफहमी" (Misconception of Fact) के दायरे में आने के लिए उस तथ्य का तुरंत संबंध होना ज़रूरी है। ऐसी स्थिति में लड़की के काम को पूरी तरह से माफ़ करने और दूसरे व्यक्ति पर आपराधिक ज़िम्मेदारी डालने के लिए IPC की धारा 90 का सहारा नहीं लिया जा सकता, जब तक कि अदालत को यह यकीन न हो जाए कि शुरू से ही आरोपी का उससे शादी करने का कोई इरादा नहीं था। बता दें, भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC, जो अब BNS की धारा 28 है) की धारा 90 डर या गलतफहमी में दी गई सहमति से संबंधित है।

⚖️ एपीओ भर्ती में आरक्षण नियमों पर चार सवाल तय​प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एपीओ भर्ती 2025 प्रक्रिया में अनारक्षित श...
06/09/2026

⚖️ एपीओ भर्ती में आरक्षण नियमों पर चार सवाल तय

​प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एपीओ भर्ती 2025 प्रक्रिया में अनारक्षित श्रेणी और प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर आरक्षण के नियमों को लेकर चार महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न तय किए हैं।

​न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने पंकज वर्मा व दो अन्य की याचिका पर सुनवाई करने के बाद स्पष्ट किया कि मामले के निस्तारण के लिए संवैधानिक व कानूनी बिंदुओं पर निर्णय जरूरी है।

​कोर्ट द्वारा तय किए गए 4 मुख्य सवाल:

1️⃣ क्या किसी वैधानिक प्रावधान के अभाव में विज्ञापन के पैरा नंबर 16 में दी गई शर्त को वैध माना जा सकता है?

2️⃣ क्या अनारक्षित श्रेणी का अर्थ केवल अनारक्षित उम्मीदवारों के लिए आरक्षित वर्ग है, या यह पूरी तरह से मेरिट के आधार पर भरी जाने वाली एक खुली श्रेणी है?

3️⃣ क्या प्रारंभिक परीक्षा के बाद तैयार की जाने वाली श्रेणीवार सूची केवल उसी विशेष वर्ग के उम्मीदवारों से भरी जानी चाहिए, या अनारक्षित वर्ग के मामले में इसे केवल मेरिट के आधार पर भरा जाना अनिवार्य है?

4️⃣ क्या अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग के लिए आयोजित होने वाली प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर ही कोई वास्तविक 'चयन' शामिल होता है?

​📌 कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख लगाते हुए स्पष्ट किया है कि ये चारों प्रश्न फिलहाल अनंतिम हैं और दोनों पक्षों की अंतिम बहस के बाद ही फैसला किया जाएगा।

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​📄 पीसीएस मेंस-24 की कॉपियां दिखाने का निर्देश

​प्रयागराज: हाईकोर्ट ने लोक सेवा आयोग को उत्तर प्रदेश सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा मुख्य परीक्षा 2024 के दो अभ्यर्थियों को 26 नवंबर तक इंतजार कराने की बजाय तीन सप्ताह के भीतर जल्द तारीख तय कर कॉपियों का निरीक्षण कराने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने सत्यम सिंह व एक अन्य की याचिका पर दिया।

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05/09/2026

⚖️ क्या पत्नी द्वारा पति को मारना या अपमानित करना अपराध है?

हाँ, परिस्थितियों के अनुसार पत्नी द्वारा पति के साथ मारपीट, चोट पहुँचाना, धमकी देना या ऐसा जानबूझकर अपमान करना जिससे शांति भंग होने की संभावना हो, कानून के तहत अपराध बन सकता है।

📌 भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की महत्वपूर्ण धाराएँ:

🔹 धारा 115 — स्वेच्छा से चोट पहुँचाना।
यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर दूसरे व्यक्ति को चोट पहुँचाई जाती है, तो परिस्थितियों के अनुसार यह धारा लागू हो सकती है।

🔹 धारा 131 — हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग किए जाने की परिस्थितियों में यह प्रावधान लागू हो सकता है।

🔹 धारा 351 — आपराधिक धमकी।
किसी व्यक्ति को उसके शरीर, प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की धमकी देकर भय पैदा करना आपराधिक धमकी के अंतर्गत आ सकता है।

🔹 धारा 352 — जानबूझकर अपमान।
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपमान करता है और ऐसी परिस्थितियाँ हों जिनसे शां�

29/08/2026

लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 अगस्त 2026 से लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना लागू की है। इस योजना का उद्देश्य राज्य की वरिष्ठ महिलाओं को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा प्रदान करना है।

योजना के मुख्य बिंदु:

• 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की साधारण बसों में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी।

• यह सुविधा केवल UPSRTC की साधारण (नॉन-एसी) बसों में उपलब्ध होगी।

• AC बसों तथा निजी बसों में इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

• योजना का लाभ केवल उत्तर प्रदेश की मूल निवासी 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को मिलेगा।

• यात्रा के दौरान आयु और पहचान के सत्यापन के लिए आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड दिखाना आवश्यक होगा।

• इस योजना का लाभ लेने के लिए किसी प्रकार के आवेदन, पंजीकरण या पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।

• बस में यात्रा करते समय पहचान पत्र �

25/08/2026

उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना: COP की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन!

​उत्तर प्रदेश बार काउंसिल (BCUP) ने वकीलों की सुविधा के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। 1 सितंबर 2026 से सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) से जुड़े सभी काम पूरी तरह से डिजिटल कर दिए गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि अब आपको बार काउंसिल के चक्कर लगाकर कागजी फॉर्म जमा करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि कोई भी ऑफलाइन फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा।

​अब आपको क्या करना होगा? (पूरी प्रक्रिया)

​यह प्रक्रिया बहुत ही आसान है। आपको बस इन स्टेप्स को फॉलो करना है:

​सबसे पहले अपने मोबाइल या लैपटॉप से BCUP की आधिकारिक वेबसाइट upbarcouncil.in पर जाएं।

​वेबसाइट पर मौजूद 'एडवोकेट पोर्टल' पर अपना रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) पूरा करें।

​इसके बाद COP (सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस) सेक्शन में जाएं। वहां आपको जो भी काम है, उसका फॉर्म चुनें (जैसे डिक्लेरेशन फॉर्म या वेरिफिकेशन फॉर्म)।

​फॉर्म में मांगी गई अपनी सभी जानकारी �

25/08/2026

🚨 जबरदस्ती काम करवाना पड़ सकता है भारी! 🚨

क्या आप जानते हैं कि किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन काम करवाना कानूनन अपराध है?

📖 भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 146 के अनुसार, किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध गैरकानूनी रूप से श्रम या काम करवाना दंडनीय अपराध है।

⚖️ सजा का प्रावधान: • 1 वर्ष तक का कारावास, या • जुर्माना, या • दोनों।

✅ प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अधिकार है। किसी को भी बल, दबाव या धमकी देकर काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

📌 अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और कानून का सम्मान करें।

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भूमिका ट्रस्ट बनाम भारत संघ एवं संबंधित मामलों का सार (हिंदी में)सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 के अपने उस फैसले की समीक्षा या...
21/08/2026

भूमिका ट्रस्ट बनाम भारत संघ एवं संबंधित मामलों का सार (हिंदी में)
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 के अपने उस फैसले की समीक्षा याचिकाएं खारिज कर दीं, जिसमें निचली न्यायिक सेवा (Civil Judge Junior Division) में भर्ती के लिए पूर्व कानूनी प्रैक्टिस को अनिवार्य किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने 3 वर्ष की अनिवार्य प्रैक्टिस को घटाकर 1 वर्ष कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह तथा न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन (असहमति मत) की संविधान पीठ ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।
1. संक्रमणकालीन व्यवस्था (20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 तक)
कानून स्नातक (Law Graduates) बिना किसी पूर्व प्रैक्टिस के आवेदन कर सकेंगे।
उन्हें 1 वर्ष की प्रैक्टिस पूर्ण मान ली जाएगी और प्रैक्टिस प्रमाणपत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी।
चयन के बाद उन्हें प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी (Trainee Judicial Officer) नियुक्त किया जाएगा।
उन्हें निम्न प्रशिक्षण पूरा करना होगा:
1 वर्ष का गहन प्रशिक्षण राज्य न्यायिक अकादमी में।
1 वर्ष की संरचित क्लर्कशिप, जिसमें:
6 माह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/उच्च न्यायिक सेवा अधिकारी के अधीन।
6 माह उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश के अधीन।
क्लर्कशिप अवधि में उन्हें वही वेतन-भत्ते मिलेंगे जो न्यायिक अकादमी प्रशिक्षण के दौरान मिलते हैं।
नियमित नियुक्ति से पहले संबंधित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
2. 1 अप्रैल 2027 के बाद की भर्ती
1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी विज्ञापनों के लिए उम्मीदवार के पास कम से कम 1 वर्ष की सक्रिय कानूनी प्रैक्टिस होना अनिवार्य होगा।
प्रैक्टिस का सत्यापन प्रभावी न्यायिक कार्यवाही में भागीदारी के आधार पर जारी प्रैक्टिस प्रमाणपत्र से होगा।
चयन के बाद उम्मीदवार को:
1 वर्ष न्यायिक अकादमी प्रशिक्षण।
6 माह जिला एवं सत्र न्यायाधीश/उच्च न्यायिक सेवा अधिकारी के अधीन क्लर्कशिप।
6 माह उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश के अधीन क्लर्कशिप।
प्रशिक्षण अवधि में प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी को Judicial Magistrate First Class (JMFC) के कुल वेतन का 50% मानदेय मिलेगा।
संतोषजनक मूल्यांकन के बाद नियमित न्यायिक पद पर नियुक्ति तथा पूर्ण वेतन एवं सेवा लाभ दिए जाएंगे।
3. बहुमत का तर्क
न्यायालय ने मई 2025 के उस मूल सिद्धांत को बरकरार रखा कि न्यायपालिका में प्रवेश करने वाले व्यक्ति को कानूनी पेशे का कुछ व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।

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