15/08/2025
आजादी का जश्न मनाएं, तिरंगा लहराएं, और वीरों के बलिदान को याद करें. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.🙏🇮🇳
Academy of social studies
P. C. Yadav
Academy of social studies. "Signature se Autograph tak"
15/08/2025
आजादी का जश्न मनाएं, तिरंगा लहराएं, और वीरों के बलिदान को याद करें. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.🙏🇮🇳
Academy of social studies
P. C. Yadav
14/08/2025
कभी-कभी लोग आपको इसलिए माफ़ नहीं कर पाते.. क्योंकि उन्हें आपकी गलती बड़ी लगती है।
बल्कि इसलिए, क्योंकि वो आपके द्वारा दी गई तकलीफ़ से बहुत देर तक लड़े होते हैं.....!!😥💯
09/08/2025
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं...।
Academy of social studies
P. C. Yadav
Art Gallery
08/08/2025
जब पांडव वनवास के दौरान पानी ढूंढ रहे थे तब का प्रकरण है ये
युद्धिष्ठर और यक्ष के बीच का संवाद
यक्ष प्रश्न: भाग्य क्या है?
युधिष्ठिर उत्तर: हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है। आज का प्रयत्न कल का भाग्य है।
जो मात्र भाग्यवादी हैं उनके लिए है ये संवाद , हमारा काम प्रयत्न करना है बस
लड़ेंगे और जीतेंगे भी...
Academy of social studies
11/07/2025
~ अश्वमेध यज्ञ करने वाले शासक....।
Academy of social studies
02/07/2025
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों !
मोती व्यर्थ बहाने वालों !
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है? नयन सेज पर
सोया हुआ आँख का पानी,
और टूटना है उसका ज्यों
जागे कच्ची नींद जवानी
गीली उमर बनाने वालों।
डूबे बिना नहाने वालों !
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।
माला बिखर गयी तो क्या है
ख़ुद ही हल हो गई समस्या,
आँसू गर नीलाम हुए तो
समझो पूरी हुई तपस्या,
रूठे दिवस मनाने वालों !
फटी कमीज़ सिलाने वालों !
कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर
केवल जिल्द बदलती पोथी ।
जैसे रात उतार चाँदनी
पहने सुबह धूप की धोती
वस्त्र बदलकर आने वालों !
चाल बदलकर जाने वालों !
चन्द खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
लाखों बार गगरियाँ फूटीं
शिकन न आई पनघट पर
लाखों बार किश्तियाँ डूबीं
चहल-पहल वो ही है तट पर
तम की उमर बढ़ाने वालों
लौ की आयु घटाने वालों
लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
लूट लिया माली ने उपवन
लुटी न लेकिन गन्ध फूल की,
तूफ़ानों तक ने छेड़ा पर
खिड़की बन्द न हुई धूल की,
नफ़रत गले लगाने वालों !
सब पर धूल उड़ाने वालों !
कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पन नहीं मरा करता है।
- गोपालदास नीरज
Academy of social studies
"*प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कार्बन डाई ऑक्साइड का अपचयन (Reduction )तथा जल का उपचयन(Oxidation)*
"प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का अपचयन एवं जल का उपचयन होता है" — का सरल मतलब नीचे बताया गया है:
---
🔆 मतलब समझें:
1. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) क्या है?
यह एक प्रक्रिया है जिसमें पौधे सूर्य के प्रकाश की मदद से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और जल (H₂O) से ग्लूकोज़ (C₆H₁₂O₆) नामक भोजन बनाते हैं और ऑक्सीजन (O₂) छोड़ते हैं।
---
🌿 अब शब्दों का अर्थ:
✅ अपचयन (Reduction):
जब किसी पदार्थ में ऑक्सीजन निकल जाती है या हाइड्रोजन जुड़ती है, तो उसे अपचयन कहते हैं।
📌 यहां, कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का अपचयन होता है, यानी यह एक जटिल कार्बनिक यौगिक (जैसे ग्लूकोज़) में बदल जाती है।
✅ उपचयन (Oxidation):
जब किसी पदार्थ में ऑक्सीजन जुड़ती है या हाइड्रोजन निकलती है, तो उसे उपचयन कहते हैं।
📌 यहां, जल (H₂O) का उपचयन होता है, यानी इसमें से हाइड्रोजन निकलती है और ऑक्सीजन गैस के रूप में बाहर आती है।
---
🔄 संपूर्ण प्रक्रिया का सारांश:
क्रिया पदार्थ प्रक्रिया परिणाम
अपचयन CO₂ भोजन (ग्लूकोज़) बनता है ऊर्जा संग्रह
उपचयन H₂O ऑक्सीजन निकलती है वायुमंडल में जाती है।
14/06/2025
क्या होता है pH स्केल....?
Academy of social studies
P. C. Yadav
12/06/2025
अगर यही सही तो अलविदा ही सही!!
07/06/2025
*संविधान बड़ा है या संसद*
भारत में संविधान संसद से बड़ा है। इसका मतलब यह है कि:
🔹 संविधान सर्वोच्च है:
भारत का संविधान देश का मूल कानून (Supreme Law) है।
संसद सहित सभी संस्थाएं — राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायपालिका, और राज्य सरकारें — संविधान के अधीन काम करती हैं।
🔹 संसद संविधान बदल सकती है, लेकिन...
संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार है, पर यह संविधान की मूल भावना (Basic Structure) को नहीं बदल सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने केशवानंद भारती केस (1973) में यह तय किया कि संसद संविधान के "मूल ढांचे" को नहीं छू सकती।
🔹 उदाहरण:
अगर संसद कोई ऐसा कानून बनाती है जो संविधान के खिलाफ है, तो सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द कर सकता है।
---
निष्कर्ष:
✅ संविधान संसद से बड़ा है, क्योंकि संसद को भी संविधान के नियमों और सीमाओं के अंदर ही काम करना होता है।
Academy of social studies
Art Gallery