03/12/2024
हलधर नाग, जिन्हें 'लोक कवि रत्न' के नाम से जाना जाता है, ने कोसली भाषा में कविताएँ लिखकर साहित्य में अपनी एक अनोखी पहचान बनाई है। केवल तीसरी कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद भी, हलधर नाग बिना किसी किताब या नोट्स के अपनी कविताएँ सुनाने की कला के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी कविताएँ समाज, प्रकृति, और पौराणिक कथाओं से प्रेरित होती हैं और आज तक पाँच विद्वानों के पीएचडी शोध का विषय बन चुकी हैं।
1990 में उनकी पहली कविता प्रकाशित हुई, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी लेखनी में समाज की सच्चाई और प्रकृति की सुंदरता झलकती है, जिसने उन्हें साहित्य प्रेमियों के बीच एक अद्वितीय स्थान दिलाया। 2016 में, उनकी अद्भुत काव्य प्रतिभा और योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें पद्म श्री से नवाजा गया।
हलधर नाग का मानना है कि "हर इंसान में कवि बनने की क्षमता होती है, लेकिन उसे आकार देना ही असली कला है।" उनकी यह सोच और योगदान उन्हें भारतीय साहित्य के इतिहास में हमेशा यादगार बनाए रखेगी।