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23/08/2023
जिम्मेदारियों की एक खूबी होती हैये आपको कभी बिगड़ने नही देती..!!🖤
02/01/2023

जिम्मेदारियों की एक खूबी होती है
ये आपको कभी बिगड़ने नही देती..!!🖤

26/12/2022

यही जीवन हैं!

कुछ लोग अपनी पढाई 22 साल की उम्र में पुर्ण कर लेते हैं मगर उनको कई सालों तक कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलती,

कुछ लोग 25 साल की उम्र में किसी कंपनी के सीईओ बन जाते हैं और 50 साल की उम्र में हमें पता चलता है वह नहीं रहे,

जबकि कुछ लोग 50 साल की उम्र में सीईओ बनते हैं और 90 साल तक आनंदित रहते हैं,

बेहतरीन रोज़गार होने के बावजूद कुछ लोग अभी तक ग़ैर शादीशुदा है और कुछ लोग बग़ैर रोज़गार के भी शादी कर चुके हैं और रोज़गार वालों से ज़्यादा खुश हैं,

बराक ओबामा 55 साल की उम्र में रिटायर हो गये... जबकि ट्रंप 70 साल की उम्र में शुरुआत करते है,

कुछ लोग परीक्षा में फेल हो जाने पर भी मुस्कुरा देते हैं और कुछ लोग एक नंबर कम आने पर भी रो देते हैं,

किसी को बग़ैर कोशिश के भी बहुत कुछ मिल गया और कुछ सारी ज़िंदगी बस एड़ियां ही रगड़ते रहे,

इस दुनिया में हर शख़्स अपने टाइम ज़ोन की बुनियाद पर काम कर रहा है,

ज़ाहिरी तौर पर हमें ऐसा लगता है कुछ लोग हमसे बहुत आगे निकल चुके हैं,
और शायद ऐसा भी लगता हो कुछ हमसे अभी तक पीछे हैं,

लेकिन हर व्यक्ति अपनी अपनी जगह ठीक है अपने अपने वक़्त के मुताबिक़....!!

किसी से भी अपनी तुलना मत कीजिए..

अपने टाइम ज़ोन में रहें
इंतज़ार कीजिए और
इत्मीनान से प्रयास करते रहिए..

ना ही आपको देर हुई है और ना ही जल्दी,

परमपिता परमेश्वर ने हम सबको अपने हिसाब से डिजा़इन किया है वह जानता है कौन कितना बोझ उठा सकता है किस को किस वक़्त क्या देना है,

विश्वास रखिए भगवान की ओर से हमारे लिए जो फैसला किया गया है वह सर्वोत्तम ही है।.....
खुश रखे,मस्त रहे

*डॉ विकलेश नागर* की पोस्ट 🙏

डाक्टर खोजने की बजाय क्यों न स्वास्थ्य खोजा जाये वो भी सिर्फ खाने और पकाने की आदतों को बदल कर?यहाँ हम केवल पकाने की विधी...
23/12/2022

डाक्टर खोजने की बजाय क्यों न स्वास्थ्य खोजा जाये वो भी सिर्फ खाने और पकाने की आदतों को बदल कर?
यहाँ हम केवल पकाने की विधी पर बात करेगें।
भारत में पाककला का अद्भुत भंडार है जो स्वास्थ्य और स्वाद दोनों ही द्रष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। चिन्ताजनक है कि हम सभी उसे छोड़ते जा रहे हैं।
खाना पकाने में में किये जाने वाले बर्तनों का चयन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिसे हम सभी आधुनिकता और सुविधाजनक लगने के कारण बदलते जा रहे हैं और बीमारियों को निमंत्रण दे चुके हैं।
शरीर को अगर नियमित तौर पर पर्याप्त माइक्रो न्यूट्रियंट्स(सूक्ष्म पोषक तत्व) मिलते रहें तो शरीर जल्दी बीमार नहीं पड़ता।

खाना पकाने का सबसे सुरक्षित, उपयुक्त और पवित्र मिट्टी का बर्तन है।
1- मिट्टी के पात्र में पका भोजन अन्य धातु की तुलना में जल्दी खराब नहीं होता।
2- मिट्टी का बर्तन भोजन को पकाता है, सिर्फ गलाता नहीं।
3- मिट्टी के बर्तन में पके खाने के माइक्रो न्यूट्रियंट्स 100% अपने प्राकृतिक रुप में सुरक्षित रहते हैं।
4- मिट्टी के बर्तन में पका भोजन वात पित्त और कफ को सम रखता है अगर शरीर में वात, कफ और पित्त की मात्रा सम है तो रोग होने की संभावना न के बराबर होती है।

मिट्टी के अलावा अगर कोई और धातु उपयुक्त है तो वह है काँसा, इसमें खाना पकाने पर केवल 3% माइक्रो न्यूट्रियंट्स कम होते हैं।

उसके बाद आता है पीतल, इसमें पकाने पर 7% माइक्रो न्यूट्रियंट्स कम होते हैं।

लोहे के बर्तन में आयरन प्रचुर मात्रा में मिलता है इसमें हरे साग-सब्जी बनाया जाना स्वादिष्ट और लाभकारी है।

तांबा को आँच पर नहीं चढ़ाया जाना चाहिए इसका पानी पीना अमृत तुल्य है ये रक्त शुद्धि का सबसे लाभदायक स्रोत है। इसके अलावा ये वात, कफ और पित्त को भी बैलेंस रखने में सहयोगी है।

प्रेशर कुकर सबसे ख़तरनाक होता है इसमें केवल 7% ही माइक्रो न्यूट्रियंट्स बचते हैं यानि कि 87% खत्म हो जाते हैं। अल्युमिनियम जल्दी अवशोषित होने वाली धातु है जिससे खाना मिलकर विषाक्त हो जाता है। अल्युमिनियम, कैल्शियम और आयरन को सोख लेता है जिससे अल्जाइमर, नर्वस सिस्टम और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

नॉन स्टिक में टेफ्लॉन की पर्त चढ़ी होती है जो खतरनाक पॉलिमर प्यूम फीवर को जन्म देती है और वातावरण में खतरनाक गैसों को छोड़ती है अतः ये पक्षियों और मनुष्य दोनों के लिये खतरनाक है।

अगर हमें स्वस्थ रहना है तो पकाने के तरीकों को तो बदलना ही पड़ेगा।

एक बार एक स्कूल की कक्षा में एक शिक्षक ने अपने छात्रों से पूछा कि अगर आपके पास 86,400 रुपये हों, और कोई भी लुटेरा आपसे 1...
20/07/2022

एक बार एक स्कूल की कक्षा में एक शिक्षक ने अपने छात्रों से पूछा कि अगर आपके पास 86,400 रुपये हों, और कोई भी लुटेरा आपसे 10 रुपये छीनकर भाग जाए तो आप क्या करेंगे ?

शिक्षक....क्या आप उसके पीछे भागकर लुटे हुये 10 रुपये वापस पाने की कोशिश करेंगे ? या आप अपने बचे हुये 86390/- को हिफाज़त से लेकर अपने रास्ते पर चलते रहेंगे ?

कक्षा के कमरे में बहुमत ने कहा कि हम 10 रुपये की तुच्छ राशि की अनदेखी करते हुए अपने बचे हुये पैसा सम्भालकर अपने रास्ते पर चलते रहेंगे।

शिक्षक ने कहा: " आप लोगों का सत्य और अवलोकन सही नहीं है क्योंकि मैंने देखा है कि ज्यादातर लोग 10 रुपये वापस पाने की फ़िक्र में चोर का पीछा करते हैं और परिणामस्वरूप उनके बचे हुए 86,390 रुपये भी उनके हाथ से चले जाते हैं।

शिक्षक को देखते हुए छात्र हैरान होकर पूछने लगे " सर, यह असंभव है, भला ऐसा कौन करता है ?"

शिक्षक ने कहा...." ये 86,400 वास्तव में हमारे प्रतिदिन के सेकंड हैं।

10 सेकेण्ड की मामूली बात को लेकर या किसी भी 10 सेकेण्ड की नाराज़गी और गुस्से में हम बाकी के पूरे दिन को सोचने, कुढ़ने और जलने में गुज़ार देते हैं और हमारे बचे हुए 86,390 सेकंड भी नष्ट हो जाते हैं।

चीज़ों को अनदेखा करें। ऐसा न हो कि चंद लम्हों का गुस्सा, नकारात्मकता आपसे आपके सारे दिन की ताज़गी और खूबसूरती छीन ले.......!!

सफ़र में मुश्किलें आएँ तो जुरअत और बढ़ती है
कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है...!!

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