16/03/2022
UPPSC GDC 15/03/2022
1.यह भी कोई देश है महाराज- अनिल यादव का लिखा यात्रा वृत्तांत
2.ज्यों तिरिया पीहर बसै- कबीरदास
3.महिला रचनाकार की कृतियां...ठंडेपन की शिकार हैं- ममता कालिया(पुस्तक- नयी सदी की पहचान:श्रेष्ठ महिला कथाकार)
4.आल इंडिया रेडियो से जुड़ाव नहीं रहा- निराला
5.सिद्धों और योगियों की रचनाएं....शुद्ध साहित्य की कोटि में नहीं आ सकती- शुक्ल जी
6.साहित्यालोचन- श्यामसुंदर दास
7.तार सप्तक- इसके सातों कवि पुरुष हैं कोई महिला नहीं है
8.अभिधा उत्तम काव्य है- देव
9. 420 प्रतिशत, चन्दर महाशय, डाक्टर,मंगला सभी के लेखक यशपाल हैं
10.गंगावतरण श्रीधर पाठक की नहीं,पाठ का नाम-जगन्नाथदास रत्नाकर की कृति है
11.लोकसाहित्य जनता का वह... जनता के लिए लिखा गया हो- कृष्णदेव उपाध्याय
12.पूर्वी हिंदी की बोली नहीं है- बुंदेली
13.रसवन्त कवित्तन को रस ज्यौं...चिंतामणि त्रिपाठी
14.मेरे सात जनम रामेश्वर कम्बोज की कृति है पर आत्मकथा नहीं है
15.द्विवेदी युग के काव्य की प्रमुख विशेषता है इतिवृत्तात्मकता और इस काल में राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना विद्यमान है
16.हजारी प्रसाद द्विवेदी कृत उपन्यास-पुनर्नवा
17.फोकलोर को कृष्णदेव उपाध्याय ने लोकवार्ता कहा है
18.मम्मट रस सूत्र के व्याख्याकार नहीं हैं
19.उदित मार्तंड 2 साल के पहले(लगभग डेढ़ वर्ष बाद) ही बंद हो गई थी
20.पुष्टिमार्ग- वल्लभाचार्य
21.काव्यहेतु 'प्रतिभा' के लिए 'शक्ति' शब्द का प्रयोग-
22.द्विवेदी युग मे सुधारवादी नैतिकता ने प्रेम कविता लिखने की प्रेरणा दी- असत्य कथन है
23.स्वरतंत्रियों में कंपन- घोष ध्वनि
24.कुमारपाल प्रतिबोध- सोमप्रभा सूरि
25.डायरी के नीरस पृष्ठ- इलाचंद्र जोशी
26.हिमहास-रामकुमार वर्मा का गद्यगीत
27.-पायस पयोनिधि-भारतेन्दु की कृति नहीं है
28.संघ की राजभाषा हिंदी- अनु 343
29.प्रसाद का ब्रजभाषा काव्य संकलन- प्रेमपथिक
30.गदाधर भट्ट रामभक्ति धारा से संबंधित नहीं हैं
31.लबड़धोंधो-जीपी श्रीवास्तव का प्रहसन नहीं है
32.अरस्तू ने विरेचन शब्द चिकित्साशास्त्र से ग्रहण किया है
33.सुदामाचरित-नरोत्तमदास
34.जिहाद- गोविंद मिश्र
35.आत्मोत्सर्ग(सियारामशरण गुप्त)-
36.शुक्ल जी रीतिकाल का आरंभ चिंतामणि से मानते हैं
37.बाजार के बीच:बाजार के खिलाफ-प्रभा खेतान
38.राहुल जी ने आदिकाल को सिद्ध सामंत काल कहा था
39.अश्क का उपन्यास गर्म राख-1952
40.बिहारी का गागर में सागर भरने का गुण....से ही संभव हुआ है- शुक्ल जी
41.यादों की परछाइयां -चतुरसेन शास्त्री की आत्मकथा
42.दि मीनिंग आफ मीनिंग रिचर्डस की नहीं बल्कि Charles Kay Ogden की कृति है
49कबीरदास में जो रहस्यवाद है... सूफियों के प्रभाव के कारण है-शुक्ल जी
44.कामायनी में कुल 15 सर्ग हैं
45.उदंत मार्तंड का प्रकाशन कलकत्ता से हुआ था
46.बीसलदेव रासो की नायिका राजमती
47.विलक्षण बात यह है कि...नाटकों से हुआ-शुक्ल जी
48.किस्सा और दृष्टि को जोड़नेवाला तत्व उपन्यास में चरित्रसृष्टि है-राम स्वरूप चतुर्वेदी
49.गोरख जगायो जोग भगति भगायो लोग-तुलसीदास
50.ऋणजल-धनजल रेणु का लिखा रिपोर्ताज है
51. उपनिवेश में स्त्री- प्रभा खेतान
52.संधि और चारण काल रामकुमार वर्मा
53.भाग्यवती-1877ई
54.पत्नी-प्रेमचंद की कहानी नहीं है
55.द माडर्न वरनाकुलर लिटरेचर आफ हिन्दुस्तान Asiatic society of Bengal के विशेषांक के रूप में छपा था
56.क्या गोरी क्या सांवरी- देवेन्द्र सत्यार्थी
57.हृदय की अनुकृति बाह्य उदार- श्रद्धा के प्रति
58.रामविलास शर्मा मार्क्सवादी समीक्षक
59.विरहवागीश-बोधा
60. लालटेन- विदेशी शब्द
61.सलाम कहानी ओमप्रकाश वाल्मीकि
62.पंचवटी प्रसंग-निराला
63.यह आम पराजय की, भय की... -अंधायुग
64.कंठ्य ध्वनि है-क
65.चर्यापद- शबरपा
66.तिलिस्मी ऐय्यारी वाले उपन्यास- देवकीनंदन खत्री
67."आज" के प्रथम संपादक- पराड़कर
68.मार्क्सवाद समीक्षा नहीं वरन नई समीक्षा के लिए कृति ही विचारणीय है
69."संलक्ष्य क्रम संचय" ध्वनि संप्रदाय का एक भेद है
70.जयचंद प्रकाश- भट्ट केदार
#दीक्षा_एकेडमी_बस्ती
71.राहुल जी ने खड़ी बोली को कौरवी कहा था
72.चक्करदार चोरी-गोपालराम गहमरी
73.योगरूढ़ शब्द है-जलज
74.पिउ चित्तौड़ न आविऊ- खुमाणरासो
75.एक कहानी यह भी-मन्नू भंडारी
76.कजरी- लोकगीत है
77.झूठा सच का दूसरा भाग- देश का भविष्य
78.आज नदी बिल्कुल उदास थी- केदारनाथ अग्रवाल
79.कथासमय में तीन हमसफर- कृष्णा सोबती, मन्नू भंडारी,ऊषा प्रियंवदा
80.कविता मेरे लिए कोई भावुकता की हाय हाय...मार्मिक अभिव्यक्ति है- कुंअर नारायण
81.निराला की साहित्य साधना- राम विलास शर्मा
82.मधुमालती-मंझन
83.आल इंडिया रेडियो के लिए 1957 में आकाशवाणी शब्द प्रयोग किया गया
84.हिंदी काव्यधारा-राहुल जी
85.मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से....हजारी प्रसाद द्विवेदी
86.ब्रह्म समाज- राजाराममोहन राय
87.पूर्वी हिंदी का विकास- अर्धमागधी अपभ्रंश
88.कलि कुलिस जीव निस्तार हित वालमीकि तुलसी भयो- नाभादास
89.शुक्ल जी के अनुसार हिंदी का पहला मौलिक नाटक- वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति
90.नगरबधुएं अखबार नहीं पढ़ती- अनिल यादव