Master surya bhan study center

Master surya bhan study center

Share

JDI COLLEGE BANDA EX, PRINCIPAL

18/06/2025

जीन पियाजे (Jean Piaget) स्विस मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने #संज्ञानात्मक_विकास (Cognitive Development) का सिद्धांत प्रतिपादित किया। उनका सिद्धांत मुख्य रूप से बच्चों के मानसिक विकास और सीखने की प्रक्रिया पर केंद्रित है। पियाजे का शिक्षा सिद्धांत रचनावादी दृष्टिकोण (Constructivism) पर आधारित है, जिसमें यह माना जाता है कि बच्चे अपने अनुभवों और पर्यावरण के साथ सक्रिय रूप से संलग्न होकर ज्ञान का निर्माण करते हैं।
पियाजे के शिक्षा सिद्धांत के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं:-

संज्ञानात्मक विकास के चरण (Stages of Cognitive Development):
पियाजे ने बच्चों के विकास को चार चरणों में विभाजित किया, जो शिक्षा में महत्वपूर्ण हैं:
संवेदी-प्रेरक चरण (Sensorimotor Stage, 0-2 वर्ष): बच्चे अपने इंद्रियों और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से सीखते हैं।
पूर्व-संक्रियात्मक चरण (Preoperational Stage, 2-7 वर्ष): बच्चे प्रतीकात्मक सोच (जैसे भाषा और चित्र) का उपयोग शुरू करते हैं, लेकिन अभी भी स्व-केंद्रित (Egocentric) सोच रखते हैं।
मूर्त संक्रियात्मक चरण (Concrete Operational Stage, 7-11 वर्ष): बच्चे तार्किक सोच विकसित करते हैं, लेकिन यह ठोस वस्तुओं और घटनाओं तक सीमित रहता है।
औपचारिक संक्रियात्मक चरण (Formal Operational Stage, 11 वर्ष और उससे अधिक): बच्चे अमूर्त और तार्किक सोच विकसित करते हैं, जो जटिल समस्याओं को हल करने में मदद करता है।

इस सिद्धांत का शिक्षा में निहितार्थ:-

शिक्षकों को बच्चों की आयु और विकास के चरण के अनुसार शिक्षण विधियां अपनानी चाहिए।
सक्रिय अधिगम (Active Learning):
पियाजे का मानना था कि बच्चे निष्क्रिय रूप से ज्ञान ग्रहण नहीं करते, बल्कि सक्रिय रूप से अपने अनुभवों के आधार पर ज्ञान का निर्माण करते हैं।

शिक्षा में निहितार्थ:
शिक्षण में बच्चों को प्रयोग, अन्वेषण, और हस्त-कार्य (Hands-on activities) के अवसर प्रदान करने चाहिए।
#स्कीमा (Schema):
बच्चे अपने अनुभवों को स्कीमा (मानसिक ढांचे) में संगठित करते हैं। नई जानकारी को समझने के लिए वे दो प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं:
#सामंजस्य (Assimilation): नई जानकारी को मौजूदा स्कीमा में शामिल करना।
#अनुकूलन (Accommodation): नई जानकारी के आधार पर स्कीमा को संशोधित करना।
शिक्षा में निहितार्थ: शिक्षकों को बच्चों के मौजूदा ज्ञान को समझकर नई जानकारी को उनके स्कीमा के अनुरूप प्रस्तुत करना चाहिए।

संतुलन (Equilibration):
पियाजे के अनुसार, बच्चे संज्ञानात्मक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं। जब नई जानकारी उनके मौजूदा स्कीमा से मेल नहीं खाती, तो वे असंतुलन का अनुभव करते हैं और सामंजस्य या अनुकूलन के माध्यम से संतुलन प्राप्त करते हैं।
शिक्षा में निहितार्थ: शिक्षकों को बच्चों को चुनौतीपूर्ण लेकिन उनकी समझ के दायरे में आने वाली गतिविधियां देनी चाहिए ताकि वे नया ज्ञान प्राप्त कर सकें।

#बाल_केंद्रित_शिक्षा (Child-Centered Education):
पियाजे ने जोर दिया कि शिक्षा को बच्चे की रुचियों, जिज्ञासा, और विकास के स्तर के अनुरूप होना चाहिए। शिक्षक का कार्य निर्देशक (Instructor) के बजाय सहायक (Facilitator) के रूप में होना चाहिए।
शिक्षा में निहितार्थ: पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों को बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं और रुचियों के अनुरूप डिजाइन करना चाहिए।

सामाजिक और पर्यावरणीय अंतःक्रिया (Social and Environmental Interaction):
बच्चे अपने पर्यावरण और सामाजिक अंतःक्रियाओं (जैसे सहपाठियों, शिक्षकों, और परिवार के साथ) के माध्यम से सीखते हैं।
शिक्षा में निहितार्थ: समूह कार्य, चर्चा, और सहयोगी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि बच्चे एक-दूसरे से सीख सकें।

#खोज_आधारित_अधिगम (Discovery Learning):
पियाजे ने सुझाव दिया कि बच्चों को स्वयं अन्वेषण और खोज के माध्यम से सीखने का अवसर देना चाहिए। यह उन्हें तार्किक और स्वतंत्र सोच विकसित करने में मदद करता है।
शिक्षा में निहितार्थ: शिक्षकों को बच्चों को समस्याओं को हल करने, प्रयोग करने, और स्वयं निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

निष्कर्ष:
पियाजे का शिक्षा सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि शिक्षा को बच्चे के संज्ञानात्मक विकास के अनुरूप होना चाहिए, और बच्चों को सक्रिय रूप से अपने ज्ञान का निर्माण करने का अवसर देना चाहिए। शिक्षक का कार्य बच्चों को मार्गदर्शन देना और ऐसी परिस्थितियाँ प्रदान करना है जो उनकी जिज्ञासा और तार्किक सोच को प्रोत्साहित करे.

21/01/2024

CTET

अगर CTET के पेपर में अच्छे अंक लाना हो तो.. शायद ये बातें आपके काम आ जाए..
सबसे पहले तो ये बात गांठ बांध लो कि..
*"बालक कभी गलत नही हो सकता,
शिक्षा व्यवस्था ही गलत है.. या आपका पढ़ाने का तरीका..

*CTET का पूरा पेपर सिर्फ दो चीजों पर टिका होता है वो है..
*सकारात्मक एवं नकारात्मक*
अब हम सबसे पहले जानेंगे कि नकारात्मक तथ्य कौन-कौन से हो सकते हैं..
*नकारात्मक तथ्य----
1. जहां याद करने व रटने की बात हो रही हो तो, दिमाग में बैठा लो कि ये नकारात्मक बिंदु है इसलिए बच्चे को इस ओर नहीं ले जाना है.
2. अगर किसी विकल्प में शिक्षार्थी के लिए दंड का समर्थन किया जा रहा हो तो, तो आपको ऐसे विकल्प का समर्थन नहीं करना है.
3. जहां अलगाव या विद्यार्थियों की योग्यता के आधार पर उनके ग्रुप बनाने की बात हो रही हो, तो आपको ये नहीं करना है.
4. जहां लड़के व लड़कियों में भेदभाव या लड़कों को लड़कियों से उच्चतम बताया जा रहा हो, या लड़कियों को लड़कों से.. तो आपको ऐसे विकल्प के साथ नहीं जाना है. लड़की व लड़का दोनों समान है एक शिक्षक की नजर में..
5. जिस विकल्प में सिलेबस को पूरा करवाने या किताबी ज्ञान पर बल दिया जा रहा हो, तो मान लो कि ये संकीर्ण विचारधारा है और आपको इसका सपोर्ट नहीं करना है.
6. जिस विकल्प में विद्यार्थियों से अनुशासन स्थापना की बात हो रही हो, उस विकल्प के साथ नहीं जाना है.
7. जिस विकल्प में व्याख्यान विधि की बात हो रही हो या विद्यार्थियों को केवल श्रोता बनाने का समर्थन हो तो उस विकल्प के साथ आपको नहीं जाना है.
8. जिस विकल्प में विद्यार्थियों को किसी चीज़ के लिए दोषी ठहराया गया हो तो आपको ऐसे विकल्प की ओर नहीं जाना है.. समझ जाओ कि ये निगेटिव बिंदु है..
9..जिस विकल्प में अंक या ग्रेड देने या केवल परीक्षा पास करने की बात कही जा रही हो तो आपको उसके साथ सहमत नहीं होना है मतलब ये कि ये नकारात्मक विकल्प है.
10. यदि किसी विकल्प में बालक को अनुतीर्ण करने की बात हो रही हो.. या.. उसी कक्षा में रोकने की बात हो रही हो तो समझ जाना कि ये गलत है.. बालक कभी फेल नहीं हो सकता है.. शिक्षा पद्धति में ही दोष है..

अब बात करते हैं सकारात्मक तथ्यों की..
*सकारात्मक तथ्य --
1. जहां विद्यार्थियों को अधिकाधिक अवसर दिए जा रहे हों.
2. जहां बहुभाषिकता पर बल दिया जा रहा हो.
3. करके सीखने को प्रोत्साहित किया जा रहा हो.
4. जहां विद्यार्थियों को कोई कार्य करने हेतु स्वतंत्रता दी जा रही हो.
5. जहां सभी विद्यार्थियों के समावेशन की बात की जा रही हो..
6. जहां कक्षा कक्षीय जीवन को वास्तविक जीवन से जोड़ा जा रहा हो.
7. जहां विद्यार्थियों में सृजनात्मकता एवं जिज्ञासा विकसित की जा रही हो.

सकारात्मक तथ्यों वाले ऑप्शंस के साथ ही आपको जाना है..

*विशेष - कुछ शब्द भी सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों होते हैं..
जैस - "प्रोत्साहित" एवं "हतोत्साहित"..
CTET के पेपर में कई सारे प्रश्नों में ये दोनों शब्द कई बार देखने को मिलेंगे..
प्रोत्साहित शब्द सकारात्मक है, जबकि हतोत्साहित शब्द नकारात्मक है.. बस आपको ध्यान ये रखना है कि ये किस अर्थ में प्रयुक्त हो रहे हैं..
(जैसे - या तो सही चीज को प्रोत्साहित किया जा रहा होगा या फिर सही चीज़ को हतोत्साहित.. या
गलत बात को प्रोत्साहित किया जा रहा होगा या गलत बात को हतोत्साहित) तो किस अर्थ में प्रयोग हो रहा है इनका.. ये ध्यान रखें..
और भी कई शब्द देखने को मिलेंगे जैसे - आंशिक, पूर्ण, केवल..
केवल शब्द का प्रयोग ज़्यादातर नकारात्मक अर्थ में ही प्रयोग होता है.. इस चीज का अवश्य ध्यान रखें.. फिर भी किस परिस्थिति में प्रयोग हो रहा है.. ये ध्यान अवश्य रखें.

* ऊपर बात हो चुकी है सकारात्मक एवं नकारात्मक तथ्यों की..
पूरा पेपर इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमेगा..
कई प्रश्न ऐसे होते हैं जिनमें ये पूछकर कन्फ्यूज किया जाता है।
कि कौनसा सही है कौनसा सही नहीं है...
या अलग तरीके से प्रश्न पूछा जाता है तो प्रश्न को ध्यान से पढ़ना है पहले कि पूछा क्या है.. ऑप्शंस पूरे पढ़ें क्योंकि कई बार गलत पूछा होता है और आपको पहला ही ऑप्शन सही लगता है और आप वहीं रूक जाते हैं.. तो इस चीज का ध्यान रखें...

*CTET में प्रेक्टिस ही काम आती है साथ ही में आपकी सकारात्मक सोच एवं आपका कॉमन सेंस..
*ऊपर लिखी बातों का अवश्य ध्यान रखें.. क्योंकि अधिकतर पेपर इन्हीं बिंदुओं के आसपास रहा होगा.. साथ ही में हर टीचिंग एग्जाम में ये तथ्य आपके काम आयेंगे.. इसलिए सही से नोट कर लें.. PRT.......✍️

13/06/2023
Photos from Master surya bhan study center's post 04/04/2023

GK.......

Photos from Master surya bhan study center's post 27/12/2021

Super tet,

Photos from Master surya bhan study center's post 26/12/2021

CTET...MATH

12/12/2021

EVS CTET KE BEST QUISTION NOTE 30 ME 30 15/15=30 PEDOLOGY/SUBJECTIVE

11/12/2021

के पॉजिटिव टैग वर्ड्स है, इनको याद कर लो
इनसे क्वेश्चन लगाने मे बहुत हेल्प मिलेगी
(CDP, MATH , HINDI EVS )
पॉजिटिव टैग वर्ड्स को लगाना आना चाहिए।
यहाँ से आप बहुत से क्वेश्चन बनेगे ओर आपकी हेल्प भी होगी।
आज से ही की पढ़ाई शुरु करे दें।

Photos from Master surya bhan study center's post 05/10/2021

Super tet

22/09/2021

Super tet......
1. वुड का घोषणा पत्र -1854

2. लार्ड मैकाले - 1835

3. कोठारी आयोग - 1964--1966

4. हण्टर आयोग (भारतीय शिक्षा नीति) - 1882

5. NCERT - 1961

6. SCERT - 1981

7.बेसिक शिक्षा परिषद - 1972

8. राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 1986

9. जिला शिक्षा प्राथमिक संघ - 1986-87

10. ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड - 1987-88

11. मिड डे मील (MDM) - 1995

12. स्कूल चलो अभियान - 1995-96

13. सर्व शिक्षा अभियान - 2000-01

14. निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा -2009

15. कस्तूरबा गांधी बालिका योजना - 2004

16. राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा रूपरेखा (NCF) - 2005 (UP में 2011 से लागू)

17. शिक्षा अधिकार अधिनियम - 2009 (लागू 1 अप्रैल 2010 )

18.इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय -1985 दिल्ली

19. राज्य शिक्षा संस्थान - 1964 इलाहाबाद

20. सर्वपल्ली आयोग - 1948

प्र 01-उ0प्र0 बेसिक शिक्षा अधिनियम कब बना?
उ0-1972
प्र02-उ0प्र0 बेसिक शिक्षा परिषद् का गठन कब हुआ?
उ0-25 जुलाई 1972
प्र03-कितने वर्ष बाद पाठ्यक्रम मे परिवर्तन किया जाता है?
उ0-5 वर्ष बाद।
प्र04-महात्मा गांधी ने बुनियादी तालीम/बेसिक शिक्षा प्रस्ताव कब रखा?
उ0-1937 मे
प्र05-ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड योजना क्या है?
उ0-प्राथमिक स्तर पर सभी बच्चों की शिक्षा मे एकरूपता हो(राष्ट्रीय शिक्षानीति 1986 के अनुसार) तथा विद्यालयों मे न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं सुलभ कराने की योजना है।
प्र06-उपरोक्त योजना कब शुरू की गयी थी?
उ0-1987 मे।
प्र07-पोषाहार वितरण योजना कब शुरू की गयी?
उ0-15 अगस्त 1995 मे
प्र08-जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम(DPEP) कब शुरू किया गया?
उ0-1993-1994
प्र09-सर्व शिक्षा योजना कब शुरू की गयी?
उ0-2000-2001
प्र010(अ)-उपरोक्त योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उ0-6-14 वर्ष तक के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करना।

प्र010(ब)प्राथमिक शिक्षा के संगठनात्मक ढांचा के अंतर्गत कार्यरत संस्थाओ के संक्षिप्त और विस्त्रत नाम यहां प्रस्तुत है।

अ)राष्ट्रीय स्तर पर-

1)NCERT-National council of educational research & training राष्ट्रिय शैक्षिक अनुसन्धान एवम् प्रशिक्षण परिषद्।

2)NUEPA- National University Of Educational Planning &Administration राष्ट्रिय शैक्षिक योजना एवम् प्रशासन विश्वविद्यालय

3)NCTE-National Council For Teacher Education राष्ट्रिय शिक्षक प्रशिक्षण परिषद्

NCERT के अधीन कार्यरत अन्य संस्थाए-

अ)KVS- Kendriya Vidyalya Sangthan केंद्रीय विद्यालय संगठन

ब)CBSE-Central Board Of Secondary Education केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

स)NVS-Navodaya Vidyalay Sangthan नवोदय विद्यालय संगठन

डी)CTSA-Central Tibetan Schools Administration केंद्रीय तिब्बतन विद्यालय प्रशाशन

NCERT की अन्य सहयोगी संस्थाए-

अ)NIE-National Institute Of Education राष्ट्रिय शैक्षिक संस्थान

ब) RIE-Regional Institute Of Education क्षेत्रीय शैक्षिक संस्थान

2-राज्य स्तर पर-

1)SCERT-State council of educational research & Training राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवम् प्रशिक्षण परिषद

2)SIEMAT-State Institute Of Educational Management & Training
राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवम् प्रशिक्षण संस्थान

3-जनपद स्तर पर -

अ)DIET-District Institute Of Education &Training
जिला शिक्षा एवम् प्रशिक्षण संसथान

ब)BRC-Block Resource Center
ब्लॉक संसाधन केंद्र

स)NPRC-Nyay Panchayat resource center
न्याय पंचायत संसाधन केंद्र

VEC-Village Education Committee
ग्राम शिक्षा समिति

SMC-School Management Committee
विद्यालय प्रबंधन समिति

MTA-Mother Teacher Association
मातृ शिक्षक संघ

PTA-Parents Teacher Association

प्र011.खेल खेल के लिए है यह कथन किसका है_ वैलेंटाइन
प्र012.बच्चों की पढाई आरम्भ करने की आदर्श आयु क्या होनीचाहिए_ 6वर्ष
प्र013.तीन से पांच वर्ष की आयु के बालकों को किस प्रकार की शिक्षा प्रदान की जाती है_अनौपचारिक
प्र014.खेल रचनात्मक एवं सृजनात्मक क्रियाओं का योग है किस मनोवैज्ञानिक ने कहा _नन ने
प्र015.किस विधि द्वारा बच्चों को आसानी से समझाकर पढ़ाया जा सकता है _ आगमन विधि
प्र016.विद्यालय मे खेलते हुए बच्चों मे क्या पाया जाता है _ सक्रियता
प्र017.खेलों का सर्बश्रेष्ठ योगदान किस अनुशाशन मे सहयोग देता है _ आत्म अनुशाशन
प्र018.क्रीड़ा संकुल के निर्माण की परिकल्पना कब प्रस्तुत की गयी_नयी शिक्षा नीति 1986 के तहत।
प्र019.शिशु के मस्तिष्क को कोरी स्लेट किसने माना है _ रुसो ने
प्र020.कितने %बच्चे तीव्र बुद्धि बच्चे होते है _ 16%
प्र-21 कौनसी अवस्था गोल्डन एज के नाम से जानी जाती है?
उ- किशोरावस्था ।
प्र-22 वैज्ञानिक दृष्टि से बालको की मनोविज्ञान का अध्ययन किस शाखा में किया जाता है?
उ0-बालमनोविज्ञान में ।
प्र02 3- बाल्यावस्था कब से कब तक होती है?
उ0-6 से 12 वर्ष ।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

Want your school to be the top-listed School/college in Allahabad?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Telephone

Website

Address


Allahabad