21/07/2025
UPSC GS PAPER 2
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा
क्या कहता है आर्टिकल 67(A)?
भारतीय संविधान का आर्टिकल 67 उपराष्ट्रपति के कार्यकाल और पद से हटने की प्रक्रिया को परिभाषित करता है. इसके खंड (A) के तहत राष्ट्रपति को लिखित रूप में उपराष्ट्रपति इस्तीफा सौंपकर स्वेच्छा से पद छोड़ सकता है.
खंड (B) में प्रावधान है कि उपराष्ट्रपति को राज्यसभा में बहुमत और लोकसभा की सहमति से प्रस्ताव पारित कर हटाया जा सकता है, बशर्ते 14 दिन का नोटिस दिया जाए.
धनखड़ ने अनुच्छेद 67(A) के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देने की बात कही.
इनसे पहले V V गिरी ने भी इस्तीफा दिया था
वीवी गिरी ने क्यों छोड़ा था पद?
भारत के संवैधानिक इतिहास में यह दूसरा मौका है जब संविधान के आर्टिकल 67(A) के तहत उपराष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया. इससे पहले 20 जुलाई 1969 को वीवी गिरी ने राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मृत्यु के बाद राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद छोड़ा था. गिरी बाद में भारत के राष्ट्रपति बने. वीवी गिरी का इस्तीफा एक महत्वपूर्ण मिसाल है क्योंकि उन्होंने राष्ट्रपति बनने की महत्वाकांक्षा के चलते पद छोड़ा था. जगदीप धनखड़ का मामला इससे अलग है. धनखड़ का निर्णय स्वास्थ्य आधारित है, न कि राजनीतिक.
यदि उपराष्ट्रपति बीच में इस्तीफा दे दे तब क्या स्थिति है
तो उपसभापति उनकी जगह काम करता है
उपराष्ट्रपति का मुख्य संवैधानिक कार्य राज्यसभा के सभापति के रूप में होता है. अगर उपराष्ट्रपति इस्तीफा देते हैं तो राज्यसभा के उपसभापति राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता करते हैं जब तक नया उपराष्ट्रपति न चुना जाए.
यदि उपसभापति भी अनुपस्थित हों, तो राज्यसभा के सदस्य किसी वरिष्ठ सदस्य को ‘पैनल ऑफ वाइस चेयरमेन’ में चुनकर अस्थायी अध्यक्ष बना सकते हैं.
जब उपराष्ट्रपति रहे कृष्णकांत का पद पर रहते हुए निधन हो गया
कृष्णकांत का पद पर रहते हुए वर्ष 2002 में निधन हो गया. तब वह उपराष्ट्रपति पद पर थे. 27 जुलाई 2002 को अचानक हृदयगति रुकने से उनका निधन हो गया था. तब वह अपने कार्यकाल के अंतिम कुछ सप्ताहों में थे. तब निधन के कारण उपराष्ट्रपति का पद अस्थायी रूप से रिक्त हो गया. नया चुनाव हुआ और भैरों सिंह शेखावत को उपराष्ट्रपति चुना गया.
फिर भैरोसिंह ने अपना कार्यकाल पूरा किया. उन्होंने जुलाई 2007 में राष्ट्रपति पद का चुनाव हारने के बाद उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि ये कार्यकाल के अंत में हुआ. फिर भी औपचारिक रूप से पद खाली हो गया. अन्य सभी उपराष्ट्रपतियों ने या तो अपना कार्यकाल पूरा किया या राष्ट्रपति बन गए.
क्या है भारत के उपराष्ट्रपति से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
भारतीय संविधान के भाग V के अध्याय I (कार्यपालिका) में भारत के उपराष्ट्रपति के पद का भी उल्लेख है। भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उनका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, लेकिन वे कार्यकाल की समाप्ति के बावजूद, तब तक पद पर बने रह सकते हैं जब तक कि उनका उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले।
भारत के उपराष्ट्रपति
भारत के उपराष्ट्रपति और संविधान
अनुच्छेद 63: भारत के उपराष्ट्रपति
अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होगा
अनुच्छेद 65: उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना या राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्तियों या अनुपस्थिति के दौरान उसके कार्यों का निर्वहन करना
अनुच्छेद 66: उपराष्ट्रपति का चुनाव
अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति का कार्यकाल
अनुच्छेद 68: उपराष्ट्रपति के पद की रिक्ति को भरने के लिए चुनाव कराने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि
अनुच्छेद 69: उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
अनुच्छेद 70: अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन
अनुच्छेद 71: राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित या उससे जुड़े मामले
अनुच्छेद 72: राष्ट्रपति की क्षमादान आदि देने और कुछ मामलों में सजा को निलंबित करने, माफ करने या कम करने की शक्ति
अनुच्छेद 73: संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार*
भारत के उपराष्ट्रपति से संबंधित जानकारी
भारत के उपराष्ट्रपति को हटाना
भारत के उपराष्ट्रपति
भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उनका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद, वे तब तक पद पर बने रह सकते हैं जब तक कि उनका उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले।
संविधान इस बारे में मौन है कि भारत के उपराष्ट्रपति के पद में, उनके कार्यकाल की समाप्ति से पहले, या जब उपराष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं, रिक्ति होने पर उपराष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन कौन करेगा। संविधान में एकमात्र प्रावधान राज्य सभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति के कार्य के बारे में है, जो ऐसी रिक्ति की अवधि के दौरान, राज्यसभा के उपसभापति या भारत के राष्ट्रपति द्वारा अधिकृत राज्यसभा के किसी अन्य सदस्य द्वारा किया जाता है।
उपराष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंपकर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। यह त्यागपत्र स्वीकार होने के दिन से प्रभावी हो जाता है।
उपराष्ट्रपति को राज्य सभा (राज्य सभा) के एक प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है, जिसे उस समय उसके सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाता है और लोक सभा (लोकसभा) द्वारा सहमति दी जाती है। इस प्रयोजन के लिए प्रस्ताव केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब इस आशय की कम से कम 14 दिन की सूचना दी गई हो
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
(1)राज्यसभा का सभापति तथा उपसभापति उस सदन के सदस्य नहीं होते हैं
(2) जबकि राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्यों को मतदान का कोई अधिकार नहीं होता, उनको उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में मतदान का अधिकार होता है
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
09/11/2024
UPSC MAINS GS PAPER TWO
BY AJAY KUMAR YADAV CONSTITUTION AND LEGAL EXPERT
ALIGARH MUSLIM UNIVERSITY की स्थापना उसका अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा तथा इससे संबंधित न्यायलय के निर्णय
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलेगा या नहीं, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों के बेंच पर छोड़ दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने ही 57 साल पुराने फैसले को पलटते हुए एएमयू के लिए फिर से अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा पाने का दरवाजा खोल दिया है. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने दिया है. इस बेंच में 7 जज शामिल थे जिसमें से 4 ने पक्ष में और 3 ने विपक्ष में फैसला सुनाया. इस फैसले को देते हुए मामले को 3 जजों की रेगुलर बेंच को भेज दिया गया है. अब नई बेंच जांच करेगी की एएमयू की स्थापना के पीछे किसका 'दिमाग' था, क्या अल्पसंख्यकों ने इसकी स्थापना की थी और उनका उद्देश्य क्या था? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर यह निर्धारित हो जाता है कि विश्वविद्यालय की स्थापना अल्पसंख्यक समुदाय ने की थी तो संस्थान अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक दर्जे का दावा कर सकता है.
दरअसल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 1875 में सर सैयद अहमद खान द्वारा 'Mohammedan Anglo-Oriental College' के रूप में की गई थी. बाद में, साल 1920 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और इसका नाम 'अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय' रखा गया. एएमयू अधिनियम 1920 में साल 1951 और 1965 में हुए संशोधनों को मिली कानूनी चुनौतियों ने इस विवाद को जन्म दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने बदला 57 साल पुराना फैसला
साल 1967 में अजीज बाशा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा था कि क्योंकि विश्वविद्यालय की स्थापना केंद्रीय कानून के तहत की गई थी, इसलिए इसे अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित नहीं कहा जा सकता था, इसलिए इस आधार पर इसे अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया गया.
1981 में मिला अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा
इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के अधिकारियों द्वारा विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 50% सीटें मुसलमानों के लिए आरक्षित करने के विवादास्पद कदम के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका और बाद में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई. देशभर में मुस्लिम समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किए जिसके चलते साल 1981 संसद में एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा देने वाला संशोधन हुआ.
2005 में अल्पसंख्यक का दर्जा हटा
साल 2005 में एएमयू के कुछ स्टूडेंट इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे, जिन्होंने मुस्लिमों को 75 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर सवाल खड़े किए थे. साल 2005 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1981 के एएमयू संशोधन अधिनियम को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रद्द कर दिया. 2006 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी. फिर 2016 में केंद्र ने अपनी अपील में कहा कि अल्पसंख्यक संस्थान की स्थापना एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के सिद्धांतों के विपरीत है. साल 2019 में तत्कालीन CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने मामले को सात जजों की बेंच के पास भेजा था, जिस पर आज फैसला आया है.
आइये जानते हैं अगर एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलता है तो क्या फायदा होगा?
अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त संस्थानों में दाखिला प्रक्रिया, मुस्लिम छात्रों के लिए अलग कोटा, कर्मचारियों की भर्ती से लेकर वित्तीय सहायता तक कई विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं. अगर एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किया जाता है तो उसे भी विशेषाधिकार मिलेंगे.
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में क्या दिशा-निर्देश लागू होते हैं?
i. प्रवेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा आयोजित कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर मेरिट के आधार पर किए जाएंगे.
ii. किसी पाठ्यक्रम में कुल स्वीकृत सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें अन्य समुदायों के उम्मीदवारों से भरी जाएंगी.
iii. शेष 50% सीटें कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर योग्यता के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवारों से भरी जाएंगी.
iv. अल्पसंख्यक समुदाय और अन्य समुदायों के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत सीटें फ्री सीटों और भुगतान सीटों में समान रूप से वितरित की जाएंगी और मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी.
v. सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित सीटों के सभी आरक्षण अल्पसंख्यक समुदायों के लिए उपलब्ध मुफ्त सीटों पर भी लागू होंगे.
vi. अल्पसंख्यक कोटे में खाली बची कोई भी सीट अन्य समुदायों के उम्मीदवारों से भरी जाएगी.
vii. सभी प्रवेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा आयोजित कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के अनुसार मेरिट के आधार पर किए जाएंगे. मेरिट सूची के बाहर कोई भी प्रवेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि सक्षम प्राधिकारी ऐसा करने की अनुमति न दे.
संस्थान स्थापना में आसानी: अल्पसंख्यक संस्थानों को स्थापित करने की प्रक्रिया सरल है. एनसीएमईआई संशोधन विधेयक अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार प्रदान करता है और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के लिए "नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट" प्राप्त करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है.
संबद्धता की अधिक स्वायत्तता: अल्पसंख्यक संस्थानों को छह निर्धारित विश्वविद्यालयों में से किसी एक से संबद्ध होने का अधिकार है.
वित्तीय सहायता
अल्पसंख्यक संस्थान स्व-वित्त पोषित या सरकारी सहायता प्राप्त हो सकते हैं. इसके अलावा, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास वित्त निगम (NMDFC) अल्पसंख्यक समुदायों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास वित्त निगम (एनएमडीएफसी) की स्थापना भारत सरकार द्वारा "अल्पसंख्यकों के आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान" प्रदान करने के लिए की गई थी. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत पांच समुदायों यानी मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी के लोगों को अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया गया है.
NMDFC का उद्देश्य गरीबी रेखा से दोगुने नीचे रहने वाले अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार के लिए रियायती वित्त प्रदान करना है. एनएमडीएफसी भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है. एनएमडीएफसी की अधिकृत शेयर पूंजी 500 करोड़ रुपये है. चुकता शेयर पूंजी (31/03/2003 तक) 318.21 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 258.42 करोड़ रुपये भारत सरकार द्वारा और 59.79 करोड़ रुपये विभिन्न राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन द्वारा दिए गए हैं.
इन विशेषाधिकारों के बावजूद, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को भी कुछ नियमों और विनियमों का पालन करना होता है, जैसे कि मानक शिक्षा प्रदान करना और छात्रों के कल्याण का ध्यान रखना.
29/08/2023
राष्ट्रीय खेल दिवस
राष्ट्रीय खेल दिवस को भारत में प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करने के रूप में आयोजित किया जाता है, जिनका जन्म वर्ष 1905 में इसी तारीख को हुआ था।
प्रमुख बिंदु:
परिचय:
इस दिन को पहली बार वर्ष 2012 में भारत के राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में नामित कर मनाया गया।
यह दिवस देश महान खिलाडियों को सम्मान स्वरुप याद करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
देश के राष्ट्रपति इस अवसर पर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार और ध्यानचंद पुरस्कार जैसे खेल पुरस्कार प्रदान करते हैं।
महत्त्व:
राष्ट्रीय खेल दिवस का प्राथमिक उद्देश्य खेल के महत्त्व के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना और दैनिक जीवन में शारीरिक रूप से सक्रिय रहना है।
भारत सरकार राष्ट्रीय खेल दिवस के महत्त्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों और सेमिनारों आदि का आयोजन करती है।
मेजर ध्यानचंद:
मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी के जादूगर' के रूप में जाना जाता है तथा इनका जन्म 29 अगस्त, 1905 को उत्तर प्रदेश के वर्तमान प्रयागराज में हुआ था।
इन्होंने ओलंपिक खेलों में सेंटर फॉरवर्ड खिलाड़ी की भूमिका में वर्ष 1928 में एम्स्टर्डम, 1932 में लॉस एंजिल्स और 1936 में बर्लिन में स्वर्ण पदक जीता।
वह पहली भारतीय विदेशी सेना टीम के सदस्य थे जिसने वर्ष 1926 में न्यूज़ीलैंड का दौरा किया था।
मेजर ध्यानचंद ने 1926 से 1948 तक अपने करियर में 400 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय गोल किये और अपने पूरे करियर में लगभग 1,000 गोल किये।
भारत सरकार ने वर्ष 2012 में ऐसे महान खिलाड़ी को श्रद्धांजलि देने के लिये उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया।
इस मान्यता से पहले, उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 1956 में भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
उन्होंने 3 दिसंबर, 1979 को दिल्ली में कोमा में जाने के बाद अंतिम सांस ली।
13/06/2023
दिल्ली सरकार के लिए केंद्र का अध्यादेश
एक बार दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में फिर टकराव
Paper 2
राजव्यवस्था के लिए अति महत्वपूर्ण टॉपिक
संदर्भ:
केंद्र सरकार ने उपराज्यपाल (एलजी) को दिल्ली के प्रशासक के रूप में नामित करने के लिए एक अध्यादेश लाया, जिसका दिल्ली सरकार की सेवा करने वाले सभी नौकरशाहों की पोस्टिंग और स्थानांतरण पर निर्णय अंतिम होगा।
मुख्य बिंदु:
अध्यादेश दिल्ली अधिनियम, 1991 के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) की सरकार में संशोधन करना चाहता है और 11 मई के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रभावी रूप से नकारता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दिल्ली सरकार को कानून बनाने और दिल्ली सरकार में प्रतिनियुक्त नौकरशाहों पर नियंत्रण रखने की शक्ति दी थी।
मामले की पृष्ठभूमि:
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच विवाद की सुनवाई कर रही थी जो दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) में स्थानान्तरण और प्रशासनिक सेवाओं के समग्र कामकाज पर नियंत्रण से संबंधित मामलों पर था।
11 मई, 2023 को पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (NCTD) में सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के संबंध में प्रशासनिक सेवाओं पर विधायी और कार्यकारी नियंत्रण होगा।
अब, केंद्र एक अध्यादेश लाया है जो SC के आदेश को रद्द करता है।
अध्यादेश में क्या लिखा है?
अध्यादेश में साफ तौर पर लिखा है कि दिल्ली यूनियन टेरिटरी है, लेकिन विधायिका के साथ. दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थान और अथॉरिटीज काम कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट समेत कई संवैधानिक संस्थाएं हैं, विदेशी और तमाम ऑफिस हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है।
इस विवाद को किसने जन्म दिया?
अनुच्छेद 239AA को 69 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1991 द्वारा संविधान में शामिल किया गया था।
एस बालकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर इसने दिल्ली को विशेष दर्जा दिया।
इसमें कहा गया है कि दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) में एक प्रशासक और एक विधान सभा होगी।
विधान सभा के पास राज्य सूची या समवर्ती सूची में से किसी भी मामले में NCT के पूरे या किसी भी हिस्से के लिए कानून बनाने की शक्ति होगी, जहां तक ऐसा कोई माम
11/06/2023
भारत के अपवाह तंत्र का विस्तृत अध्ययन
Detail Explanation on Drainage Pattern by MANU IAS / अपवाह तन्त्र पर पूरी जानकारी
प्यारे मित्रों इस वीडियो को देखने के बाद आपको गंगा नदी तंत्र से संबंधित पुस्तक पढ़ने की आवश्यकता नही हैMANU IAS ACADEMY(Aligarh) (Mob-8...
11/06/2023
माननीय जिलाधिकारी श्रीमान मनीष बंसल जी के द्वारा आईटीआई चंदौसी का निरीक्षण किया गया इस दौरान उपस्थित रहे