15/11/2025
R.P.S Educational academy Aunchha
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15/11/2025
दीपकों की तरह जगमगाते हुए RPS के प्यारे बच्चो,
आप सब विद्यालय की असली रोशनी हो।
दीपावली का पावन पर्व है — यह त्यौहार खुशियों, प्रेम और एकता का प्रतीक है।
ध्यान रखें प्यारे बच्चो —
पटाखे बहुत कम से कम चलाएँ, क्योंकि असली उजाला दिलों की मुस्कान से होता है।
दीप जलाएँ, मिठाइयाँ बाँटें, माता लक्ष्मी व भगवान गणेश की पूजा करें,
बड़ों का आशीर्वाद लें और अपने परिवार व दोस्तों के साथ प्रेम से रहें।
RPS Family की ओर से सभी प्यारे विद्यार्थियों और आदरणीय अभिभावकों को
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपका जीवन सदा दीपों की तरह जगमगाता रहे और खुशियों से भरा रहे। ✨🪔
– Director: Ashish Kumar
RPS Educational Academy
प्रिय अभिभावकगण,
हमें यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि आपके बच्चे विद्यालय में न केवल शिक्षा में बल्कि अनुशासन, व्यवहार और रचनात्मक गतिविधियों में भी उत्तम प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका उज्ज्वल भविष्य गढ़ने में आपका योगदान सराहनीय है।
बच्चों की मुस्कान, उनकी जिज्ञासा और सीखने की लगन हमारे विद्यालय का सबसे बड़ा प्रेरणास्त्रोत है। हमें गर्व है कि हमारे विद्यालय में ऐसे होनहार और संस्कारी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
आपके विश्वास और सहयोग के लिए हम हृदय से आभारी हैं। आइए, हम सब मिलकर बच्चों के सपनों को साकार करने की इस यात्रा को और भी सुंदर बनाएं।
सादर,
आपका विद्यालय परिवार
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आज बच्चों को मूक ड्रिल (Mock Drill) के बारे में बताया गया — कैसे इससे बचाव करना है
आज RPS Educational Academy, मैनपुरी रोड, औंछा में बच्चों को मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा से बचाव की जानकारी दी गई। उन्हें सिखाया गया कि भूकंप, आग या अन्य आपात स्थितियों में कैसे सुरक्षित रहना है। बच्चों को सावधानी बरतने, शांत रहने और स्कूल के दिशा-निर्देशों का पालन करने के महत्व को समझाया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य बच्चों में आपदा के समय आत्म-रक्षा की भावना विकसित करना था।
26/04/2025
मैनपुरी - RPS Educational Academy में श्रद्धांजलि सभा मैनपुरी - RPS Educational Academy में श्रद्धांजलि सभा
24/03/2025
आज कक्षा 8 का सत्र पूर्ण होने पर RPS Educational Academy, औंछा में विशेष समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर निदेशक श्री अशीष कुमार यादव द्वारा कक्षा 8 के विद्यार्थियों को उपहार भेंट किए गए। साथ ही, स्कूल स्टाफ द्वारा तिलक एवं माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना कर छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना की गई।
विद्यालय परिवार सभी विद्यार्थियों को उनके आगामी सफर के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देता है।
22/03/2025
आर.पी.एस. – क्षेत्र का शीर्ष स्कूल
शिक्षा की नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ने का सुनहरा अवसर!
25 मार्च से 5 अप्रैल तक प्रवेश शुल्क पूरी तरह निःशुल्क।
अपने बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए आज ही नामांकन कराएं।
RPS Educational Academy, Aunchha – जहां अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है हमारी पहचान!
22/03/2025
RPS Educational Academy सिर्फ दिखावे पर नहीं, बल्कि अनुशासन और पढ़ाई पर पूरा ध्यान देता है। यह क्षेत्र के टॉप स्कूलों में से एक है, जहाँ हर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जाती है।
☎️ 9720870546
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🌟 RPS Educational Academy, Aunchha में प्रवेश प्रक्रिया जारी है! 🌟
✅ नर्सरी से कक्षा 8 तक प्रवेश खुले हैं
✅ अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आदर्श केंद्र
✅ हर बच्चे का सर्वांगीण विकास हमारा लक्ष्य
✅ अनुभवी शिक्षकों द्वारा आधुनिक शिक्षण पद्धति
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📍 स्थान: RPS Educational Academy, Mainpuri Road, Aunchha
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19/03/2025
RPS Educational Academy सिर्फ दिखावे पर नहीं, बल्कि अनुशासन और पढ़ाई पर पूरा ध्यान देता है। यह क्षेत्र के टॉप स्कूलों में से एक है, जहाँ हर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जाती है।
"बच्चो को अनुशासित व संस्कारवान बनाए"
*"अभिभावक बच्चों को स्कूल में शिक्षक द्वारा डांटने पीटने पर बुरा ना माने , ये बात समझे कि बच्चे की स्कूल में पिटाई अंत में पुलिस की पिटाई ठुकाई से अच्छी है,"*
अनुशासन के लिए प्रसिद्ध स्कूलों में विद्यार्थियों के हेयर स्टाइल और उनकी चाल-ढाल को लेकर चाहे कितनी भी सख़्ती की जाए, उनके व्यवहार में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। शिक्षक निराश होकर केवल देखते रह जाते हैं, लेकिन कुछ नहीं कर पाते।
यदि माता-पिता का बच्चों पर ध्यान और नियंत्रण कम हो जाए, तो वे इस प्रकार के व्यक्तियों में तब्दील हो जाते हैं।
अनुशासन केवल बातों से नहीं आता; थोड़ा डर और सजा भी जरूरी है।
बच्चों को स्कूल में डर नहीं है,
घर लौटने पर भी डर नहीं है,
इसीलिए समाज आज भयभीत हो रहा है।
वही बच्चे आज गुंडे बनकर लोगों पर हमला कर रहे हैं।
उनके व्यवहार से कई लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
उसके बाद वे पुलिस के हाथ लगते हैं और अदालत में सजा पाते हैं।
*“गुरु का सम्मान न करने वाला समाज नष्ट हो जाता है।”*
*"यह सत्य है"*
गुरु का न भय है, न सम्मान। ऐसे में पढ़ाई और संस्कार कैसे आएंगे?
“मत मारो! मत डांटो! जो खुद नहीं पढ़ना चाहता उससे क्यों सवाल करो? यदि पढ़ने पर जोर दिया गया या काम कराया गया तो गलती शिक्षकों की होगी!”
पांचवीं कक्षा से ही अजीब हेयर स्टाइल, कटे हुए जींस, दीवारों पर बैठना और आते-जाते लोगों का मजाक उड़ाने की आदत बन जाती है।
यदि कोई कहे, “अरे सर आ रहे हैं!” तो जवाब होता है, “आने दो!”
कुछ माता-पिता तो यहां तक कहते हैं, “हमारा बच्चा न भी पढ़े तो कोई बात नहीं, लेकिन शिक्षक उसे मारें नहीं।”
जब उनसे पूछा जाता है कि “आपके बाल किसने काटे?” तो जवाब आता है, “हमारे पापा ने करवाया ऐसे, सर।”
बच्चों के पास पढ़ाई का सामान नहीं होता। पेन हो तो किताब नहीं, किताब हो तो पेन नहीं।
बिना डर के शिक्षा कैसे संभव है?
बिना अनुशासन के शिक्षा का कोई परिणाम नहीं।
आज के बच्चों का व्यवहार भी ऐसा ही हो गया है।
स्कूल में गलती करने पर सजा नहीं दी जा सकती, डांटा नहीं जा सकता, यहां तक कि गंभीरता से समझाया भी नहीं जा सकता।
आज के माता-पिता चाहते हैं कि सबकुछ दोस्ताना माहौल में कहा जाए।
क्या यह संभव है?
क्या समाज भी ऐसा करता है?
पहली गलती करने पर क्षमा करता है?
अब शिक्षकों के अधिकार नहीं बचे हैं।
*यदि शिक्षक सीधे बच्चे को सुधारने की कोशिश करें, तो वह अपराध बन जाता है।*
*लेकिन वही बच्चा बड़ा होकर गलती करे तो उसे मृत्युदंड तक दिया जा सकता है।*
माता-पिता से एक विनती:
बच्चों के व्यवहार को सुधारने में शिक्षक मुख्य भूमिका निभाते हैं।
कुछ शिक्षकों की गलती के कारण सभी शिक्षकों का अपमान न करें।
95% शिक्षक केवल बच्चों के अच्छे भविष्य की कामना करते हैं।
यह सच है।
इसलिए आगे से हर छोटी गलती के लिए शिक्षकों पर आरोप न लगाएं।
हम जब पढ़ते थे, तब कुछ शिक्षक हमें मारते थे।
लेकिन हमारे माता-पिता स्कूल आकर शिक्षकों से सवाल नहीं करते थे।
वे हमारे कल्याण पर ही ध्यान देते थे।
पहले माता-पिता बच्चों को गुरु के महत्व को समझाने की जिम्मेदारी उठाएं।
बच्चों के भविष्य के बारे में एक बार सोचें।
बच्चों की बर्बादी के 60% कारण हैं – दोस्त, मोबाइल और मीडिया।
लेकिन बाकी 40% कारण माता-पिता ही हैं!
अत्यधिक प्रेम, अज्ञानता और अंधविश्वास बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं।
आज के 70% बच्चे –
👉 माता-पिता यदि कार या बाइक साफ करने को कहें तो नहीं करते। ओर बिना प्रयोजन की चीजें वो भी महंगी खरीदने की जिद करते हैं,
👉 बाजार से सामान लाने के लिए तैयार नहीं होते। अब तो ऑनलाइन ही मंगा लेते हैं। खरीददारी का तजुर्बा भी नहीं है।
👉 स्कूल का पेन या बैग सही जगह नहीं रखते।
👉 घर के कामों में मदद नहीं करते। और टीवी में कुछ से कुछ देखते रहते हैं।
👉 रात 10 बजे तक सोने की आदत नहीं और सुबह 6-7 बजे जागते नहीं।
👉 गंभीर बात कहने पर पलटकर जवाब देते हैं।
👉 डांटने पर चीजें फेंक देते हैं।
👉 पैसे मिलने पर दोस्तों के लिए खाना, आइसक्रीम और गिफ्ट्स पर खर्च कर देते हैं।
👉 नाबालिग लड़के बाइक चलाते हैं, दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं और केस में फंस जाते हैं।
👉 लड़कियां दैनिक कार्यों में मदद नहीं करतीं।
👉 मेहमानों के लिए पानी का गिलास तक देने का मन नहीं होता।
👉 20 साल की उम्र में भी कुछ लड़कियों को खाना बनाना नहीं आता।
👉 सही ढंग से कपड़े पहनना भी एक चुनौती बन गया है।
👉 फैशन, ट्रेंड और तकनीक के पीछे भाग रहे हैं।
इस सबका कारण हम ही हैं।
हमारा गर्व, प्रतिष्ठा और प्रभाव बच्चों को जीवन के पाठ नहीं सिखा पा रहे हैं।
“कष्ट का अनुभव न करने वाला व्यक्ति जीवन के मूल्य को नहीं समझ सकता।”
आज के युवा 15 साल की उम्र में प्रेम कहानियों, धूम्रपान, शराब, जुआ, ड्रग्स और अपराध में लिप्त हो रहे हैं।
दूसरे आलसी बनकर जीवन का कोई लक्ष्य नहीं रखते।
बच्चों का जीवन सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
यदि हम सतर्क नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी।
बच्चों के भविष्य और उनके अच्छे जीवन के लिए हमें बदलना होगा।
🙏 इस संदेश को पढ़ने वाले सभी लोग इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ साझा करें।
“मुझे नहीं लगता कि हर कोई बदलेगा…
लेकिन मुझे भरोसा है कि कम से कम एक व्यक्ति तो बदलेगा।”
*शिक्षक दया कर सकते हैं पुलिस नहीं*
*"पुलिस कि ठुकाई पिटाई और बाद में कोर्ट कचहरी तक पैसे खर्च होते हैं, शिक्षक की डाट डपट पर कोई खर्चा नहीं होता ।"
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