08/04/2026
मुंबई में गूंजा निषाद राज का जयघोष: आगरा के समाजसेवी ने समाज की एकता और शिक्षा पर दिया जोर
मुंबई। मायानगरी मुंबई के विभिन्न कोनों से पधारे निषाद समाज के हजारों लोगों के बीच महाराज गुहराज निषाद जयंती का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ताजनगरी आगरा से पधारे प्रमुख समाजसेवी और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि ने समाज के उत्थान के लिए शिक्षा और संगठित शक्ति को अनिवार्य बताया।
दूरी मीलों की, पर दिल एक हैं
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ता ने आगरा और मुंबई के संबंधों को जोड़ते हुए कहा, "भले ही आगरा से मुंबई की दूरी सैकड़ों मील की है, लेकिन जब बात हमारे समाज के गौरव और एकता की आती है, तो हमारे दिल एक साथ धड़कते हैं।" उन्होंने भगवान श्री राम और केवट राज के अटूट प्रेम और समर्पण को याद करते हुए समाज को उनके मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
शिक्षा और राजनीति में भागीदारी की अपील
समाज के भविष्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने दो मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया:
आधुनिक शिक्षा: उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों को केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development) की ओर भी प्रेरित करना होगा।
संगठन की शक्ति: उन्होंने समाज के लोगों से व्यापार और राजनीति के हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा, "जब तक हम संगठित नहीं होंगे, तब तक हम अपने अधिकारों की आवाज मजबूती से नहीं उठा पाएंगे।"
वर्षों का सेवा संकल्प
पिछले कई वर्षों से समाज सेवा में समर्पित रहने की बात दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वे यहाँ एक नेता के रूप में नहीं बल्कि एक 'सेवादार' के रूप में आए हैं। उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को साझा करते हुए सभी कर्मठ साथियों के साथ मिलकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने का संकल्प लिया।
जोश और उत्साह के साथ समापन
मुंबई के निषाद समाज की ऊर्जा की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि अब समाज को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। भाषण का समापन उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियों "लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती" के साथ किया, जिससे पूरा सभागार 'जय निषाद राज' के नारों से गूंज उठा।
इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्यों सहित समाज के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे!