राजपूत योद्धा बन्दा सिंह बहादुर 👑🚩
एक राजपूत योद्धा जिन्होंने प्रथम सिख साम्राज्य की नीव रखी, ये पंजाब के पहले ऐसे सेनापति थे जिन्होंने मुगलो के अजय होने का भ्रम तोडा...
सिरहिन्द, जहाँ गुरु गोविन्दसिंह के छोटे बच्चों को दीवार में चुनवाया गया था, पर धावा बोलकर उसने तहस नहस कर दिया। इस्लाम के लड़ाके जो अकड़ कर चलते थे - दुम दबाकर भाग गए। बच्चों का बदला लिया, बंदा ने गढ़ी पर अचानक साहसी हमला किया जहाँ गुरु गोविन्दसिंह से दग़ा करनेवाला अली हसन और गुरु तेग़ बहादुर को मारनेवाले जलालुद्दीन को खत्म कर सिखों के गुरुओ का बदला लिया, ऐसे ही इस राजपूत योद्धा अकेले के सिखों पर एकतरफ़ा सेकड़ो अहसान है...
बंदा सिंह बहादुर ने पूरे पंजाब में घूम घूम कर मुस्लिम सेनाओं को परास्त किया, विशाल इलाकों को मुस्लिम दासता से छुड़ा लिया गया, इनकी सेना में ज्यादातर राजपूत योद्धा थे जो गुरिल्ला दाव पेंच की जगह " सीधा घर में घुस के मारो " वाली नीति को मानते थे जो कि बहुत कारगर साबित हुआ अफवाहें फ़ैल गईं कि उसे दैवी शक्तियाँ प्राप्त हैं। हिन्दू विस्मय से भर जाते और कानाफूसी करते कि यह तांत्रिक कहीं भगवान का अवतार तो नहीं? बंदा सिंह एक ही वार में सेनिको को पूरा चीर देते थे... एक ब्राह्मण ने शिकायत की, कि एक गिरोह हिन्दू लड़कियों को उठा ले जाता है, बंदा की नज़रों में चढ़ गया। बंदा सिंह ने उसे आग में भुनवा दिया। यह ग़ोरी और बाबर की मुस्लिम हमलावर नीति थी, जो बंदा उन्हें ब्याज सहित लौटा रहा था..
लेकिन आप जानते हैं बंदा सिंह बहादुर हारे कैसे ?? किसने हुकुम नामा जारी किया था कि सिख सैनिक बंदा बहादुर से संबंध विच्छेद कर ले, क्यों बाबा बंदा बहादुर सिंह के सैनिकों का एक बडा भाग उनसे पृथक हो गया जो ततत खालिसा कहलाए। वह जगीरे ले कर मुगल सेना मै शामिल हो गए। किसके आदेश का पालन करते हुए बन्दा के सिख सैनिकों ने उससे मुंह मोड़ लिया। जो वफादार लोग बलिदान देने के लिए बन्दा के साथ रहे वह बंदई खालसा कहलाये, इन्ही बंदई खालसा को गद्दारों द्वारा पकड़ाए जाने के बाद बंदा सिंह बहादुर के साथ धर्म परिवर्तन के लिए मुग़लो ने मजबूर किया न मानने पर यातनाएं देकर मार दिया...
जिनके 4 साल के मासूम बेटे को उनकी आँखों के सामने मारकर उसका कलेजा मुँह में ठूंसा गया और फिर उनकी आँखों में गरम सलाखें घोंप कर हत्या कर दी गई उन बाबा बंदा सिंह बहादु
Rajput Student Youth Organization-RSO
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सेवा।समर्पण।। संस्कार।। प्यार। स्नेह,।।आशीर्वाद।।।
जय प्रताप। जय भवानी।। जय राजपूत।।
कुँँ.दशरथ सिंह सकराय संस्थापक अध्यक्ष, कुँँ. महेंद्र सिंह मालास महासचिव, स्था. 15/09/1994 राजपूत युवा छात्र शक्ति का प्रथम पंजीकृत संस्थान।
05/06/2026
भारत मां के सपूत,सनातन रक्षक,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी को जन्म दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाए...
20/05/2026
परमवीर चक्र हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत को जयंति पर नमन.वंदन...
20/05/2026
भारत-पाक युद्ध में अदम्य शौर्य, साहस एवं पराक्रम का परिचय देने वाले मां भारती के वीर सपूत, परमवीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद मेजर पीरू सिंह शेखावत जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
20/05/2026
*परमवीर चक्र हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत : अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति के अमर प्रतीक*
*डाॅ.दशरथ सिंह सकराय*
*भारतभूमि वीरों की भूमि रही है। इस धरा ने ऐसे अनेक रणबांकुरे जन्मे हैं जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हीं अमर वीरों में एक नाम है — हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत। उनकी जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की प्रेरणा का पावन अवसर है।*
हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत का जन्म 20 मई 1918 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रामपुरा बेरी ग्राम में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें साहस, अनुशासन और देशसेवा की भावना विद्यमान थी। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े पीरू सिंह कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ निश्चयी और परिश्रमी रहे।
देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर वे भारतीय सेना में भर्ती हुए और अपनी बहादुरी, नेतृत्व क्षमता तथा कर्तव्यपरायणता के कारण शीघ्र ही सैनिक साथियों के बीच सम्मानित हो गए।
1948 का भारत-पाक युद्ध और वीरता
सन् 1948 में जम्मू-कश्मीर में भारत-पाक युद्ध के दौरान पीरू सिंह शेखावत ने अद्भुत शौर्य का परिचय दिया। वे भारतीय सेना की 6 राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। 18 जुलाई 1948 को तिथवाल क्षेत्र में दुश्मनों के मजबूत मोर्चों पर कब्जा करने का कठिन दायित्व उनकी टुकड़ी को सौंपा गया।
दुश्मन की ओर से भारी गोलीबारी और बमबारी हो रही थी। अनेक सैनिक घायल हो गए, किंतु पीरू सिंह ने हार नहीं मानी। वे अकेले ही दुश्मन की मशीनगन चौकियों की ओर बढ़ते रहे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कई दुश्मन सैनिकों को मार गिराया।
जब उनके शरीर से रक्त बह रहा था और अंतिम क्षण निकट थे, तब भी वे “राजपूताना की जय” और “भारत माता की जय” का उद्घोष करते हुए दुश्मन की अंतिम चौकी तक पहुँच गए और उसे नष्ट कर दिया। इसी दौरान वे वीरगति को प्राप्त हुए।
उनकी इस असाधारण वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से अलंकृत किया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
पीरू सिंह शेखावत का जीवन आज के युवाओं के लिए एक महान प्रेरणा है। उनका संदेश स्पष्ट है कि राष्ट्र सर्वोपरि है और कर्तव्य के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों से कभी घबराना नहीं चाहिए
16/05/2026
आरएसओ पूर्व जिलाध्यक्ष, भाजपा अजमेर देहात जिला उपाध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह सा चुंडावत (सावा खेडा) आपनै आपरै जन्म दिवस सारू घणी घणी शुभकामना..
#डाॅ.दशरथ सिंह सकराय,महेंद्र सिंह मालास,एडवोकेट निहाल सिंह शेखावत, गजेंद्र सिंह रामपूरा, बहादुर सिंह सनोद,गजेन्द्र सिंह देवड़ा,भंवर विजेंद्र सिंह बोबासर, लोकेंद्र सिंह रामसरी,
15/05/2026
राव दादा जी मूर्ति अनावरण पर भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी का ओजस्वी भाषण
14/05/2026
#मारवाड की पावन धरा बालोतरा के ग्राम जागसा निवासी आदरणीय डॉ. मदन सिंह सा राठौड़ को महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय का कुलगुरु (कुलपति) नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
आपकी विद्वता, शैक्षणिक अनुभव एवं नेतृत्व क्षमता निश्चित रूप से विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परमपिता परमेश्वर और मां भवानी दूर्गा आपके उज्ज्वल, सफल एवं प्रेरणादायी कार्यकाल की प्रार्थना करते है।
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