26/08/2025
*📖 एक बैठक में मुकम्मल हिफ़्ज़े क़ुरआन की सआदत
दारुलउलूम शैख अहमद खट्टो, में लगातार तीन साल से हर साल अलग-अलग खुश नसीब तालिबे इल्म को यह एजाज़ हासिल हो रहा है।
इस साल यह अज़ीम सआदत दारुलउलूम के बा-सलाहियत तालिबे इल्म हाफ़िज़ मुहम्मद अरशद रज़ा बिन मुहम्मद नासिर हुसैन (अहमद आबाद, गुजरात) के हिस्से में आई।
🗓️ तारीख: 23 अगस्त 2025 🏢 मक़ाम: दारुलउलूम शैख अहमद खट्टो, सरखेज़, अहमद आबाद (गुजरात, भारत)
अल्लाह तआला का बेपनाह फ़ज़्ल व करम है कि दारुलउलूम शैख अहमद खट्टो, सरखेज़, अहमद आबाद में पिछले तीन सालों से लगातार यह मुबारक सिलसिला क़ायम है कि हर साल एक हुनहार तालिबे इल्म ने एक बैठक में मुकम्मल क़ुरआन करीम सुनाने की सआदत हासिल की। इस साल यह अज़ीम सआदत दारुलउलूम के बा-सलाहियत तालिबे इल्म हाफ़िज़ मुहम्मद अरशद रज़ा बिन मुहम्मद नासिर हुसैन (अहमद आबाद, गुजरात) के हिस्से में आई, जिन्होंने अपने उस्ताद-ए-मुकर्रम हज़रत हाफ़िज़ व क़ारी मुहम्मद रहबर-ए-इस्लाम रिज़वी साहब की निगरानी में एक बैठक में मुकम्मल क़ुरआन करीम सुनाया।
मोसूफ़ ने यह सआदत सुबह 07:42 बजे से शाम 05:30 बजे तक अपने हुस्न-ए-हिफ़्ज़ (अच्छी याददाश्त) और अल्लाह की ख़ास मदद से हासिल की।
✨ सिलसिला-ए-हिफ़्ज़े क़ुरआन की बरकत
क़ुरआन करीम की हिफ़ाज़त व सियानत का यह मुबारक सिलसिला ज़माना-ए-नबवी ﷺ से आज तक तसल्सुल के साथ जारी है। हर दौर में हज़ारों और लाखों हुफ़्फ़ाज़े-किराम पैदा हुए और क़यामत तक यह सिलसिला इंशाअल्लाह जारी रहेगा। लेकिन यह सआदत हर किसी को नसीब नहीं होती कि वह एक ही बैठक में मुकम्मल क़ुरआन करीम सुनाने की तौफ़ीक़ हासिल करे।
🌹 सरपरस्त व इंतज़ामिया की सरपरस्ती
यह अज़ीम-उश्शान कामयाबी हुज़ूर शेखुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन हज़रत अल्लामा मौलाना सय्यद मुहम्मद मदनी अशरफ़ अल-अशरफ़ी अल-जीलानी (सरपरस्त-ए-आला दारुलउलूम) की रूहानी सरपरस्ती, मुफ़्ती-ए-आज़म गुजरात हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद शब्बीर अहमद सिद्दीकी (क़ाज़ी-उल-क़ुज़्ज़ात इदारा-ए-शरईया सूबा गुजरात, नाज़िम-ए-आला दारुलउलूम) की हुस्ने निज़ामत, और शेखुल-हदीस हज़रत अल्लामा व मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद फ़ारूक़ आज़म शम्सी साहब क़िब्ला की हुस्ने सदारत और हाफ़िज़ व क़ारी मौलाना मुहम्मद हारून अहमद सिद्दीक़ी (वाइस चेयरमैन दारुलउलूम) की शानदार क़ियादत में मुमकिन हुई।
🌸 अज़ीम शख्सियात की मौजूदगी
इस मुबारक मौके पर दारुलउलूम के मुश्फ़िक़ व मुरब्बी असातिज़ा-ए-किराम ख़ुसूसन:
नायब शेखुल-हदीस हज़रत अल्लामा व मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद वली असग़र वहीदी शम्सी साहब क़िब्ला ने हाफ़िज़ मुहम्मद अरशद रज़ा को ख़ुसूसी मुबारकबाद पेश की और फ़रमाया कि: “जिस घर का बच्चा हाफ़िज़े क़ुरआन बन जाता है, उसके वालिदैन के लिए जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं। यह सआदत अल्लाह सिर्फ़ उन्हीं को अता करता है जिन्हें वह चुनता है।”
असातिज़ा और कमेटी की जानिब से हौसला-अफ़ज़ाई
इस मौके पर दारुलउलूम के दूसरे मुअज्ज़ज़ असातिज़ा-ए-किराम:
हज़रत हाफ़िज़ व क़ारी मुहम्मद शम्स तबरेज़ नअीमी, मौलाना मुहम्मद ज़हूर अहमद अशरफ़ी, हाफ़िज़ व क़ारी मौलाना मुहम्मद इम्तियाज़ आलम अशरफ़ी, मौलाना मुहम्मद अकील अहमद मिसबाही, मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद नासिर रज़ा नअीमी, मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद अक़दस रज़ा मंज़हरी, हाफ़िज़ व क़ारी मुहम्मद मुनाज़िर हुसैन वारिसी, मौलाना मुहम्मद मुस्तक़ीम अशरफ़ी स़क़ाफी अहमदी, मौलाना मुफ़्ती ग़ुलाम अनवर अशरफ़ी अहमदी मरकज़ी
और दूसरे असातिज़ा व तलबा मौजूद थे।
सभी हज़रात ने उस्ताद और शागिर्द की गुलपोशी की, तोहफा पेश किए और उनके रोशन मुस्तक़बिल के लिए दुआएं कीं।
💐🤲 दुआओं के साथ इख़्तिताम
असातिज़ा-ए-किराम और ज़िम्मेदारान-ए-दारुलउलूम ने फ़रमाया कि तालिबे इल्म की कामयाबी में उस्ताद और वालिदैन दोनों का अज़ीम किरदार होता है। क़ुरआन हिफ़्ज़ करना महज़ मेहनत से नहीं बल्कि अल्लाह की ख़ास इनायत से मुमकिन होता है।
अल्लाह तआला हाफ़िज़ मुहम्मद अरशद रज़ा के हिफ़्ज़े-क़ुरआन को हमेशा क़ायम व दायम रखे, उनके इल्म व अमल में बरकत अता फरमाए और वालिदैन व असातिज़ा के लिए सदक़ा-ए-जारिया बनाए। आमीन।
✍️ : मुहम्मद इम्तियाज़ आलम अशरफ़ी ख़ादिम: दारुलउलूम शेख अहमद खट्टो, सरखेज़, अहमद आबाद