बापू के बच्चे नही रहते कच्चे

बापू के बच्चे नही रहते कच्चे

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नजरो से व़ोह निहाल हो जाते है जो ब्रह्मज्ञानी की शरण मे आ जाते है !

जय गुरुदेव ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

संसार का चिंतन चिंताग्रस्त करता है, और भगवान का चिंतन सभी चिंताओं से मुक्त करता है।

संसार में हर व्यक्ति चिंतन करता है, चिंतन किये बिना कोई व्यक्ति एक क्षण भी नहीं रह सकता है, संसार के चिंतन से व्यक्ति संसार को प्राप्त होता है, और भगवान चिंतन से व्यक्ति भगवान को प्राप्त होता है।

जब व्यक्ति भगवान का चिंतन करता है तो संसार का चिंतन नहीं होता है, और जब व्यक्ति भगवान का चिंतन नहीं करता है तो संसार क

15/08/2021

स्वतंत्रता दिवस पर पूज्य बापू जी का संदेश षड्यंत्रों से बचें, संयमी, साहसी और बुद्धिमान बनें
(15 अगस्त 1999 को दिया गया संदेश)

भारतवासियों में हनुमान जी जैसा बल-वीर्य, साहस, सेवाभाव और संयम आये। जब तक साहस, सेवा और संयम नहीं आयेंगे, तब तक एक ठग से, एक शोषक से बचेंगे तो दूसरे शोषक आकर शोषण करेंगे। होता भी ऐसे ही है। पहले शोषक राजाओं से बचें तो अंग्रेज शोषक आ गये, अंग्रेज शोषकों से बचे थोड़े बहुत तो दूसरे आ गये। जब तक बल-वीर्य, साहस, संयम, सामर्थ्य नहीं होता, तब तक आजादी की बात पर भले खुशी मना लें लेकिन हम शोषित होते जा रहे हैं।

इसलिए 15 अगस्त का यह संदेश है कि स्वतंत्रता दिवस की खुशियाँ मनानी हैं तो भले मना लो लेकिन खुशी मनाने के साथ खुशी शाश्वत रहे, ऐसी नजर रखो। इसके लिए देश को तोड़ने वाले षड्यंत्रों से बचें, संयमी और साहसी बनें, बुद्धिमान बनें। अपनी संस्कृति व उसके रक्षक संतों के प्रति श्रद्धा तोड़ने वालों की बातें मानकर अपने देश की जड़ें खोदने का दुर्भाग्य अपने हाथ में न आये। बड़ी कुर्बानी देकर आजादी मिली है। फिर यह आजादी विदेशी ताकतों के हाथ में न चली जाय, उसका ध्यान रखना ही 15 अगस्त के अवसर पर संदेश है।

एक आजादी है सामाजिक ढंग की, दूसरी आजादी है जीवात्मा को परमात्मा प्राप्ति की। दोनों प्रकार की आजादी प्राप्त कर लें। इसके लिए शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक बल की आवश्यकता है इसलिए शरीर स्वस्थ रहे, मन प्रसन्न रहे और बुद्धि में ज्ञान और ध्यान का प्रकाश बना रहे – ये तीनों चीजें आवश्यक हैं।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, जुलाई 2015, पृष्ठ संख्या 5, अंक 271

06/05/2021

कोई भक्त चिंता न करे … मैं जल्द बाहर आ जाऊँगा, भक्तों की पीड़ा नही सही जाती मुझसे - पूज्य बापूजी

24/12/2020

तुलसी पूजन दिवसः 25 दिसम्बर

25 दिसम्बर को क्यों मनायें 'तुलसी पूजन दिवस'?

इन दिनों में बीते वर्ष की विदाई पर पाश्चात्य अंधानुकरण से नशाखोरी, आत्महत्या आदि की वृद्धि होती जा रही है। तुलसी उत्तम अवसादरोधक एवं उत्साह, स्फूर्ति, सात्त्विकता वर्धक होने से इन दिनों में यह पर्व मनाना वरदानतुल्य साबित होगा।

धनुर्मास में सभी सकाम कर्म वर्जित होते हैं परंतु भगवत्प्रीतिर्थ कर्म विशेष फलदायी व प्रसन्नता देने वाले होते हैं। 25 दिसम्बर धनुर्मास के बीच का समय होता है।

विदेशों में भी होती है तुलसी पूजा

मात्र भारत में ही नहीं वरन् विश्व के कई अन्य देशों में भी तुलसी को पूजनीय व शुभ माना गया है। ग्रीस में इस्टर्न चर्च नामक सम्प्रदाय में तुलसी की पूजा होती थी और सेंट बेजिल जयंती के दिन नूतन वर्ष भाग्यशाली हो इस भावना से चढ़ायी गयी तुलसी के प्रसाद को स्त्रियाँ अपने घर ले जाती थीं।

तुलसी पूजन विधि

25 दिसम्बर को सुबह स्नानादि के बाद घर के स्वच्छ स्थान पर तुलसी के गमले को जमीन से कुछ ऊँचे स्थान पर रखें। उसमें यह मंत्र बोलते हुए जल चढ़ायें-

महाप्रसादजननी सर्वसौभाग्यवर्धनी।

आधिव्याधि हरिर्नित्यं तुलसि त्वां नमोऽस्तु ते।।

फिर तुलस्यै नमः मंत्र बोलते हुए तिलक करें, अक्षत (चावल) व पुष्प अर्पित करें तथा कुछ प्रसाद चढ़ायें। दीपक जलाकर आरती करें और तुलसी जी की 7,11, 21, 51 या 111 परिक्रमा करें। उस शुद्ध वातावरण में शांत हो के भगवत्प्रार्थना एवं भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करें। तुलसी के पास बैठकर प्राणायाम करने से बल, बुद्धि और ओज की वृद्धि होती है।

तुलसी पत्ते डालकर प्रसाद वितरित करें। तुलसी के समीप रात्रि 12 बजे तक जागरण कर भजन, कीर्तन, सत्संग-श्रवण व जप करके भगवद्-विश्रांति पायें। तुलसी नामाष्टक का पाठ भी पुण्यकारक है। तुलसी पूजन अपने नजदीकी आश्रम या तुलसी वन में अथवा यथा अनुकूल किसी भी पवित्र स्थान पर कर सकते हैं।

तुलसी नामाष्टक

वृन्दां वृन्दावनीं विश्वपावनीं विश्वपूजिताम्।

पुष्पसारां नन्दिनीं च तुलसीं कृष्णजीवनीम्।।

एतन्नामष्टकं चैतस्तोत्रं नामार्थसंयुतम्।

यः पठेत्तां च संपूज्य सोऽश्वमेधफलं लभेत्।।

भगवान नारायण देवर्षि नारदजी से कहते हैं- "वृंदा, वृंदावनी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी – ये तुलसी देवी के आठ नाम हैं। यह सार्थक नामवली स्तोत्र के रूप में परिणत है। जो पुरुष तुलसी की पूजा करके इस नामाष्टक का पाठ करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।" (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड 22.32-33)

Photos from बापू के बच्चे नही रहते कच्चे's post 18/12/2020

25 दिसम्बर #तुलसी_पूजन दिवस के पावन अवसर पर " महिला उत्थान मंडल व बाल संस्कार राजनांदगांव की सेवाधारी बहनो द्वारा वार्ड नंबर 1 बजरंगपुर नवागांव में तुलसी पूजन किया गया ।

Bapu Ji

Photos from बापू के बच्चे नही रहते कच्चे's post 17/12/2020

अमदावाद, ओढ़व, के प्रकाश टेनामेंट, कृपाली सोसायटी, अर्बुदा नगर में पूज्य संत श्री #आशारामजी बापू प्रेरीत तुलसी पूजन दिवस एवं भगवत गीता जयंती के कार्यक्रम गुरुकृपा से सम्पन्न हुआ।

Bapu Ji

17/12/2020
Photos from बापू के बच्चे नही रहते कच्चे's post 16/12/2020

पूज्य संत श्री #आशारामजी बापू प्रेरित 25 दिसंबर #तुलसी_पूजन दिवस निमित्त तुलसी पूजन कार्यक्रम हस्तपुर इगलास अलीगढ़ उत्तर प्रदेश में किया गया |

Bapu Ji

Photos from बापू के बच्चे नही रहते कच्चे's post 12/12/2020

रायबरेली जिले के बछरावां क्षेत्र के हरदोई गांव में 5 दिसंबर को संत श्री #आशारामजी आश्रम, लखनऊ के तत्वाधान में जरूरतमंदों के बीच कंबल , कलैंडर और बूंदी का प्रसाद वितरित किया गया।

Bapu Ji

Photos from बापू के बच्चे नही रहते कच्चे's post 10/12/2020

Monthly Ration distribution to Daridra Narayan in Hyderabad Ashram - (This is done on first Sunday of every month).

Bapu Ji

09/12/2020

इनका रखें ध्यान...

दोनों हाथों से सिर नहीं खुजलाना चाहिए | जूठे हाथों से सिर को स्पर्श नहीं करना चाहिए नहीं तो बुद्धि मंद होती है |

Bapu Ji

08/12/2020

ईश्वर के रास्ते चलने में यदि गुरु भी रोकते हों तो गुरु की बात ठुकरा देना पर ईश्वर को न छोड़ना ।

- Pujya Saint Shri Bapu Ji

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