।।जय मंगला गौरी।।
Acharya Sadashiv Pandey
Acharya Sadashiv ji,a disciple of pujya Swami Akhandananda Saraswati ji and presently serving as a main priest at Sri Radha Krishna Mandir,Vijay Nagar,Agra
।।गणपति स्मरणम्।।
26/07/2025
एक ऐसे कथावाचक जिनके पास पत्नी के अस्थि विसर्जन तक के लिए पैसे नहीं थे ...तब मंगलसूत्र बेचने की बात की थी।
यह जानकर सुखद आश्चर्य होता है कि पूज्यनीय रामचंद्र डोंगरे जी महाराज जैसे भागवताचार्य भी हुए हैं जो कथा के लिए एक रुपया भी नहीं लेते थे 🙏 मात्र तुलसी पत्र लेते थे।जहाँ भी वे भागवत कथा कहते थे, उसमें जो भी दान दक्षिणा चढ़ावा आता था, उसे उसी शहर या गाँव में गरीबों के कल्याणार्थ दान कर देते थे। कोई ट्रस्ट बनाया नहीं और किसी को शिष्य भी बनाया नहीं।
अपना भोजन स्वयं बना कर ठाकुरजी को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते थे।डोंगरे जी महाराज कलयुग के दानवीर कर्ण थे।
उनके अंतिम प्रवचन में चौपाटी में एक करोड़ रुपए जमा हुए थे, जो गोरखपुर के कैंसर अस्पताल के लिए दान किए गए थे।-स्वंय कुछ नहीं लिया|
डोंगरे जी महाराज की शादी हुई थी। प्रथम-रात के समय उन्होंने अपनी धर्मपत्नी से कहा था-'देवी मैं चाहता हूं कि आप मेरे साथ 108 भागवत कथा का पारायण करें, उसके बाद यदि आपकी इच्छा होगी तो हम ग्रहस्थ आश्रम में प्रवेश करेंगे'।
इसके बाद जहाँ -जहाँ डोंगरे जी महाराज भागवत कथा करने जाते, उनकी पत्नी भी साथ जाती।108 भागवत पूर्ण होने में करीब सात वर्ष बीत गए।तब डोंगरे जी महाराज पत्नी से बोले-' अब अगर आपकी आज्ञा हो तो हम ग्रहस्थ आश्रम में प्रवेश कर संतान उत्पन्न करें'।
इस पर उनकी पत्नी ने कहा,'आपके श्रीमुख से 108 भागवत श्रवण करने के बाद मैंने गोपाल को ही अपना पुत्र मान लिया है,इसलिए अब हमें संतान उत्पन्न करने की कोई आवश्यकता नहीं है'।धन्य हैं ऐसे पति-पत्नी, धन्य है उनकी भक्ति और उनका कृष्ण प्रेम।
डोंगरे जी महाराज की पत्नी आबू में रहती थीं और डोंगरे जी महाराज देश दुनिया में भागवत रस बरसाते थे।
पत्नी की मृत्यु के पांच दिन पश्चात उन्हें इसका पता चला।वे अस्थि विसर्जन करने गए, उनके साथ मुंबई के बहुत बड़े सेठ थे- रतिभाई पटेल जी |
उन्होंने बाद में बताया कि डोंगरे जी महाराज ने उनसे कहा था ‘कि रति भाई मेरे पास तो कुछ है नहीं और अस्थि विसर्जन में कुछ तो लगेगा। क्या करें’ ?फिर महाराज आगे बोले थे, ‘ऐसा करो, पत्नी का मंगलसूत्र और कर्णफूल- पड़ा होगा उसे बेचकर जो मिलेगा उसे अस्थि विसर्जन क्रिया में लगा देते हैं’।
सेठ रतिभाईपटेल ने रोते हुए बताया था....
जिन महाराजश्री के इशारे पर लोग कुछ भी करने को तैयार रहते थे, वह महापुरुष कह रहा था किपत्नी के अस्थि विसर्जन के लिए पैसे नहीं हैं।
हम उसी समय मर क्यों न गए l
फूट फूट कर रोने के अलावा मेरे मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा था।
सनातन धर्म ही सर्वोपरि है ऐसे संत और महात्मा आप को केवल सनातन संस्कृति में मिलते हमारे देश में बहुत सी बातें हैं जो हम सभी तक पहुंच नहीं पाई हमें कोशिश करना चाहिए कि हमारे देश की संस्कृति को हम सभी जाने।
🚩 मातु श्री नर्मदे हर 🚩🙏
*ऐसे महान विरक्त महात्मा संत के चरणों में कोटि-कोटि नमन भी कम है ।।
||शिव तांडव स्त्रोत||
।।दिव्य रुद्राभिषेक।।दिव्य श्रृंगार।।नमः पार्वती पतये हर हर महादेव ।।
09/09/2021
।।जय श्री राधे कृष्णा।।
07/09/2021
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।
04/06/2020
मैं कर सकता हूँ, यह विश्वाश है. केवल मैं ही कर सकता हूँ, यह अंधविश्वास है
शुभ बृहस्पिवार
25/03/2020
आनंद नामके शुभ संवत् 2077, हिंदू नव वर्ष व चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें
मां दुर्गा की असीम कृपा से आप सबका जीवन सदा हंसता मुस्कुराता रहे ...
09/01/2019
06/01/2019
Shubha Prabhat
मथुरा की खुशबू ,गोकुल का हार, वृन्दाबन की सुगंध ,बरसाने की फुहार ! राधा की उम्मीद ,कान्हा का प्यार , मुबारक हो आपको होली का त्यौहार !!
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