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"कर्ता करे न कर सके, गुरु करे सब होय, सातों द्वीप नौ खंड में, गुरु से बड़ा न कोय।"गुरु पूर्णिमा की शुभकामनायें
29/07/2026

"कर्ता करे न कर सके, गुरु करे सब होय, सातों द्वीप नौ खंड में, गुरु से बड़ा न कोय।"
गुरु पूर्णिमा की शुभकामनायें

भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा विधियों को विदेशों मे भी मान्यता मिल रही है पर हम भारतीय पता नहीं कब जागेंगे l  ज़ब भी घरों मे ...
26/07/2026

भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा विधियों को विदेशों मे भी मान्यता मिल रही है पर हम भारतीय पता नहीं कब जागेंगे l ज़ब भी घरों मे हल्दी का दूध या कोई अन्य प्राकृतिक उपचार करके स्वास्थ्य लाभ की चेष्टा की जाती है तो प्रायः देखने मे आता है की परिवार के अन्य सदस्य इसे नकार देते है या ना पीने के बहाने बनाते है, विशेषतः बच्चे व युवा....
इस व्यवहार के क्या कारण हो सकते हैँ? ?? कृपया कमेंट करके बताइये 🙏
cure chikitsa

Yoga is always good for health
08/07/2026

Yoga is always good for health

04/07/2026

छिति जल पावक गगन समीरा।
पंच रचित अति अधम सरीरा॥

यह भारतीय दर्शन और हिंदू धर्म का एक अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक (या चौपाई) है। इसे महाकवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस से लिया गया है
शब्दों का अर्थ: छिति (क्षिति): पृथ्वी (Earth)
जल: पानी (Water)
पावक: अग्नि या आग (Fire)
गगन: आकाश (Sky/Space)
समीरा: वायु या हवा (Wind)
संपूर्ण अर्थ: इस चौपाई का अर्थ है कि हमारा यह नश्वर मानव शरीर इन्हीं पांच मूल तत्वों (पंचतत्व) - पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु - से मिलकर बना है। इसके अतिरिक्त, अध्यात्म में इन तत्वों को नश्वर और क्षणभंगुर माना गया है, जो मृत्यु के पश्चात पुन: इन्हीं पांच तत्वों में विलीन हो जाते हैं l

दोस्तों यहाँ तक की बात तो हम सब जानते है, पर इसके आगे की सच्चाई से हाल फिलहाल मे ही सामना हुआ:-
जिन पांच तत्वों से हमारा शरीर बना है उन्ही पांच तत्वों का विधिपूर्वक प्रयोग करके हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते है ll

सवाल यह है की कोनसी या कैसी विधि???
तो दोस्तों यह विधि है प्राकृतिक चिकित्सा l
अर्थात (छिति) मिट्टी ; जल ; (पावक ) सूर्य की किरणे व thermolium ; (गगन ) उपवास ; (समीरा ) वायु चिकित्सा का आवश्यकता के अनुसार प्रयोग करके स्वास्थ्य लाभ करना l

04/07/2026

पपीते के पत्ते की चाय -
किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90 दिन में जड़ से खत्म किया जा सकता है।

पपीते के पत्ते –
तीसरी और चौथी स्टेज का कैंसर सिर्फ 35 से 90 दिनों में ठीक हो सकता है।
अब तक -
हम इंसानों ने पपीते के पत्तों का इस्तेमाल बहुत ही सीमित तरीके से किया होगा...
(खासतौर पर प्लेटलेट कम करने या त्वचा संबंधी या अन्य किसी छोटे या बड़े प्रयोग के लिए)
लेकिन, आज हम आपको जो बताने जा रहे हैं - ये वाकई आपको हैरान कर देगा।
आप सिर्फ पांच हफ्ते में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म कर सकते हैं।
यह प्रकृति की एक अद्भुत शक्ति है।
अनेक प्रकार की वैज्ञानिक खोजों से बहुत सारा ज्ञान प्राप्त हुआ जो -
पपीते के हर भाग जैसे फल, तना, बीज, पत्तियां, जड़ सभी में कैंसर कोशिकाओं को मारने और उसके विकास को रोकने के लिए शक्तिशाली औषधि होती है।

विशेष रूप से -
पपीते की पत्तियों में कैंसर कोशिकाओं को मारने और उनकी वृद्धि को रोकने के गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

तो आइए जानें...
यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा (2010) और अमेरिका तथा जापान के अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों और शोधकर्ताओं द्वारा किए गए शोध से यह पता चला है कि -
पपीते की पत्तियों में कैंसर कोशिकाओं को मारने का गुण पाया जाता है।
श्री। नाम डांग - एमडी, पीएचडी जो एक आविष्कारक हैं,
उनके अनुसार -
पपीते की पत्तियां सीधे करीब 10 तरह के कैंसर को खत्म कर सकती हैं।
इनमें से प्रमुख हैं-
*स्तन कैंसर,
*फेफड़े का कैंसर,
*यकृत कैंसर,
*अग्न्याशय का कैंसर,
*गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर,
इसमें जितनी ज्यादा पपीते की पत्तियां डाली जाएंगी. परिणाम उतना ही बेहतर होगा.

पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज कर सकती हैं और, कैंसर को बढ़ने से रोकता है।
तो आइए जानें- पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज कैसे करती हैं?
(1) पपीता कैंसर रोधी अणुओं Th1 साइटोकिन्स के उत्पादन को बढ़ाता है। जो इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करता है। जिससे कैंसर कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
(2) पपीते के पत्ते में पपेन नमक है - प्रोटियोलिटिक एंजाइम पाए जाते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं पर प्रोटीन कोटिंग को तोड़ देता है... इससे कैंसर कोशिकाओं का शरीर में जीवित रहना मुश्किल हो जाता है।

इस प्रकार,
पपीते के पत्ते की चाय-
रोगी के रक्त में मिलकर मैक्रोफेज को उत्तेजित करता है... प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करके,
कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देता है।
कीमोथेरेपी/रेडियोथेरेपी और पपीते के पत्तों से उपचार के बीच मुख्य अंतर यह है -
*कीमोथेरेपी में –
प्रतिरक्षा प्रणाली 'दबी हुई' है।
जबकि पपीता निकलता है -
प्रतिरक्षा प्रणाली को 'उत्तेजित' करता है,
कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी में सामान्य कोशिकाएं भी 'प्रभावित' होती हैं।

पपीता केवल कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है।

सबसे बड़ी बात यह है कि -
कैंसर के इलाज में पपीते की पत्तियों का कोई भी 'साइड इफेक्ट' नहीं होता है।

*कैंसर में पपीते की चाय सेवन नियम:-
कैंसर के लिए सर्वोत्तम :- दिन में 3 से 4 बार बनाएं पपीते की चाय, यह आपके लिए बहुत फायदेमंद है.
आइए अब जानते हैं -
पपीते की चाय कैसे बनाएं:-
(1) सबसे पहले 5 से 7 पपीते के पत्तों को धूप में अच्छी तरह सुखा लें। फिर इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें। 500 मि.ली. पानी में - कुछ सूखी पपीते के पत्ती डालें और अच्छी तरह उबालें। इतना उबालें कि यह आधा 250मिली रह जाए. आप इसे 125 ml दिन में 2 बार करके पियें। और, अगर ज्यादा बनाते है तो इसे दिन में 3 से 4 बार पियें और बचे हुए तरल को फ्रिज में रखें, और आवश्यकतानुसार उपयोग करें।
*इसका रखें ख्याल- इसे दोबारा गर्म न करें.*
(2) 7 ताजी पपीते की पत्तियां लें- इसे हाथ से अच्छी तरह गूंथ लें। अब इसे 1 लीटर पानी में उबालें. जब यह 250 मि.ली. बच जाए तो इसे छानकर 125/125 मि.ली. दोनों समय यानि सुबह और शाम पियें। इस प्रयोग को आप दिन में 3 से 4 बार भी कर सकते हैं।
आप जितना अधिक पपीते के पत्तों का उपयोग करेंगे... उतना ही जल्दीआपको लाभ मिलेगा.
*टिप्पणी 😗
*इस चाय को पीने के आधे घंटे तक आपको कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए।*
*कब तक करना है यह प्रयोग?
यह प्रयोग आपको 5 सप्ताह में अपना परिणाम दिखा देगा... हालाँकि हम आपको इसे 3 महीने तक इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। और, ये जो समझ गए हैं, उन लोगों ने उन लोगों का भी भला किया है, जिनका कैंसर 'तीसरे' या 'चौथे' चरण का था।

ये संदेश - सभी को भेजने हेतु एक विनम्र अनुरोध। एक कतरा चाहिए... ताकि अन्य जरूरतमंदों तक पहुंचा जा सके।
*डॉ. धनेश सूरत /कनाडा मोबाइल 99796 18999*
*कैंसर में 25 वर्ष का अनुभव*
➖➖➖➖➖

*कृपया इस मेसेज को आपके सभी समुहो में भेजें हो सके किसी का भला हो जाये और आपको उसका आशीर्वाद मिल जाये🙏*

02/07/2026

नमस्कार दोस्तों, आज मुझसे कुछ साथियों ने पूछा की B12 यदि अधिक मात्रा मे खा लिया जाये तो क्या इसकी अधिकता से भी तो कोई बीमारी हो सकती है ?
बिलकुल सही सवाल है आपका. तो इसका जवाब जानिए, B12 एक जल मे घुलनशील (water soluble ) विटामिन है. यदि शरीर मे इसकी मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाएगी तो यह स्वत ही पसीने या मूत्र के माध्यम से शरीर के बाहर निकल जायेगा. अतः B12 का सेवन भरपूर कीजिये और स्वस्थ रहिये.

02/07/2026
01/07/2026

नमस्कार दोस्तों, आज हम विटामिन बी 12 के स्रोतों के बारे में जानेंगे। इसके मुख्य कार्य हैं नर्वस सिस्टम को सुचारु रखना, रक्त का निर्माण, डीएनए का निर्माण, याददाश्त, कैल्शियम आदि के अवशोषण में मदद करना आदि। यह मुख्य रूप से जानवरों से प्राप्त होने वाले प्रोटीन में पाया जाता है, जैसे कि अंडा और मांस आदि।
अब सवाल यह है कि शाकाहारियों के भोजन में बी 12 की पूर्ति कैसे हो? व्यस्कों को प्रतिदिन लगभग 2400 मिलीग्राम बी 12 की आवश्यकता होती है। अतः भोजन में प्रतिदिन दही, दूध, फोर्टिफाइड भोजन आदि शामिल किए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त, पाखला भात, अर्थात रात भर दही में भिगो कर रखे हुए पके चावल, भी बी 12 का एक स्रोत है। इसे स्वादानुसार छोंक कर और बारीक कटा हुआ सलाद मिलाकर सुबह नाश्ते में खाया जा सकता है। तो दोस्तों, अपनी सेहत पर ध्यान दीजिए, यह शरीर ईश्वर का दिया हुआ आशीर्वाद है, इसे मंदिर की तरह ट्रीट कीजिए।
स्वस्थ रहिए, मस्त रहिए।

28/06/2026

शरीर का अलार्म
क्या आपको भी
- सुबह सो कर उठने पर थकान महसूस होती है मानो 8 घंटे मे भी नींद पूरी ना हुई हो
- थोड़ा सा काम करते ही सांस फूल जाती है
- छोटी छोटी चीजें जैसे कभी चाभी, कभी नाम, भूलने लगते है
- हाथ पैरों मे झुनझुनाहट या सुन्नपन (numbness)
- फोकस ना कर पाना (low concentration )
- बार बार छाले होना या जीभ सूजना
- आँखों मे जलन होना या पीला पड़ना
- डिप्रेशन, उदासी, अकेलापन पसंद आना

सावधान हो जाईये, यह विटामिन B12 की कमी हो सकती है. यदि इनमे से 3-4 लक्षण भी दिखाई देते है तो तुरंत रक्त की जांच करवाइये. यकीन मानियेगा यह केवल उम्र की थकान नहीं है और सही विटामिन लेने से आप पुनः पूर्व की भांति स्वस्थ रह सकते है
स्वस्थ रहें मस्त रहें

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