Suryakiran Shiksha, Samajik Nyay Avam Kalyan Samiti

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18/03/2017

Yogi aaditya nath ko uttar pradesh ka mukhymantri chune Jane par suryakiran shiksha samajik nyay avam kalyan samiti ke sabhi sadasyon ki taraf se hardik badhai

31/12/2015

Endeavor to create heaven on earth and turn your heart into the new Ram Rajy. Stop searching for happiness in places outside of yourself and start finding it where it has always been: within you. Wishes for happy and healthy new year. Wish to eat healthier, think healthier, speak healthier, and more positively over your life in the year 2016.

Photos from Suryakiran Shiksha, Samajik Nyay Avam Kalyan Samiti's post 12/09/2015
05/09/2015

"स्मृति-विस्मृति कभी- कभी अनेक अगम्य रहस्यों का सृजन करती है, इस अगम्य को जो भी अधिक से अधिक जान सकता है उसके लिए काल का यह संकेत पथ प्रदर्शक बन जाता है और जो इसे नहीं जान सकता उसके लिए जीवन एक विकट समस्या बन जाता है | जीवन और मृत्यु के बीच के अंतराल को जीवन कहते हैं | मृत्यु पर कोई विजय प्राप्त नहीं कर सकता, हाँ मृत्यु से भयमुक्त होना संभव है | जो भयमुक्त हो सकता है उसे मृत्यु स्पर्श नहीं कर सकती | और जो सदा भयभीत रहता है वह कभी भी मृत्यु से विमुख नहीं हो सकता | मानव केवल मृत्यु के भय से मुक्त हो सकता है और उसकी यह निर्भयता ही दुर्भाग्य में से प्राप्त सौभाग्य है | "

-----------------------------भगवान श्रीकृष्ण

19/08/2015

वाह री मोदी सरकार
एलपीजी कंपनियां अपने ग्राहकों के मोबाईल से गैस बुकिंग करते समय अंग्रजी भाषा में सब्सिडी छोड़ने के लिए एक भ्रामक ऑप्शन देते है जिसे अधिकतर हिंदी भाषी गरीब लोग यहाँ तक कि अच्छे पढ़े-लिखे लोग भी नहीं समझ पाते और वह या तो गलत नंबर अपने मोबाईल पर दबा देते है या फोन काट देते है जिसका परिणाम यह होता है कि उनकी सब्सिडी रोक दी जाती है और उन्हें सिलेंडर बाजार की कीमत पर ही लेना पड़ रहा है और आज स्थिति यह है कि धीरे-धीरे कर अधिकतर लोगों की सब्सिडी रोक दी है | यदि सरकार सब्सिडी नहीं देना चाहती तो उसे गैस सब्सिडी ख़त्म कर देनी चाहिए, वह इस तरह धोखधड़ी कर आम जनता को क्यों भ्रमित कर रही है, यह तय है कि इसका खामियाजा उसे आने वाले समय में और चुनावों में भोगना पड़ेगा |

15/08/2015

The real concept of independence is a question of national entity, more than it is an annual anniversary like any other occasion that we celebrate. Independence Day is a question of nation, people, well-secured, and stable life. It's an independence that expresses the protection and security which all the Indians aspire for independence from all disasters and difficulties has become an obdurate demand.

Photos from Suryakiran Shiksha, Samajik Nyay Avam Kalyan Samiti's post 02/08/2015

President of animal welfare. Jyoti Dubey giving medical treatment

01/03/2015

वाह री यू पी सरकार
यू पी सरकार ने कुछदिनो पहले उत्तर प्रदेश पुलिस की साईट पर “CRIME AGAINST WOMEN” के नाम से पोर्टल शुरू किया था जिसमे ऑनलाइन शिकायतें दर्ज करने की सुविधा थी और उस पर शिकायतकर्ता की फीडबेक भी दर्ज करने के साथ साथ पब्लिक की राय के लिये भी ओप्शन था , जब यू पी सरकार किसी भी महिला की शिकायत को हल नहीं कर पायी तो उसने सारे केसों को अपनी तरफ से और अपनी मनमर्जी से समाधान किया हुआ मान लिया और जिन फीडबेक को देख सकते थे उन्हे एसा बना दिया कि अब उन्हें कोई खोल ही नहीं सकता, जब भी आप खोलना चाहेंगे तब तब उसका पससबर्ड बदल दिया जाता है जिससे आप कार्यवाही और फीडबेक देख ही ना सके, इसका मतलब यह हुआ कि महिलाओं कि उन शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं होगी यह मात्र प्रोपेगंडा है, इससे इस सरकर की महिलाओं के प्रति संवेदनहीनता और मानसिक विद्वेष की भावना जाहिर होती है और इससे यह प्रमाणित होता है की यह सरकार महिलाओं के प्रति हो किये जा रहे अपराधों को रोकने के प्रति गंभीर नहीं है |

26/01/2015

सभी दोस्तों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं| एक ऐसा जीवन-जागृत समूह बनाना चाहते है जो किसी नियमों, कानूनों और सिद्धान्तों से बंधा हआ न हो। जिसमें बंधने का कोई आग्रह न हो, जिसका कोई विधान न हो, जिससे एकरूपता की भी चिंता न हो बल्कि मित्रों के प्रति सम्मान, उनके भिन्न विचारों के प्रति भी, जिससे स्वतंत्र चिंतन पैदा हों | हम ऐसे विचारों और संदेशों को लोगों तक पहॅुचायें जिससे उनका मंगल हो। इसलिये हमें संगठन नहीं बनाना मित्रों का समूह बनाना है। यह मेरा ही नहीं सभी मित्रों का कर्तव्य होगा जो इसे संगठन बनाने से रोक सके। बुद्ध और महावीर ने अपनी बात उस जमाने में जहॉ साधन सीमित थे। इतने लोगों तक पहॅुचायी तो आज साधन सम्पन्न युग में हम अच्छे विचारों की गंगा प्रवाहित कर मानव जीवन को शुद्ध सत्य में परिचित करा सकते है। ''लेकिन यह मेरे अकेले के वश की बात नहीं है। उसके लिये बहुत मित्रों की जरूरत है, बहुत प्रकार के मित्रों की जरूरत है। कोई कुछ कर सकता है, कोई बुद्धि से विचार कर सकता है, कोई और तरह से.................। जो जिसकी समझ में आये, जो जिसका व्यक्तित्व है वह उसी तरह से सहयोगी हो सकता है। यह भी ध्यान रखना होगा कि मित्रों का वर्ग जितना बड़ा हो उतना ही अच्छा है, क्योंकि जितने ही भिन्न तरह के लोग आयेंगे उतनी ही भिन्न तरह भी सेवायें मिलेंगी और ज्यादा बड़ा समूह बना सकेंगे। अक्सर यह होता है कि मित्रों की सीमायें तय हो जाती है। अपरिचित लोगों से मन से एक भय रहता है। इसी भय के कारण हर समूह सीमित हो जाता है। यदि इस आग को विराट और व्यापक बनाना है तो इस तरह का भय छोड़ना होगा। हमें इतना समरस होना है, हमारा ह्रदय इतना विस्तीर्ण हो हमे अपनी भुजायें इतनी दूरतक फैलानी है कि विपरीत से विपरीत व्यक्ति को भी हम समायुक्त कर लेंे। छोड़ेे हम एक को भी नहीं। जो हमसे विल्कुल भिन्न है उसकी भी हम अपने भीतर जगह बना लें, उसकी उपयोगिता भी खोज लेंे कि वह हमारे किस काम आ सके। यदि कोई सोचे कि भिन्न मत के, भिन्न दृ-िष्ट के, मिन्न व्यक्तित्व के लोग भीतर न आये तो फिर बड़ा काम नहीं हो सकता। कोई छोटी सी नदी छोटी ही रह जायेगी। अगर वह यह सोचे कि हर दूर से आने वाला नाला और नदी मुझसे न मिले, पता नहीं किस कीचड़ को ले आये। यदि ऐसा कोई नदी सोचे तो वह नाली रह जायेगी फिर वह महानदी नहीं बन सकती, गंगा नहीं बन सकती। यदि गंगा बनना हो तो सबको समाविष्ट करना ही होगा। आज समाज को क्षेत्र वाद, जाति वाद और जाने कितने के विक़्रत द्रष्टिकोनो के जरिये बोट बॅंक की राजनीति कर उसे अनेक संगठनों में विभाजित कर दिया है जिनका उद्देश्य केवल शक्ति प्रदर्शन और मीडिया मंे अपना महिमामण्डन कराना है। ये संगठन समाज को वि-िभन्न गुटों मंे विभाजित करने का काम कर रहे है और राजनैतिक रोटियां सेक रहे है। ऐसे लोग अपने किया कलापों से अपने आपको प्रति-िष्ठत सावित करने का प्रदर्शन कर रहे है। हमें बहुत व्यापक समूह बनाना है। संगठन कभी व्यापक नहीं होते इस समूह में बंधने कीं कोई जोर जवरदस्ती नहीं, उसमें भिन्नता के लिये स्वीकृति हो, सबके लिये मुक्ति हो, बंधन न हों कोई भी भीतर आये या वाहर जाये कोई फर्क नहीं पड़े। मित्रों का एक व्यापक दल बन सके। जिससे बड़े पैमाने पर देsh में आध्यात्मिक क्रान्ति की जा सके और वह जरूरी भी है। यदि हम उसके लिए रास्त भी साफ कर सकें जिस पर वह क्रान्ति गुजर जाये तो ही काफी है।

09/01/2015

ईश्वर, अल्लाह, खुदा की अवधारणा इसलिये बनाई गयी कि यह मानव समाज कों जीने के लिये आतंरिक शक्ति प्रदान करे जिसके कारण मानव अनेक कष्ट झेलते हुए जीवन यात्रा पर चलता रहे और यह विचार किया गया कि हमारे सुकर्मों और दुष्कर्मों कों देखने वाला कोई है जो कर्मानुसार फल देता है, जिससे समाज में अराजकता ना फैले परन्तु आज उस ईश्वर, अल्लाह और खुदा के नाम पर ही लोग आतंक फैला कर समूची मानव जाति को विनाश क़ी ओर ले जा रहे है और उन्होने अपने ईश्वर, अल्लाह, खुदा को इतना कमजोर, आसक्त, निर्जीव, असहाय बना दिया है उसकी रक्षार्थ निर्दोष और स्वतन्त्र विवेकपूर्ण अभिव्यक्ति देने वालों को मॉत के घाट उतारा जा रहा है और उन्होने अपना ही नहीं वरन पूरी कॉम का जीवन ही संकट मे डाल दिया है | जबकि भगवान की धारणा मानव जाति को संकटों से जूझने का साहस और जीवन जीने का प्रयोजन देती है | एसी मारकाट करने वालो मे भगवान के प्रति कोई आस्था और विश्वास नहीं होता वह तो एक कबीले की भांति उसके नाम पर लोगो मे दहसत और आतंक फैला कर अपनी बादशाहत साबित करना चाहते है और उनको उनके वास्तविक खुदा से दूर कर वह खुद उनके खुदा बनाने के ख्वाब संजोये होते हैं |

09/01/2015

एक कार्टून छापने पर पेरिस मे की गयी हत्यायें से क्या ये लोग अपने भगवान को ही सबसे बड़ा आतंकबादी साबित करना चाहते है? क्या इनकी मंशा है ? क्या एक कार्टून छपने इनके ईश्वर की सत्ता हिल गयी? क्या इन्हे लगा कि इससे उस धर्म के मानने वाले विधर्मी हो जायेंगे? संकुचितऔर निक्रष्ट विचारधारा वाले ये लोग क्षुद्र एवं विकृत मानसिकता से ग्रसित होकर निर्दोष लोगों को मारकर किस खुदा की पैरवी कर रहे है ? एसा कुकर्म करके ये किस परमात्मा के नजदीक पहुच रहे है ? जिसे हम सर्व शक्तिमान कहते है क्या वह इतना कमजोर है कि एक कार्टून छपने से वह असहाय, निरीह, कमजोर, अपाहिज नजर आता है ? कोई समझाये----------

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