03/10/2020
मेरी समझ से बहुत से कारण हैं जो कि लोगो में गलत मानसिकता पैदा करते हैं
1. फैलता नशा-
नशा आदमी की सोच को विकृत कर देता है. उसका स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहता और उसके गलत दिशा में बहकने की संभावनाएं शत-प्रतिशत बढ़ जाती हैं. ऐसे में कोई भी स्त्री उसे मात्र शिकार ही नजर आती है।
2. पुरुषों की मानसिक दुर्बलता-
स्त्री देह को लेकर बने सस्ते चुटकुलों से लेकर चौराहों पर होने वाली छिछोरी गपशप तक और इंटरनेट पर परोसे जाने वाले घटिया फोटो से लेकर हल्के बेहूदा कमेंट तक में अधिकतर पुरुषों की गिरी हुई सोच से हमारा सामना होता है।
ईश्वर ने नर और नारी की शारीरिक संरचना भिन्न इसलिए बनाई कि यह संसार आगे बढ़ सके. परिवेश में घुलती अनैतिकता और बेशर्म आचरण ने पुरुषों के मानस में स्त्री को मात्र भोग्या ही निरूपित किया है। यह आज की बात नहीं है बल्कि बरसों-बरस से चली आ रही एक लिजलिजी मानसिकता है जो दिन-प्रतिदिन फैलती जा रही है. हमारी सामाजिक मानसिकता भी स्वार्थी हो रही है।
3. महिलाओं का कमजोर आत्मविश्वास-
महिलाओं का अगर आत्मविश्वास प्रबल हो तो कोई भी पुरुष उनसे टक्कर नहीं ले सकता। महिलाओं को शारीरिक रूप से सबल बनना चाहिए और वो मन से भी खुद मजबूत समझें। विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की ट्रेनिंग उन्हें बचपन से ही मिलनी चाहिए। हमारा समाज लड़कियों की परवरिश इस तरह से करता है कि लड़की खुद को कमजोर और डरपोक बनाती चली जाती है।
4. एकांत में मवालियों का अड्डा-
गांव और शहर के सुनसान खंडहरों की बरसों तक जब कोई सुध नहीं लेता है तब यह जगह आवारा और आपराधिक किस्म के लोगों की समय गुजारने की स्थली बन जाती है.
अंततः आज हमें बलात्कार को धर्म, मजहब के चश्मे से नहीं देखना चाहिए. बलात्कारी कहीं भी हो सकते हैं, किसी भी चेहरे के पीछे, किसी भी बाने में, किसी भी तेवर में, किसी भी सीरत में. बलात्कार एक प्रवृति है. उसे चिन्हित करने, रोकने और उससे निपटने की दिशा में यदि हम सब एकमत होकर काम करें तो संभवतः इस प्रवृत्ति का नाश कर सकते हैं.
प्रशान्त उपाध्याय
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