16/09/2024
ये सच है कि किसी से झूठ बोला जाये तो उसे पसंद नहीं आयेगा परंतु खुद बोलना हो तो बेझिझक बोल देगा। शायद सभी ने कभी न कभी झूठ बोला होगा और झूठ सुनकर लाल पीला हुआ होगा
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16/09/2024
ये सच है कि किसी से झूठ बोला जाये तो उसे पसंद नहीं आयेगा परंतु खुद बोलना हो तो बेझिझक बोल देगा। शायद सभी ने कभी न कभी झूठ बोला होगा और झूठ सुनकर लाल पीला हुआ होगा
बेटिओं को सुरक्षित वातावरण देने के लिए शुरूआत घर से ही करनी होगी । पढे लिखे बौधिक वर्ग के लड़कों के साथ भी अगर लड़कियाँ सुरक्षित नही है तो गलती किसकी है? शिक्षा की, संस्कार की या फिर समाज की
07/09/2024
गुरुजनों के अनमोल विचार ही जीवन जीने की कला सिखाते हैं इसलिए उनके विचारों को समझिये, चलिए और सफलता प्राप्त करिये
सुख और दुःख एक ही सिक्के के दो पहलू हैं एक के सामने दूसरा छुप जाता है
05/09/2024
साधारणतः तीन प्रकार के लोग होते हैं एक वो जो महसूस करते हैं लिखते या बोलते नहीं अर्थात बताते जताते नहीं है दूसरे वो जो महसूस करते हैं उ से लिखते या बोलते हैं। तीसरे तरह के वह लोग जो दूसरों के शब्दों में अपनी भावनाओं को देखते हैं। सोशल मीडिया के आने से दूसरे व तीसरे प्रकार के लोगों को बहुत ही लाभ हुआ है।ऐसे लोगों को बहुत बड़ा मंच मिला है अपनी बात व भावनाओं को रखने के लिए या ग्रहण करने के लिए।एक ओर जँहा लोग सकारात्मक शब्दोंं मे भविष्य को देखते हैं वंही दूसरी ओर नकारात्मक शब्दों में अपने बीते समय को।
नया साल आ गया, नई आशाओं और उम्मीदों के साथ।अयोध्या के प्रकाश पुंज से सभी दिशाएँ प्रकाशित हो रही हैं। लोग हर्षित हो रहे हैं अपने सकरात्मक विचारों को प्रेषित कर रहे हैं। समाज में नई पीढ़ी को दिशा भ्रमित करने वालों के विरुद्ध आवाज उठा रहे हैं। इसी दिशा में मेरी भी एक कोशिश है, किसी भी गलत बात को मौन रह कर सहमति मत दीजिए कम से कम एक बार असहमति प्रदर्शित तो कीजिये। जिसके पास मंच है वह मंच से अपनी असहमति व्यक्त करे जिसके पास मंच नहीं है वह अपने आस पास कुछ गलत देख कर मौन सहमति न दें असहमति जरूर व्यक्त करें तभी समाज सुधारात्मक विकास की ओर अग्रसर होगा।
सफल फिल्मों की लिस्ट में धीरे धीरे ऐसी फिल्में जुड़ रही हैं, जो सच्ची घटनाओं पर आधारित हैं । निर्माता निर्देशक कहानी के साथ न्याय करते हुए सकारात्मकता के साथ फिल्मांकन करते हैं। सारी यूनिट पूरी ईमानदारी के साथ अपने अपने काम को अंजाम देते हैं। फिल्म देखते समय दर्शकों को बोरियत या बोझिलता का एहसास नहीं होता, फिल्म दर्शकों को बांध कर रखती है।दर्शक सच्चाई देखना चाहते हैं बशर्ते पूरी ईमानदारी से दिखाया जाए तब।
करोंड़ों के बजट वाली फ्लॉप फ़िल्मों से ये तो साबित होता है कि लोग अपनी भावनाओं, संस्कारों, और आस्थाओं के साथ कोई खिलवाड, छेड़ छाड़ या मजाक पसंद नहीं करते। और करें भी क्यों? कोई व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता का उपयोग कर दूसरे की स्वतंत्रता पर कब्जा नहीं कर सकता, हंसी का पात्र नहीं बना सकता। नियंत्रण हीन लोगों और संगठन को उनकी सीमाओं का बोध कराने का सरल सा तरीका है , सिरे से नकारना। दर्शक गण स्वयं ही नियंत्रण कर्ता हैं। जो फिल्म व वेब सीरीज हमारे सामाजिक ढांचे और मान्यताओं के अनुरूप नहीं है, उन्हें न देखें और यदि गलती से देख लिया है तो नापसंद जरूर करें जिससे और लोग न देखें।
विश्व में आज भारत की गौरांवित् करने वाली छवि उभरकर सामने आ रही है। हमारी सभ्यता, संस्कृति को लोग अपना रहे हैं। अपने देश को विकास के शिखर की ओर अग्रसर करने के लिए हजारों लाखों लोग कड़ी मेहनत कर रहे हैं दूसरी तरफ कुछ उपद्रवी, पतित लोगों के कारण सारा देश शर्मिंदगी झेल रहा है। घृणित मानसिकता कौन फैला रहा है? फिल्म, वेबसीरिज, सोशल मीडिया या कोई और। क्या किसी भी स्तर पर गलत को नहीं कहने की हिम्मत किसी मे नहीं है? एक घटिया बक वास पूरी फिल्म बन कर लोगों के सामने आ जाती है। हम ऐसे लोगों को मा न सम्मान क्यों दे रहे हैं जो हमारे समाज को पतन की ओर ले जा रहे हैं, सभ्यता और संस्कृति को अपने अनुसार तोड़ मरोड़ रहे हैं।
कहते हैं कहानी समाज का प्रतिबिंब होती हैं या ये कह सकते हैं कि समाज से ही कहानी निकल कर आती है। समाज में अच्छी और बुरी यानि अपराध आधारित घटनाएं होती हैं जिससे कहानी बनती है। ओ टी टी प्लेटफार्म पर आने वाली अधिकांश वेब सीरीज अपराध आधारित कहानी ही होती है अपराध को इस तरह दिखाया जाता है जिसे देख कुछ नासमझ युवा आपराधिक कृत्य कर अपना भविष्य अंधकार में डाल देते हैं । सभी की ये सामाजिक जिम्मेदारी है कि इस तरह कि घटनाओं को बढ़ावा न दें। युवा वर्ग को भ्रमित न करें।
अपने फायदे के लिए समाज को गलत दिशा न दें।
ओ टी टी प्लेटफार्म से दर्शकों को कुछ नया और अच्छा कटेंट मिलने की उम्मीद थी, परंतु निराश ही रहे।गाली गलौज ,अश्लीलता, भद्दा पन दर्शकों को बांधे नही रख सकता। जो दर्शक इस ओर आये थे, वह भी वापिस जा रहे हैं । फिल्म हो या वेब सीरीज़ स्वस्थ मनोरंजन करने मे नाकाम लग रहे हैं