15/04/2026
दिनांक 14 अप्रैल, 2026 को केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के अध्यापक शिक्षा विभाग एवं अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती समारोह का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय सभागार में अपराह्न 4:30 बजे से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंचस्थ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। सभी अतिथियों का स्वागत उत्तरीय एवं स्मृति चिह्न देकर किया गया।
प्रो. चंद्रकांत कोठे विभागाध्यक्ष, अध्यापक शिक्षा विभाग, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा ने स्वागत वक्तव्य तथा संस्थान एवं विभागीय परिचय देते हुए कहा कि केंद्रीय हिंदी संस्थान सन् 1961 से हिंदी शिक्षण प्रशिक्षण एवं भाषा के प्रचार प्रसार के लिए कार्य कर रहा है, अभी हाल ही में संस्थान को मानद विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ है I आज का दिन डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के योगदान को स्मरण करने का दिन है उन्होंने समाज में भेदभाव मिटाने और बंधुत्व सामूहिकता एवं सद्भाव बढ़ाने पर बल दिया I
कार्यक्रम को सानिध्य प्रदान करते हुए प्रो. हरिशंकर, शैक्षिक समन्वयक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि अंबेडकर जी जाति बंधनों से मुक्त हैं उन्होंने पूरे देश को करुणा और प्रेम का संदेश दिया है। भारतीय जनता आज भी मानसिक संकीर्णता से बंधी हुई है अतः आज इस मानसिक संकीर्णता से उबरने की और अंबेडकर जी के विचारों को अपनाने की आवश्यकता है I
प्रो. सुरेश शेळके, हिंदी विभाग, नागनाथ कला वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, औंढा नागनाथ ने मुख्य अतिथि उद्बोधन में कहा कि आज हम डॉ भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती मना रहे हैं I अंबेडकर जी की जयंती उनके जीवित रहते मनाई गई थी, यह वर्ल्ड रिकॉर्ड है उन्होंने कहा कि उनके नाम का अभिवादन “जय भीम” उनकी व्यापकता और महानता को दर्शाता है I अछूतों को उनके अधिकार दिलाने के लिए बाबा साहेब का योगदान महत्वपूर्ण है I बाबासाहेब ने संविधान निर्माण में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की I कुछ आलोचक यह मानते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन में बाबासाहेब की कोई भूमिका नहीं रही, अतः भारतवर्ष के इतिहास के पुनर्लेखन की आवश्यकता है I उन्होंने कहा कि जो सम्मान बाबा साहब को विदेशों में मिला वही सम्मान भारत में मिलने की आवश्यकता है, आने वाले समय में अंबेडकरवाद भारत को विश्व गुरु बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा I
प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी, निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आज का दिन हम सभी को अंतर्मुख होकर उनके कार्यों और योगदान को सोचने का है I “हो गए बहुत, होंगे बहुत, लेकिन उनके जैसा कोई नहीं” के माध्यम से कहा कि उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयाम है, जिसने जिस रूप में उन्हें देखा उसे वैसा ही दिखाई दिया आज उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को पढ़ने की आवश्यकता है I बाबा साहेब के बताए हुए अध्यापक के बारे में विचार बहुत महत्वपूर्ण है, उन्होंने कहा कि एक अध्यापक का दायित्व बहुत बड़ा है, एक अध्यापक को केवल नौकरी के लिए ही नहीं बल्कि समाज का आधार स्तंभ बनना चाहिए उसे समाज के लिए आदर्श पुरुष होना चाहिए, शिक्षकों को अपने विषय का गहराई से ज्ञान होना चाहिए, उन्हें निरंतर पढ़ना और साधना करने वाला होना चाहिए, हर विषय का ज्ञान उनके लिए आवश्यक है उन्हें निरंतर अध्ययनशी होना चाहिए नया-नया ज्ञान आत्मसात करने वाला होना चाहिए, शिक्षक में अनुसंधान की वृत्ति होनी चाहिए, नित्य नए-नए विचार और नई-नई समस्याएं जो उत्पन्न हो रही है उनका समाधान करने वाला होना चाहिए, शिक्षकों में विद्यार्थियों के लिए आत्मभाव होना चाहिए, उन्हें निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए, शिक्षकों को अनुसंधान करने वाला होना चाहिए शिक्षकों को अंधानुकरण करने वाला नहीं होना चाहिए, बल्कि विचार शक्ति उत्पन्न करने वाला होना चाहिए और उन्हें किसी राजनीतिक दबाव में नहीं आना चाहिए, शिक्षकों का समाज के साथ अटूट रिश्ता होता है I अतः शिक्षा और शिक्षक समाज से अलग नहीं वरन् उसमें सुधार विकास और बदलाव करने वाले होने चाहिए I
संदीप म्यूजिकल ग्रुप (श्री गुड्डन बाबु) द्वारा भीम गीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें गायन समूह के सदस्य श्री नरेंद्र बौद्ध, गुड्डू बौद्ध, सचिन कुमार, प्रेम नारायण रोशन खान, मयंक गौतम तथा नीरज कपूर ने “14 अप्रैल का दिन आया रे आओ मिलकर गायें” “ना रुकने वाले हैं, न झुकने वाले हैं, तुम जोर से बोलो हम भीम गीत वाले हैं, तुम जोर से बोलो हम जीत वाले हैं” आदि गीत गा कर समां बांध दिया I
मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सरोज राय ने किया । कार्यक्रम में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर सपना गुप्ता, डॉ मीनाक्षी दुबे, डॉ. अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी, डॉ. दीपामणि बरूवा. डॉ. जोगेन्द्र सिंह मीणा, शैक्षिक सदस्य डॉ तस्मीना हुसैन, डॉ. सुनीता शर्मा, डॉ. राजश्री, डॉ प्रणीता मिश्रा, डॉ उषा शर्मा, डॉ, रिया डॉ. अनामिका, डॉ. शमा आदि सभी शैक्षिक एवं प्रशासनिक सदस्य तथा अध्यापक शिक्षा विभाग एवं अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे I