Hemant bhardwaj live gurukul
dedicated top theory for life and education
हम हर रोज धरती को हरी भरी रखने का प्रयास करें । यही बड़ी साधना होगी
देश मे शिक्षक बढ़ रहे पर गुरु कम हो रहे ।शिक्षक केवल तत्काल सबंधो को महत्व देता है, जबकि गुरु आपके जन्म से मरण तक साथ रहता है वही गुरु है। गुरु सारी मर्यादाओं को जानता है पर शिक्षक को जरूरी मर्यादा से ही मतलब है। गुरु का बताया ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं हो सकता जबकि शिक्षक सरकारी तय नीति कुछ बताएगा । हां ये भी सत्य है कुछ शिक्षक शिष्यों से इतना जुड़ जाते हैं कि गुरु बन जाते हैं । शिक्षक दिवस पर इतना ही कहूंगा कि शिक्षक से गुरु बनिये , जिससे छात्र कभी निराश ना हो । उसे कभी नहीं लगना चाहिए कि उसकी सुनने वाला कोई नहीं ।
शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं 🌹
हेमन्त भारद्वाज
वरिष्ठ पत्रकार एवं
संस्थापक भारद्वाज गुरुकुल
इस बार रक्षाबंधन पर्व 19 अगस्त को दोपहर 1बजकर33 मिनट के बाद शाम 7 बजे तक मनाया जाएगा । भद्रा रात 3.05 से दोपहर 1.33 तक रहेगी।
पं हेमन्त भारद्वाज
क्यों कहते हैं, जल है तो कल है ?
जब बात जल (पानी) की होती है तो ध्यान इसकी शक्ति पर जाता है। सबसे पहला इसका गुण ऊर्जा है । भारतीय दर्शन में इसे सबसे बड़ा पवित्रक माना गया है । यह शरीर रूपी आयतन को ऊर्जा देने वाला,प्राणरक्षक है । इस धरती पर ऐसा कोई रोग नहीं जो जल से ठीक नहीं हो सकता ,अर्थात यह सम्पूर्ण रोगों का नाश करने में सक्षम है। यह डॉक्टरों का भी डॉक्टर है । रोगी को जल देने वाला विद्वान हो तो वह असाध्य कार्य भी सिद्ध कर सकता है।इसलिए इसे कभी गन्दा नहीं करना चाहिए । जहां भी पवित्र जल दिखे (नदी सरोवर आदि) उसे प्रणाम अवश्य करना चाहिए । जब निरोग रहेंगे तो कल भी देख पाएंगे । इसलिए "जल है तो कल है" कहा गया ।यह उद्घोषक वाक्य जल के महत्व शक्ति को इंगित करता है ............
हेमंत भारद्वाज
philosopher
विश्वास का विश्वास
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भारत पर आक्रमण करने वाले नादिर शाह का एक किस्सा भी मशहूर हुआ था. उसने मज़ार के बाहर अंधे होने का नाटक करने वाले एक भिखारी से पूछा, कि वह अपनी आंखों के ठीक होने के लिए कब से मज़ार पर दुआ मांग रहा था. उसने कहा कि दो साल से. नादिर शाह ने उससे कहा कि अगर दो साल तक दुआ मांगने के बाद भी इसकी आंखें ठीक नहीं हो रही है, तो इसका मतलब है कि इसका ईमान (विश्वास) बहुत कमज़ोर है.
नादिर शाह ने भिखारी से कहा कि अगर उनके मज़ार से बाहर आने तक उसकी आंखें ठीक नहीं हुई तो, तो वह समझेंगे कि उसका ईमान ठीक नहीं था और वे उसका सिर काट देंगे.
इतिहासकार लिखते हैं कि जब नादिर शाह थोड़ी देर बाद वापस आये तो उस फ़क़ीर ने आगे बढ़ कर कहा, कि "चमत्कार हो गया, चमत्कार हो गया" आंखें ठीक हो गई हैं. नादिर शाह ने मुस्कुराते हुए कहा कि विश्वास ही सब कुछ होता है और वहां से चले गए.
Sabhaar
17/03/2022
Happy holi
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