D E I Engg College/Faculty of engg. Dayalbagh.Agra

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DEI ENGG COLLEGE IS ONE OF THE OLDEST AND PRESTIGIOUS ENGINEERING COLLEGES OF UTTAR PRADESH. IT WAS ESTABLISHED IN THE YEAR 1950.

05/02/2026

हाँ मुझे याद है :
भले ही आज वो सारी बातें एक-एक करके सामने न हों,
तब मेरा कॉलेज : DEI आधुनिक नहीं था,
लेकिन इरादे मज़बूत थे।

हमने स्मार्ट क्लासरूम नहीं देखे,
पर ज़िंदगी की सबसे कठिन कक्षाएँ वहीं पास कीं।
सीखा कि सीमित साधनों में कैसे hard और smart काम किया जाता है,
बिना शोर किए, बिना दिखावे के।

वो साल हमें चमक नहीं दे पाए,
पर उन्होंने हमें टिकना सिखाया।
संघर्ष में आत्मसम्मान,
सफलता में सादगी,
और भीड़ में अपनी अलग पहचान।

आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो समझ आता है —
डिग्री से ज़्यादा क़ीमती वो माहौल था,
जहाँ दोस्ती स्वार्थ से मुक्त थी,
और सपने मेहनत के भरोसे खड़े होते थे।

हमारा कॉलेज शायद modern नहीं था,
पर उसने हमें इंसान बनाया —
और वही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

— यादों की सवारी के लिए 🚲✨आप सब के नाम ,,

❤️❤️
- शंकर करगेती
(1979-83)

10/12/2025
MIAMI: CITY THAT NEVER SLEEPS,/ मियामी : सपनों का शहर / BEACHES FUN, VIBES / SUN, SEA AND PALM TREES 11/04/2025

https://youtu.be/f9EPKfwnn1s?si=6ah90BVrNeMCtkvq
👍Good morning 👍

Pl come with me for MIAMI tour in 13 minutes with Beautiful beaches and crazy life.

MIAMI: CITY THAT NEVER SLEEPS,/ मियामी : सपनों का शहर / BEACHES FUN, VIBES / SUN, SEA AND PALM TREES Miami – एक ऐसा शहर जो अपनी नाइटलाइफ़, खूबसूरत बीचेस और ज़िंदादिली के लिए जाना जाता है।इस व्लॉग में मैं आपको लेकर चल रहा ...

18/10/2023

मित्रों ,

सच्चाई जानते भी हैं , हर दिन देखते भी हैं फिर क्यों हमको लगता है कि हमको तो सौ साल की उम्र तक जीना है ।

जिस दिन हमको पूरा विश्वास हो जाएगा कि कल का क्या, पल का भी पता नहीं ….,
सारी दुविधाएँ और परेशानियाँ ख़त्म और सही अर्थ में जीना शुरू हो जाएगा ।
😂😂

चलिए , आज से जीना शुरू करते हैं ।
दोस्तों , क्या कहते हो ?

— शंकर करगेती

15/09/2023

एक हास्य व्यंग्य लघु कथा :
खिसियाना बिल्ला !

रमेश भागा भागा मेरे पास आया । बोला एक ज़बरदस्त क़िस्सा है पड़ौस के राम अवतार के विषय में ।
कैसा क़िस्सा ? मैंने बीच में टोकते हुए पूछा ।
मज़ा आ जाएगा सुनकर , मगर एक शर्त है कि ये बात और किसी को मत बता देना ।
मैंने कहा : तो फिर मत बताओ !
जो बात तुम्हारे पेट में नहीं पच रही , मेरे में कैसे पचेगी ?
रमेश अवाक रह गया , उसके चेहरे पर खिसियाने के भाव थे मगर न वो कोई बिल्ली था और न आसपास कोई खम्बा , नोचने के लिए ।
वो वापस चला गया हताश , निराश और बेआस ।

फिर से किसी नये शिकार कि खोज में ….।

- शंकर करगेती

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Dayalbagh
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