Sunny yadav sir

Sunny yadav sir Educator
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08/09/2025

ऐसा गणेश विसर्जन धर्म के लिए हानिकारक | science vs पाखंड

गोंडा (उत्तर प्रदेश) की सड़क पर जब एक मां चीख-चीखकर अपने बेटे का शव उठाने को कह रही थी,तब पूरा सिस्टम… खामोश खड़ा था। एं...
06/08/2025

गोंडा (उत्तर प्रदेश) की सड़क पर जब एक मां चीख-चीखकर अपने बेटे का शव उठाने को कह रही थी,तब पूरा सिस्टम… खामोश खड़ा था। एंबुलेंस से जबरन शव को घसीटकर सड़क पर फेंका गया —नहीं, ये कोई गलती नहीं थी…ये था एक बेबस परिवार का आखिरी विरोध।
उस बेटे को पीटा गया, उंगलियां कुचली गईं, अस्पताल में दम तोड़ दिया…
लेकिन मौत के बाद भी न्याय नहीं मिला।

इसलिए मां-बाप ने शव को एंबुलेंस से निकाला और हाईवे पर रख दिया…
ताकि दुनिया देखे,
कि इस देश में कभी-कभी
"मरे हुए को ज़िंदा करना आसान होता है,
लेकिन ज़िंदा को इंसाफ दिलाना नामुमकिन।"

🚨 सवाल ये नहीं कि उन्होंने शव को क्यों फेंका…
सवाल ये है कि उन्हें ऐसा करने की नौबत क्यों आई?


#गोंडा #सोचो_कभी

"एक बाप अपने बच्चे को पढ़ाना चाहता था… लेकिन जब स्कूल की फीस और किताबों के बिल देखे तो उसकी आंखें भर आईं… वो मजदूर था, म...
06/08/2025

"एक बाप अपने बच्चे को पढ़ाना चाहता था… लेकिन जब स्कूल की फीस और किताबों के बिल देखे तो उसकी आंखें भर आईं… वो मजदूर था, मजबूर नहीं… सीधा कलेक्टर के पास पहुंच गया और फिर जो हुआ, वो पूरे सिस्टम को झकझोर गया!"

एक गरीब मजदूर अपने बच्चे के लिए 2130 रुपये की किताबें लेकर स्कूल गया, लेकिन जब स्कूल ने ज़रूरत से ज़्यादा वसूली की, तो वो हार नहीं माना। मजदूर अपनी शिकायत लेकर सीधा कलेक्टर के पास गया। उसने किताबें और बिल दिखाए। कलेक्टर ने तुरंत एक्शन लेते हुए स्कूल की मान्यता सस्पेंड कर दी। ये घटना बताती है कि अगर हिम्मत हो तो आवाज़ सुनी जाती है। और अगर हर जिले में ऐसा अधिकारी हो जो ग़रीब की सुन सके, तो देश में बदलाव मुमकिन है।

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#गरीबकीलड़ाई #सिस्टमसेटकरदीया #कलेक्टरसाहब #स्कूलकीमनमानी #गरीबीसेसंघर्ष #बेटेकेलिएपिता #थोड़ीहिम्मतथोड़ान्याय

“जिसने दूसरों की ज़िंदगी सँवारने में अपनी ज़िंदगी लगा दी, आज वही फ़रिश्ता ख़ुद ज़िंदगी से रुख़्सत हो गया।”यह कहानी है एक...
02/08/2025

“जिसने दूसरों की ज़िंदगी सँवारने में अपनी ज़िंदगी लगा दी, आज वही फ़रिश्ता ख़ुद ज़िंदगी से रुख़्सत हो गया।”यह कहानी है एक ऐसे इंसान की, जिसने पर्दे पर ही नहीं, असल ज़िंदगी में भी हीरो बनकर जिया। 45 नि:शुल्क विद्यालय, 26 अनाथालय, 16 वृद्धाश्रम और 19 गोशालाएँ – ये कोई सरकारी आंकड़े नहीं, बल्कि एक इंसान की निःस्वार्थ सेवा की मिसाल हैं। 1800 छात्रों की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लेने वाले पुणीत राजकुमार ने न केवल अपने जीते-जी सेवा की, बल्कि मृत्यु के बाद भी अपनी आँखें दान कर समाज को रोशनी दे गए।

उनकी मृत्यु ने सभी को झकझोर कर रख दिया, लेकिन उनके काम आज भी उनकी उपस्थिति का एहसास दिलाते हैं। एक ऐसा किरदार, जिसकी कहानी दिल तोड़ती भी है और इंसानियत पर भरोसा भी जगा देती है।

सूर्य का असली रंग सफ़ेद है। अंतरिक्ष से, जहाँ कोई वायुमंडलीय हस्तक्षेप नहीं है, सूर्य सफ़ेद दिखाई देता है क्योंकि यह दृश...
26/07/2025

सूर्य का असली रंग सफ़ेद है। अंतरिक्ष से, जहाँ कोई वायुमंडलीय हस्तक्षेप नहीं है, सूर्य सफ़ेद दिखाई देता है क्योंकि यह दृश्यमान स्पेक्ट्रम के सभी रंगों को लगभग समान मात्रा में उत्सर्जित करता है। पृथ्वी से देखने पर, वायुमंडल नीले और बैंगनी जैसे छोटे तरंगदैर्ध्यों का प्रकीर्णन करता है, जिससे सूर्य पीला या लाल भी दिखाई देता है, खासकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय।

बिजली प्रकृति की सबसे शक्तिशाली शक्तियों में से एक है। जब यह गिरती है, तो हवा का तापमान लगभग 30,000°C (या 54,000°F) तक ब...
25/07/2025

बिजली प्रकृति की सबसे शक्तिशाली शक्तियों में से एक है। जब यह गिरती है, तो हवा का तापमान लगभग 30,000°C (या 54,000°F) तक बढ़ जाता है, जो सूर्य की सतह से पाँच गुना ज़्यादा गर्म है। इस अत्यधिक गर्मी के कारण हवा तेज़ी से फैलती है, जिससे तेज़ आवाज़ पैदा होती है जिसे हम गड़गड़ाहट के रूप में सुनते हैं।

जैव-प्रकाशवोल्टीय (बीपीवी) पैनलों के विकास की बदौलत शैवाल से बिजली अब एक आशाजनक वास्तविकता बन गई है। ये पैनल स्वच्छ ऊर्ज...
25/07/2025

जैव-प्रकाशवोल्टीय (बीपीवी) पैनलों के विकास की बदौलत शैवाल से बिजली अब एक आशाजनक वास्तविकता बन गई है। ये पैनल स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए शैवाल द्वारा की जाने वाली प्रकाश संश्लेषण की प्राकृतिक प्रक्रिया का उपयोग करते हैं। जब शैवाल प्रकाश संश्लेषण करते हैं, तो वे सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन और ऊर्जा-समृद्ध यौगिकों में परिवर्तित करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रोड द्वारा ग्रहण करके बिजली में परिवर्तित किया जा सकता है। यह शैवाल को नवीकरणीय ऊर्जा का एक जीवंत स्रोत बनाता है, जो जीवाश्म ईंधन का एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करता है।

जैव-प्रकाशवोल्टीय तकनीक अभी अपने प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इसमें अपार संभावनाएं हैं, खासकर दूरस्थ या ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में छोटे उपकरणों और सेंसरों को बिजली देने के लिए। पारंपरिक सौर पैनलों के विपरीत, बीपीवी कम रोशनी की स्थिति में भी बिजली उत्पन्न कर सकते हैं और प्राकृतिक रूप से प्रचुर संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं। शोधकर्ता इस तकनीक का विस्तार करने, दक्षता में सुधार करने और इसे स्थायी ऊर्जा प्रणालियों में एकीकृत करने के तरीके खोज रहे हैं। यदि इसे और विकसित किया जाए, तो शैवाल से चलने वाली बिजली हरित ऊर्जा के भविष्य में क्रांति ला सकती है।

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24/07/2025

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