साधना पथ प्रखर प्रज्ञा l

साधना पथ प्रखर प्रज्ञा l

Share

प्रखर प्रज्ञा सजल श्रद्धा

Photos from साधना पथ प्रखर प्रज्ञा l's post 30/12/2025

देव माता,वेद माता को नमन

03/08/2025

श्रीराधारानी के ५१ दिव्य गुण | 51 Divine Qualities of Shri Radha | Brij Bhakti Ras

02/08/2025

भांडीर वन( वृंदावन)

28/07/2025

🌸 श्रीराधारानी का प्राकट्य

प्रेम की जय हो! ऐसा प्रेम, जिसे पाने के बाद इंसान को कुछ और पाने की इच्छा नहीं रहती। यह प्रेम सभी इच्छाओं, जलन, घमंड और नफ़रत को खत्म कर देता है। यह प्रेम भगवान से भी ऊपर है — क्योंकि भगवान भी प्रेम से बंध जाते हैं।

जिसके दिल में सच्चा प्रेम आ जाता है, उसकी नज़र में सब कुछ सुंदर लगने लगता है। योगी और ज्ञानी लोग जो साधना करके मन को वश में करने की कोशिश करते हैं, वही शुद्धि प्रेम के ज़रिए बहुत आसानी से मिल जाती है।

💖 प्रेम का आगमन

महर्षि शाण्डिल्य, जो प्रेमभक्ति के बड़े ज्ञाता हैं, और जिन्होंने "भक्ति सूत्र" बनाए, वो बहुत भावुक हो उठे थे। क्योंकि आज वही प्रेम, श्रीराधा के रूप में धरती पर आने वाला था।

वज्रनाभ नामक भक्त कथा सुन रहे थे। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ रही थी, उनका रोम-रोम खड़ा हो गया, आँखों से आँसू बहने लगे। कथा सुनाते-सुनाते स्वयं महर्षि शाण्डिल्य भी भाव में इतने बह गए कि उनकी आवाज़ रुक गई।

वो बोले — "अब राधारानी, जो भगवान का प्रेमस्वरूप हैं, प्रकट होने वाली हैं।"

---

🌺 वृषभान जी का सपना

एक दिन वृषभान जी ने अपनी पत्नी कीर्ति देवी से कहा — "मैंने एक अजीब सपना देखा है। मैं सूर्य देव बना हूँ और मेरे सामने सभी देवता खड़े हैं। वे मुझसे कह रहे हैं कि चंद्रवंश में भगवान कृष्ण ने जन्म ले लिया है, लेकिन सूर्यवंश में कुछ नहीं हुआ।"

तब मैंने कहा — "मेरे वंश में स्वयं 'आह्लादिनी शक्ति', यानी श्री राधा जन्म लेंगी।"

ये सुनकर मेरे बेटे शनिदेव ने पूछा — "मेरी बहन कहाँ प्रकट होंगी?"

मैंने जवाब दिया — "बरसाना में।"

बस फिर क्या था — शनिदेव बरसाना में आ गए और वहाँ ज़मीन से सोना, चाँदी और रत्न निकलने लगे।

---

🌼 कीर्ति रानी का सपना

इसके बाद कीर्ति रानी ने भी बताया कि उन्होंने भी एक सपना देखा है — “मैंने देखा कि बिना किसी कष्ट के मेरे गर्भ से एक सुंदर कन्या प्रकट हुई। सब देवता उसकी जय-जयकार कर रहे थे — ‘जय राधे! जय श्री राधे!’”

वो कन्या मुझे "मैया" कहकर बुला रही थी। जैसे ही उसने यह कहा, मेरे शरीर से दूध बहने लगा और वह मेरा दूध पीने लगी। मैं उस समय दुनिया से परे, प्रेम में डूबी हुई थी।

वृषभान जी ने कहा — "लगता है अब उस कन्या का जन्म निकट है। मैं स्नान करने यमुना जा रहा हूँ।"

---

👵 मुखरा मैया का आगमन

तभी मुखरा मैया (कीर्ति की माँ) घर आ गईं। उन्होंने कीर्ति की आँखें, नाड़ी और पेट देखकर कहा —
"आज ही लाली (बेटी) का जन्म होगा!"

उनकी बात कभी झूठी नहीं होती थी।

---

🌷 रास्ते में चमत्कार

वृषभान जी जब यमुना स्नान के लिए जा रहे थे, तो रास्ते में कई ग्वालों ने उन्हें बताया कि उन्होंने ज़मीन में खुदाई की तो वहाँ हीरे, मणि और सोना निकल रहा है।

एक ग्वाले ने बताया कि रात को बिजली गिरने पर एक काली मूर्ति वहाँ प्रकट हुई, जिससे दिव्य तेज़ निकल रहा था।
वृषभान समझ गए — यह शनिदेव ही हैं, जो यहाँ प्रकट हुए हैं।

---

🪷 यमुना किनारे अद्भुत दृश्य

जब वृषभान यमुना स्नान कर रहे थे, तब उन्होंने ध्यान में एक अद्भुत दृश्य देखा। यमुना किनारे एक बहुत बड़ा कमल खिला हुआ था, और उसमें से एक सुंदर कन्या मुस्कराते हुए प्रकट हुई।

आकाश से देवताओं ने फूलों की वर्षा की और सभी ने गाया —
"जय राधे! जय श्री राधे!"

---

👶 राधारानी का जन्म

वृषभान जी जब ध्यान से जागे तो सूरज चढ़ चुका था। वे जल्दी घर पहुँचे, वहाँ देखा — कीर्ति रानी के पास एक बेहद सुंदर कन्या खेल रही है। उसकी त्वचा सुनहरे कमल जैसी चमक रही थी और पूरे कमरे में उसकी देह से सुगंध फैल रही थी।

वृषभान जी की आँखों से आनंद के आँसू बह निकले। बाहर गाँव की औरतें गा रही थीं:

"देन बधाई चलो आली, भानु घर प्रकटी हैं लाली..."

मुखरा मैया दीपों की थालें लेकर नाच रही थीं। चारों ओर ख़ुशी और प्रेम का माहौल था।

27/07/2025
04/06/2024

परम पूज्य गुरुदेव का अंतिम संदेश (२/जून 1990)
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹"अस्सी वर्ष जी गई लंबी सोद्देश्य शरीर यात्रा पूरी हुई ।इस अवधि में परमात्मा को हर पल अपने हृदय और अंतरकरण में प्रतिष्ठित मानकर एक-एक क्षण का पूरा उपयोग किया है। शरीर अब विद्रोह कर रहा है ।यों उसे कुछ दिन और घसीटा भी जा सकता है ,पर जो कार्य परोक्ष मार्गदर्शक सत्ता ने सोंपे ,वे सूक्ष्म और कारण शरीर से ही संपन्न हो सकते हैं ।ऐसी स्थिति में कृशकाय शरीर से मोह का कोई औचित्य भी नहीं है ।"ज्योति बुझ गई "यह भी नहीं समझा जाना चाहिए। अब तक के जीवन में जितना कार्य इस स्थूल शरीर ने किया है ,उससे 100 गुना सूक्ष्म अंतःकरण से संभव हुआ है ।आगे का लक्ष्य विराट है। संसार भर के छह अरब मनुष्यों की अंतश्चेतना को प्रभावित और प्रेरित करने, उनमें आध्यात्मिक प्रकाश और ब्रह्मवर्चस् जगाने का कार्य पराशक्ति से ही संभव है। जीवन की अंतिम घड़ियां उसी उपक्रम में बीती हैं ।

इसके उपरांत वे सभी परिजन, जिन्हें हमने ममत्व के सूत्रों में से बांधकर परिवार के रूप में विस्तृत रूप दे दिया है, संभवत: स्थूल नेत्रों से हमारी काया को नहीं देख पाएंगे,पर हम उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि इस शताब्दी के अंत तक, जब तक सूक्ष्म या शरीर कारण के स्तर तक ना पहुंच जाएं हम शांतिकुंज परिसर व प्रत्येक परिजन के अंत:करण में विद्यमान रहकर अपने बालकों में नवजीवन और उत्साह भरते रहेंगे। उनकी समस्या का समाधान उसी प्रकार निकालता रहेगा, जैसा कि हमारी उपस्थिति में उन्हें उपलब्ध होता ।

हमारे आपसी संबंध अब और भी प्रगाढ़ हो जाएंगे, क्योंकि हम बिछड़ने के लिए नहीं जुड़े थे ।हमें एक क्षण के लिए भी भुला पाना आत्मीय परिजनों के लिए कठिन हो जाएगा । ब्रह्मकमल के रूप में हम तो खिल चुके ,किंतु उसकी शोभा और सुगंधि के विस्तार हेतु ऐसे अगणित ब्रह्मबीज देव मानव उत्पन्न किये जा रहे हैं ,जो खिलकर समूचे संस्कृति सरोवर को सौंदर्य -सुवास से भर सकें ,मानवता को निहाल कर सकें।

ब्रह्मनिष्ठ आत्माओं का उत्पादन ,प्रशिक्षण एवं युग- परिवर्तन के महान कार्य में उनका नियोजन बड़ा कार्य है। यह कार्य हमारे उत्तराधिकारियों को करना है। शक्ति हमारी काम करेगी तथा प्रचंड शक्ति प्रवाह अगणित देवात्माओं को इस मिशन से अगले दिनों जोड़ेगा ।उन्हें संरक्षण स्नेह देने, खरादने, सवारने का कार्य माताजी संपन्न करेंगी ।हम सतयुग की वापसी के सरंजाम में जुट जाएंगे ।जो भी संकल्पनाएं नवयुग के संबंध में हमने की थीं ,वे साकार होकर रहेंगी ।इसी निमित्त कायपिंजर का सीमित परिसर छोड़कर हम विराट धनीभूत प्राण ऊर्जा के रूप में विकसित होने जा रहे हैं ।देव समुदाय के सभी परिजनों को मेरे कोटि-कोटि आशीर्वाद ,आत्मिक प्रगति की दिशा में अग्रसर होने हेतु गणित शुभकामनाएं।

08/04/2024

भारतीय नव वर्ष की पूर्व संध्या पर आयोजित पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ

Want your school to be the top-listed School/college in Agra?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Address


Agra