14/04/2025
#वैष्णोदेवी_कीस्थापना_कारहस्य
जब पार्वती जी ने राजा दक्ष के हवन कुंड में छलांग लगा दी थी तब उनका सारा शरीर जल गया था पर अस्थि पिंजर शेष बचा था। शिव जी ने उस कंकाल को 10 हजार वर्स तक अपने सीने से लगाए रखा था। एक दिन भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उस अस्थि पिंजर के टुकड़े कर दिए थे। जहां नैन गिरे वहां नैना देवी मंदिर बना। और जहां धड़ गिरा वहां वैष्णो देवी मंदिर की स्थापना हुई। ये केवल यादगार हैं। वहां जाकर पूजा करना शास्त्रानुकूल नहीं है। देवी को प्रसन्न करने के लिए उनके मूल मंत्र पूर्ण गुरु से प्राप्त करने होंगे।
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14/04/2025
#वैष्णोदेवी_कीस्थापना_कारहस्य
एक बार अपने पिता राजा दक्ष के हवन कुंड में पार्वती जी कूद गई थी और मृत्यु को प्राप्त हो गयी थी। उनके जले हुए शेष शरीर को लेकर भगवान शंकर 10 हजार वर्स तक पार्वती पार्वती करते हुए पागलों की तरह घूमते रहे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके कंकाल के टुकड़े कर दिए। जहां नैन गिरे नैना देवी मंदिर बना दिया। जहां धड़ गिरा वहां वैष्णो देवी। इस प्रकार यादगारें बनाई। लेकिन वहां देवी नहीं है।
देवी की शास्त्रविधि अनुसार पूजा जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ही बताते हैं।
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30/01/2025
👉📚📚इसमें सभी ग्रंथों का सार है ।यह पुस्तक मैंने भी पड़ी है ,बहुत ही अनमोल ज्ञान की पुस्तक है। मेरी सभी से प्रार्थना है कि इस पुस्तक को जरूर पढ़ें जरूर ही निःशुल्क मंगवाए।
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19/01/2025
#क्या आप जानते हैं
🎉 गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में गीता ज्ञान दाता ने संकेत किया है कि इस सच्चिदानंद घन ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म की भक्ति का ऊँ तत् सत् यह तीन मंत्र का जाप है, इसी का जाप करने का निर्देश है।
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18/01/2025
श्रीमद्भगवत् गीता अध्याय 4 श्लोक 32 तथा 34 में भी प्रमाण है। गीता ज्ञान दाता ने बताया कि हे अर्जुन ! परम अक्षर ब्रह्म अपने मुख कमल से तत्वज्ञान बोलकर बताता है, उस सच्चिदानन्द घन ब्रह्म की वाणी में यज्ञों अर्थात् धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी विस्तार से कही गई है। उसको जानकर सर्व पापों से मुक्त हो जाएगा। फिर गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा है कि उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी सन्तों के पास जाकर समझ। उनको दण्डवत प्रणाम करके विनयपूर्वक प्रश्न करने से वे तत्वदर्शी सन्त तुझे तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे।
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18/01/2025
ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 5
कूचिज्जायते सनयासु नव्यो वने तस्थौ पलितो धूमकेतुः। अस्नातापो वृषभो न प्रवेति सचेतसो य प्रणयन्त मर्ताः।।5 //
भावार्थ - पूर्ण परमात्मा जब मानव शरीर धारण कर
पृथ्वी लोक पर आता है उस समय अन्य वृद्ध रूप धारण करके पूर्व जन्म के भक्ति युक्त भक्तों के पास तथा नए मनुष्यों को नए भक्ति संस्कार उत्पन्न करने के लिए वृद्ध रूप में सफेद दाढ़ी युक्त होकर जंगल तथा ग्राम में वसे भक्तों के पास विद्युत जैसी तीव्रता से जाता है अर्थात् जब चाहे जहाँ प्रकट हो जाता है। उन्हें सत्य भक्ति प्रदान करके मोक्ष प्राप्त कराता है।
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05/08/2024
🎉गीताजी अध्याय 4 श्लोक 5 में गीता ज्ञान देने वाला भगवान स्वयं को जन्म मरण के अंतर्गत बता रहा है, फिर जन्म मरण से परे अविनाशी व पूजनीय पूर्ण परमात्मा कौन है?
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𝐌𝐨𝐛𝐢𝐥𝐞 𝐍𝐨..........
𝐍𝐚𝐦𝐞.......
𝐀𝐝𝐝𝐫𝐞𝐬𝐬.............
𝐕𝐢𝐥𝐥/𝐂𝐢𝐭𝐲...........
𝐃𝐢𝐬𝐭𝐫𝐢𝐜𝐭.............
𝐏𝐢𝐧 𝐂𝐨𝐝𝐞..........
𝐒𝐭𝐚𝐭𝐞................
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26/07/2024
#तीर्थ_से_पुण्य_है_या_पाप
#मोक्ष_मंत्र_क्या_है
तीर्थों से नहीं होता लाभ
सूक्ष्मवेद में कहा गया है:-
कबीर, तीर्थ कर-कर जग मुआ, ऊड़ै पानी न्हाय। सत्यनाम जपा नहीं, काल घसीटें जाय।।
परमेश्वर कबीर जी बताते हैं कि भ्रमित ज्ञान के आधार से संसार के व्यक्ति तीर्थों पर जाते हैं। आजीवन यह साधना करते हैं। जब मृत्यु हो जाती है तो उनको राहत उस साधना से नहीं मिलती। काल के दूत उनको बलपूर्वक (घसीटकर) खींचकर ले जाते हैं, दंडित करते हैं।
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18/07/2024
📚 𝐆𝐄𝐓 𝐅𝐑𝐄𝐄 𝐁𝐎𝐎𝐊"ज्ञान गंगा "📚
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सूक्ष्मवेद में कहा गया है
गरीब, भूत योनि छूटत है, पिंड प्रदान करंत।
गरीबदास जिंदा कह, नहीं मिले भगवंत।।
अर्थात् सूक्ष्मवेद में बताया है कि पिंड दान करने से भूत योनि छूट जाती है। परमात्मा प्राप्ति नहीं होती। भूत-पित्तर योनि छूट गई। फिर कुत्ता या गधा ब गया। क्या खाक गति हुई? इसका समर्थन गीता अध्याय 9 श्लोक 25 भी करता है।
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