14/04/2025
#वैष्णोदेवी_कीस्थापना_कारहस्य
जब पार्वती जी ने राजा दक्ष के हवन कुंड में छलांग लगा दी थी तब उनका सारा शरीर जल गया था पर अस्थि पिंजर शेष बचा था। शिव जी ने उस कंकाल को 10 हजार वर्स तक अपने सीने से लगाए रखा था। एक दिन भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उस अस्थि पिंजर के टुकड़े कर दिए थे। जहां नैन गिरे वहां नैना देवी मंदिर बना। और जहां धड़ गिरा वहां वैष्णो देवी मंदिर की स्थापना हुई। ये केवल यादगार हैं। वहां जाकर पूजा करना शास्त्रानुकूल नहीं है। देवी को प्रसन्न करने के लिए उनके मूल मंत्र पूर्ण गुरु से प्राप्त करने होंगे।
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