Maharani Ahilyabai HIGH SCHOOL,Mulla ki pyau jagner road Dhanoli Agra

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Maharani Ahilyabai HIGH SCHOOL,Mulla ki pyau jagner road Dhanoli Agra वो जो स्कूल के दरवाजे खोलता है, जेल के दरवाजे बंद करता है|

11/10/2025

आँख मूँदकर बैठेंगे तो भव्य बनाकर छोड़ेंगे,हाथ पकड़ लेंगे तो तुमको दिव्य बनाकर छोड़ेंगे।
गुरु की गुरुता के ऊपर किञ्चित सन्देह नहीं करना,गुरु मिट्टी के भी होंगे तो एकलव्य बनाकर छोड़ेंगे।।

15/12/2023
22/12/2022

संख्या 1729 को रामानुजन संख्या या हार्डी-रामानुजन संख्या कहा जाता है धनात्मक संख्याए है जिनके दो संख्याओं के घनों के यग्मो के योग के बराबर लिखा जा सकता है। इस प्रकार का गुण रखने वाली बहुत ही कम अन्य संख्याएँ हैं।

रामानुजन् एक प्रकार से संख्याओं के जादूगर थे। संख्याओं के साथ उनका गहरा संबंध था। हम कह सकते हैं कि वे संख्याओं के साथ खेलते थे। श्रीनिवास रामानुजन जब इंग्लैंड में थे तो अक्सर बीमार रहते थे। उनके परामर्शदाता जी.एच. हार्डी ने, न केवल उनकी प्रतिभा को दुनिया के सामने लाने में निर्णायक भूमिका निभाई, बल्कि उनके विदेश प्रवास के दौरान उनके स्वास्थ्य का ध्यान भी रखा। लगभग प्रतिदिन ही वह रामनुजन को ठीक से खाना खाने और नियमित रूप से दवाइयां न लेने के लिए डांटते थे। ऐसे ही एक दिन जब रामानुजन अस्पताल में थे तो हार्डी उनसे मिलने आए। हार्डी उस दिन बहुत उदास लग रहे थे। रामनुजन ने उनसे पूछा, ‘‘आप इतने परेशान क्यों लग रहे हैं, आज तो मैं अपेक्षाकृत पहले से बेहतर हूँ।’’

हार्डी ने उत्तर दिया, तुम तो संख्याओं के जादूगर हो, परन्तु आज मैं जिस टैक्सी में आया हूँ मुझे उसका नम्बर बहुत ही नीरस लगा। ‘‘क्या नंबर था?’’ रामानुजन ने पूछा। हार्डी ने कहा, ‘‘उसका नंबर था 1729। तुरंत रामानुजन ने उत्तर दिया, शायद 1729 से अधिक रोचक संख्या तो कोई हो ही नहीं सकती। ऐसी कुछ ही संख्याएँ हैं जिन्हें दो घनों के योग के रूप में दो अलग-अलग ढंग से लिखा जा सकता है और 1729 उनमें सबसे छोटी संख्या है।’’

19/11/2022

संस्कृत वर्णमाला के सभी 33 व्यंजन इस श्लोक मै हैं ।

क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोSटौठीडढण:।
तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।।

अर्थात: पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनार कौन ?? राजा मय ! जिसको शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं।

एक अक्षर से बना श्लोक

क: कौ के केककेकाक: काककाकाकक: कक:।
काक: काक: कक: काक: कुकाक: काकक: कुक:।।

अर्थ- परब्रह्म श्री राम पृथ्वी और साकेतलोक में दोनो स्थानों पर सुशोभित हो रहे हैं। उनसे सम्पूर्ण ब्रह्मांड में आनंद नि:सृत होता है। वह मयूर की केकी एवं काक की काँव-काँव में आनंद और हर्ष की अनुभूति करते हैं। उनसे समस्त लोकों के लिए सुख का प्रादुर्भाव होता है। उनके लिए (वनवास के) दुःख भी सुख हैं । उनका काक ( काकभुशुण्डि) प्रशंसनीय है। उनसे ब्रह्मा को भी परमानंद की प्राप्ति होती है । वह (अपने भक्तों को पुकारते हैं। उनसे कूका अथवा सीता को भी आमोद प्राप्त होता है । वह अपने काक ( काकभुशुण्डि) को पुकारते हैं और उनसे सांसारिक फलों एवं मुक्ति का आनंद प्रकट होता है ।

दो अक्षरों से मिलकर बना श्लोक।

भूरिभिर्भारिभिर्भीराभूभारैरभिरेभिरे।
भेरीरे भिभिरभ्राभैरभीरुभिरिभैरिभा:।

अर्थात- निर्भय हाथी जो की भूमि पर भार स्वरूप लगता है, अपने वजन के चलते, जिसकी आवाज नगाड़े की तरह है और जो काले बादलों सा है, वह दूसरे दुश्मन हाथी पर आक्रमण कर रहा है।

तीन अक्षरों से मिलकर बना श्लोक

देवानां नन्दनो देवो नोदनो वेदनिंदिनां
दिवं दुदाव नादेन दाने दानवनंदिनः।।

अर्थात - वह परमात्मा [विष्णु] जो दूसरे देवों को सुख प्रदान करता है और जो वेदों को नहीं मानते उनको कष्ट प्रदान करता है। वह स्वर्ग को उस ध्वनि नाद से भर देता है, जिस तरह के नाद से उसने दानव [हिरण्यकशिपु] को मारा था।

चार अक्षरों से मिलकर बना श्लोक

जजौजोजाऽऽजिजिज्जाजी तं ततोऽतितताऽतितुत्।भाऽऽभोऽभीभाऽभिभूभाभूराराऽरिररिरीरर:।।

अर्थ-योद्धाओं के तेज एवं पराक्रम से उत्पन्न होने वाले युद्ध को जीतने वाले, युद्ध में निपुण नितान्त उद्धत (शत्रुवर्ग) को अत्यंत त्रस्त करने वाले, नक्षत्र के सदृश कान्तिमान (शुभ्रवर्ण) निर्भीक गजराजों को भी पराजित करने वाले रथारूढ़ बलराम उस (वेणुदारी) के साथ युद्ध करने के लिए दौड़ पड़े।

24/10/2022

"मेरी कामना है कि आपके जीवन में, अंदर और बाहर दोनों जगह, प्रकाश हो।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि जीवन का प्रकाश और उसकी संभावनाएं हमें और भावी पीढ़ियों को प्रकाशवान बनाएं

प्रेम और आशीर्वाद"

20/09/2022


एक जमाना था...
खुद ही स्कूल जाना पड़ता था क्योंकि साइकिल बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुरा होगा ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे...
उनको किसी बात का डर भी नहीं होता था,
पास/नापास यही हमको मालूम था... *%* से हमारा कभी भी संबंध ही नहीं था...
ट्यूशन लगाई है ऐसा बताने में भी शर्म आती थी क्योंकि हमको ढपोर शंख समझा जा सकता था...

किताबों में पीपल के पत्ते, विद्या के पत्ते, मोर पंख रखकर हम होशियार हो सकते हैं ऐसी हमारी धारणाएं थी...
कपड़े की थैली में...बस्तों में..और बाद में एल्यूमीनियम की पेटियों में...
किताब कॉपियां बेहतरीन तरीके से जमा कर रखने में हमें महारत हासिल थी.. ..
😁 हर साल जब नई क्लास का बस्ता जमाते थे उसके पहले किताब कापी के ऊपर रद्दी पेपर की जिल्द चढ़ाते थे और यह काम...
एक वार्षिक उत्सव या त्योहार की तरह होता था.....
साल खत्म होने के बाद किताबें बेचना और अगले साल की पुरानी किताबें खरीदने में हमें किसी प्रकार की शर्म नहीं होती थी..
क्योंकि तब हर साल न किताब बदलती थी और न ही पाठ्यक्रम...
🤪 हमारे माताजी पिताजी को हमारी पढ़ाई बोझ है..
ऐसा कभी लगा ही नहीं....
😞 किसी एक दोस्त को साइकिल के अगले डंडे पर और दूसरे दोस्त को पीछे कैरियर पर बिठाकर गली-गली में घूमना हमारी दिनचर्या थी....
इस तरह हम ना जाने कितना घूमे होंगे....
🥸😎 स्कूल में मास्टर जी के हाथ से मार खाना, पैर के अंगूठे पकड़ कर खड़े रहना, और कान लाल होने तक मरोड़े जाते वक्त हमारा ईगो कभी आड़े नहीं आता था.... सही बोले तो ईगो क्या होता है यह हमें मालूम ही नहीं था...
🧐😝 घर और स्कूल में मार खाना भी हमारे दैनंदिन जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया थी.....
मारने वाला और मार खाने वाला दोनों ही खुश रहते थे...
मार खाने वाला इसलिए क्योंकि कल से आज कम पिटे हैं और मारने वाला इसलिए कि आज फिर हाथ धो लिए 😀......
😜 बिना चप्पल जूते के और किसी भी गेंद के साथ लकड़ी के पटियों से कहीं पर भी नंगे पैर क्रिकेट खेलने में क्या सुख था वह हमको ही पता है...
😁 हमने पॉकेट मनी कभी भी मांगी ही नहीं और पिताजी ने कभी दी भी नहीं....इसलिए हमारी आवश्यकता भी छोटी छोटी सी ही थीं....साल में कभी-कभार दो चार बार सेव मिक्सचर मुरमुरे का भेल, गोली टॉफी खा लिया तो बहुत होता था......उसमें भी हम बहुत खुश हो लेते थे.....
😲 छोटी मोटी जरूरतें तो घर में ही कोई भी पूरी कर देता था क्योंकि परिवार संयुक्त होते थे ..
🥱 दिवाली में लगी पटाखों की लड़ी को छुट्टा करके एक एक पटाखा फोड़ते रहने में हमको कभी अपमान नहीं लगा...
😁 हम....हमारे मां बाप को कभी बता ही नहीं पाए कि हम आपको कितना प्रेम करते हैं क्योंकि हमको आई लव यू कहना ही नहीं आता था...
😌 आज हम दुनिया के असंख्य धक्के और टाॅन्ट खाते हुए......
और संघर्ष करती हुई दुनिया का एक हिस्सा है..किसी को जो चाहिए था वह मिला और किसी को कुछ मिला कि नहीं..क्या पता..
😀 स्कूल की डबल ट्रिपल सीट पर घूमने वाले हम और स्कूल के बाहर उस हाफ पेंट मैं रहकर गोली टाॅफी बेचने वाले की दुकान पर दोस्तों द्वारा खिलाए पिलाए जाने की कृपा हमें याद है.....
वह दोस्त कहां खो गए , वह बेर वाली कहां खो गई....
वह चूरन बेचने वाली कहां खो गई...पता नहीं..
😇 हम दुनिया में कहीं भी रहे पर यह सत्य है कि हम वास्तविक दुनिया में बड़े हुए हैं हमारा वास्तविकता से सामना वास्तव में ही हुआ है...
🙃 कपड़ों में सलवटें ना पड़ने देना और रिश्तों में औपचारिकता का पालन करना हमें जमा ही नहीं......
सुबह का खाना और रात का खाना इसके सिवा टिफिन में अखबार में लपेट कर रोटी ले जाने का सुख क्या है, आजकल के बच्चों को पता ही नही ...
😀 हम अपने नसीब को दोष नहीं देते....जो जी रहे हैं वह आनंद से जी रहे हैं और यही सोचते हैं....और यही सोच हमें जीने में मदद कर रही है.. जो जीवन हमने जिया...उसकी वर्तमान से तुलना हो ही नहीं सकती ,,,,,,,,
😌 हम अच्छे थे या बुरे थे नहीं मालूम , पर हमारा भी एक जमाना था
🙏🏻☺😊

18/09/2022

अदभुत...

गणित में कोई भी संख्या 1 से 10 तक के सभी अंकों से नहीं कट सकती, लेकिन इस विचित्र संख्या को देखिये...! दरअसल, सदियों तक यह माना जाता रहा था कि ऐसी कोई भी संख्या नहीं है जिसे 1 से 10 तक के सभी अंको से विभाजित किया जा सके। लेकिन रामानुजन ने इन अंकों के साथ माथापच्ची करके इस मिथ को भी तोड़ दिया था। उन्होंने एक ऐसी संख्या खोजी थी जिसे 1 से 10 तक के सभी अंकों से विभाजित किया जा सकता है। यानी भाग दिया जा सकता है। यह संख्या है (2520)। संख्या 2520 अन्य संख्याओं की तरह... वास्तव में एक सामान्य संख्या नही है, यह वो संख्या है जिसने विश्व के गणितज्ञों को अभी भी आश्चर्य में किया हुआ है...!!

यह विचित्र संख्या 1 से 10 तक प्रत्येक अंक से भाज्य है। ऐसी संख्या जिसे इकाई तक के किसी भी अंक से भाग देने के उपरांत शेष शून्य रहे, बहुत ही असम्भव/ दुर्लभ है, ऐसा प्रतीत होता है...!!

अब निम्न सत्य को देखें:
2520 ÷ 1 = 2520
2520 ÷ 2 = 1260
2520 ÷ 3 = 840
2520 ÷ 4 = 630
2520 ÷ 5 = 504
2520 ÷ 6 = 420
2520 ÷ 7 = 360
2520 ÷ 8 = 315
2520 ÷ 9 = 280
2520 ÷ 10 = 252

महान गणितज्ञ अभी भी आश्चर्यचकित हैं: 2520 वास्तव में एक गुणनफल है《7 x 30 x 12》का।

उन्हे और भी आश्चर्य हुआ जब प्रमुख गणितज्ञ द्वारा यह संज्ञान में लाया गया कि संख्या 2520 हिन्दू संवत्सर के अनुसार... एकमात्र यही संख्या है, जो वास्तव में उचित बैठ रही है:

जो इस गुणनफल से प्राप्त है ::

सप्ताह के दिन (7) x माह के दिन (30) x वर्ष के माह (12) = 2520

यही है भारतीय गणना की श्रेष्ठता!

14/09/2022

हिन्दी मात्र भाषा नहीं है हमारी मातृ भाषा है ,और माँओं पर हँसा नहीं जाता😊 इसलिए हिन्दी दिवस के नाम पर फूहड़ पोस्ट ना करें 🙏

किसी विद्यालय की महानता या गरिमा का निर्धारण उसकी इमारतों या उपकरण से नहीं होता बल्कि कार्यरत अध्यापकों की विद्या व चरित...
05/09/2022

किसी विद्यालय की महानता या गरिमा का निर्धारण उसकी इमारतों या उपकरण से नहीं होता बल्कि कार्यरत अध्यापकों की विद्या
व चरित्र निर्धारण से होता है|

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